भोपाल। विधानसभा में सरकार की ओर से मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों पर भले ही माननीय खुश हो जाते हैं, लेकिन यह खुशी उनकी अधूरी ही रहती है, इसकी वजह है उनका पूरा न होना। दरअसल संबंधित अफसरों द्वारा ऐसे मामलों में सरकार के आश्वासनों को पूरा करने में रुचि ही नहीं ली जाती है। हालत यह है कि अब सदन के अंदर दिए गए करीब पांच सौ से अधिक आश्वसन अब भी लंबे समय से अधूरे पड़े हुए हैं। दरअसल यह आश्वासन विधानसभा में सवाल-जवाब, ध्यानाकर्षण और बजट तथा अन्य विषयों पर चर्चा के दौरान अक्सर मंत्रियों द्वारा दिए जाते हैं। कुछ आश्वासन तो ऐसे होते हैं जिनमें अफसर यह कहकर रोक लगवा देते हैं कि इनका पूरा करना मुश्किल है, तब उन्हें लंबित रख दिया जाता है। इसके अलावा कई आश्वासनों को पूरा करने में अफसर रुचि ही नहीं लेते हैं। जिसकी वजह से वे पूरा ही नहीं हो पाते हैं। अब लंबे समय बाद विधानसभा का बजट सत्र 22 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, ऐसे में सरकार के संसदीय कार्य विभाग को एक बार फिर अधूरे आश्वासनों को पूरा करने की याद आयी है। यही वजह है कि अब मंत्रियों के आश्वासन और लोक लेखा समितियों की सिफारिशों को पूरा करने के लिए कहा गया है। इस मामले में सबसे खराब हालात पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का है। इस विभाग में सर्वाधिक 80 आश्वासन अधूरे पड़े हुए हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर कृषि विभाग है, जिसमें 62 आश्वासनों को पूरा होने का इंतजार है। अन्य विभागों में नगरीय विकास तथा आवास विभाग में 44, गृह विभाग में मंत्रियों के 42 आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ है। इसी तरह से राजस्व, लोक निर्माण, सामान्य प्रशासन, वाणिज्य कर, आदिम जाति कल्याण, वन, स्कूल शिक्षा, पशुपालन, स्वास्थ्य, सहकारिता, परिवहन, उच्च शिक्षा, अनुसूचित जाति कल्याण, जलसंसाधन, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, महिला एवं बाल विकास सहित 41 विभागों में मंत्रियों के आश्वासनों को पूरा होने का इंतजार बना हुआ है।
लोकलेखा समितियों की भी 145 सिफारिशों पर नहीं हो पाया अमल
विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली लोक लेखा समिति सदन में आने वाले मामलों पर सिफारिशें कर विभागीय मंत्री और अफसरों को उन्हें पूरा करने की अनुशंसा करती है। लेकिन ऐसी 145 अनुशंसाओं पर भी अब तक विभागों ने कोई काम नहीं किया है , जिसकी वजह से वे अधूरी पड़ी हुई हैं। इनमें वाणिज्यिक कर विभाग की सर्वाधिक 36 सिफारिशों को अब भी पूरा होने का इंतजार बना हुआ है। इसी तरह से लोक निर्माण विभाग से जुड़ी 21, पशुपालन विभाग की 19 और राजस्व विभाग की 14 सिफारिशें अब भी पूरा होने का इंतजार है। इसके अलावा गृह, नगरीय प्रशासन,वन, स्कूल शिक्षा,स्वास्थ्य, अनुसूचित जाति कल्याण, जलसंसाधन, महिला एवं बाल विकास,खनिज, नर्मदा घाटी विकास, उद्यानिकी, सामाजिक न्याय विभागों से जुड़ी सिफारिशों पर भी अमल नहीं किया गया है।
मंत्रियों के पांच सौ आश्वासनों पर अफसर भारी





