नेपाल के अपदस्थ प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पहली बार प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया है। उन्होंने देश में हुई हिंसा के लिए दुख जताया है। ओली ने प्रदर्शनकारियों के सामने इमोशनल कार्ड खेलने की कोशिश की है। उन्होंने भारत के साथ सीमा विवाद का भी जिक्र किया है।
नेपाल के अपदस्थ प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने पहली बार जेन-जेड विरोध प्रदर्शनों में शामिल युवाओं को संबोधित किया है। ओली ने दावा किया कि वह शिवपुरी में एक सुरक्षित सैन्य घेरे में हैं। इससे पहले आशंका जताई जा रही थी कि ओली देश छोड़कर भाग गए हैं। उनके दुबई जाने की अटकलें थी। उन्होंने एक लिखित संदेश के माध्यम से नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों पर दुख जताया है। ओली ने लोगों से शांति की अपील की है और सभी पक्षों से बातचीत का आह्वान भी किया है। नेपाल में रविवार को शुरू हुई हिंसा में अब तक 30 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
ओली ने खेला इमोशनल कार्ड
ओली ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की गोलीबारी में अपनी जान गंवाने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने इमोशनल कार्ड खेलते हुए खुद का कोई बच्चा न होने का जिक्र किया। ओली ने कहा, “परिवर्तन की लड़ाई में राज्य द्वारा दी गई कठिनाइयों के कारण मेरे कोई बच्चे नहीं हैं, लेकिन पिता बनने की इच्छा कभी नहीं मरी।” ओली ने 1994 में गृह मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके प्रशासन में कोई गोली नहीं चलाई गई और शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जिक्र किया।
प्रदर्शनकारियों को गुमराह करने का आरोप लगाया
उन्होंने चल रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे की ताकतों पर विनाशकारी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए युवा प्रदर्शनकारियों का शोषण करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में आगजनी और तोड़फोड़ अचानक नहीं हुई। आपके मासूम चेहरों का इस्तेमाल गुमराह करने वाली राजनीति के लिए करने की कोशिश की जा रही है।”
भारत के साथ सीमा विवाद का किया जिक्र
उन्होंने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा पर नेपाल के दावे सहित राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने दृढ़ रुख को दोहराया और घोषणा की कि लोकतांत्रिक शासन की रक्षा करना, जो नागरिकों को बोलने, घूमने-फिरने और सवाल करने का अधिकार देता है, उनके जीवन का उद्देश्य रहा है। यह संदेश बढ़ती अशांति के बीच आया है, जहाँ सोमवार से शुरू हुए जेन-जेड विरोध प्रदर्शनों में 30 लोगों की मौत हो गई और सार्वजनिक संपत्ति और संवेदनशील सरकारी दस्तावेजों को व्यापक नुकसान पहुंचा।





