सरल कुमार वर्मा
चल रहा पतझड़ का मौसम नए कोपल निकलेंगे जरूर
कितनी भी हो तेज धूप बादल भी बरसेंगे। जरूर
जो आग लगाकर नफरत की दहसत फैलाए जाते हैं
कितने ही मुखौटे बदले वो गुनहगार तो ठहरेंगे जरूर
मजहबी किताबो का ईंधन इक रोटी नहीं पका सकता
इनसे जो आग लगाते हैं वो संसद पहुचेंगे जरूर
जो देश बुद्ध कबीर का उस देश का क्यों ये हाल रहा
इस प्रश्न का उत्तर बच्चे भी इतिहास में ढूंढेंगे जरूर
जब धर्म न थे जब देश न थे इंसान जहां में तब भी थे
धरती बांटी जिन लोगो ने वो देश भी बांटेगे जरूर
जो खुद नास्तिक जन्मा है इंसान वो गढ़ता है ईश्वर
भगवान सियासी मोहरा है ये लोग भी समझेंगे जरूर
सरल कुमार वर्मा
उन्नाव, यूपी
9695164945

