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*संपत्ति बचाने के लिए भाजपा ही नहीं संघ की वर्दी भी पहन रहे हैं पुराने कांग्रेसी*

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 दिया गया चित्र कांग्रेस के एक पूर्व विधायक का है. ये 2018 से 2023 तक कांग्रेस के विधायक रहे. 2023 में भी कांग्रेस के उम्मीदवार थे लेकिन भाजपा के कद्धावर नेता के सामने टिक नहीं पाए. फिर इन्हें अवैध खदान संचालित करने के आरोप में खनीज विभाग द्वारा 140 करोड़ का नोटिस थमा दिया गया. इससे भयभीत होकर लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा जॉइन कर ली और 140 करोड़ बचा लिये. लेकिन अब इनकी यह मजबूरी कहें या प्रतिबद्धता, विजयादशमी के अवसर पर इन्हें आरएसएस का गणवेश धारण कर फोटो सेशन करवाना पड़ रहा है. यह उल्लेखनीय है कि इनके अलावा इनका पूरा परिवार पहले से ही भाजपा में था. इनके स्व. पिताजी भाजपा के कद्धावर वरिष्ठ नेता थे. एक भाई भी भाजपा से विधायक है. 

ऐसे कई नेता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जा चुके हैं. ऊपर जिनका उल्लेख किया गया है उनके राजनीतिक गुरु सुरेशपचोरी, जिन्हें कांग्रेस ने बार-बार राज्यसभा में भेजा, जबकि वे कभी कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं जीत पाए. विधायकी से लेकर लोकसभा तक के चुनाव उन्होंने कांग्रेस की और से लड़े लेकिन हमेशा पराजय का ही मुंह देखा. बावजूद इसके कांग्रेस ने उन्हें न सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष बनाया बल्कि केंद्र में मंत्री भी बनाया. आजकल वे भाजपा में एक कोने में पड़े हुए हैं. 

कांग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री भी, जो कि इंदिराजी के तीसरे पुत्र के रूप में मशहूर हैं, अपने बेटे पूर्व सांसद के राजनीतिक भविष्य के लिए भाजपा में जाने के लिए बहुत बेचैन थे. वे भाजपा में प्रवेश के लिए दिल्ली भी पहुंच गए थे, लेकिन उन्होंने भाजपा नेतृत्व के समक्ष कुछ अधिक ही मांगें रख दी थी. परिणामस्वरूप उनका भाजपा प्रवेश उस समय रुक गया था. वे अपने बेटे को भी अपनी पुश्तेनी सीट से जीता नहीं पाए और भाजपा के एक साधारण कार्यकर्ता से हार गए. लेकिन अभी भी उन्हें कोई ठोस आश्वासन मिल जाये तो उनका भाजपा प्रवेश संभव है. दिक्क़त यह है कि मध्यप्रदेश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव क्रमशः 2028 और 2029 में होना हैं. इसलिए भाजपा को फिलहाल उनकी जरूरत ही नहीं है. इसलिए मजबूरी में वे कांग्रेस में बने हुए हैं.

कांग्रेस में भाजपा के ऐसे अनगिनत स्लीपर सेल भरे पड़े हैं. अभी हाल ही में पी. चिदंबरम ने यह बयान देकर कि मुंबई में पाकिस्तानी आतंकवादियों के हमले के बाद भारत सरकार ने अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के दबाव में आकर पाकिस्तान के आतंकवादी अड्डों पर मिलट्री/ एयर स्ट्राइक नहीं की थी, अपनी पार्टी और सरकार की किरकिरी करवा दी. इस बयान से भाजपा को कांग्रेस के ऊपर यह आरोप लगाने का अवसर मिल गया कि कांग्रेस की मनमोहनसिंह सरकार इतनी कायर थी कि वह विदेशी दबाव में आकर देश हित में कठोर निर्णय भी नहीं ले पाती थी, जिस प्रकार भाजपा की मोदी सरकार लेती है और आतंकवादियों को उनके घर में घुस कर मारती है. राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी जितनी जल्दी अपने भीतर के भेदियों और स्लीपर सेल्स को बाहर का रास्ता दिखाएगी उतना ही उसके हित में होगा.

Ramswaroop Mantri

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