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सरकार की गोशाला की खुली पोल!ठंड और भूख से मर रही गायें

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छतरपुर जिले में सड़कों से आवारा गोवंश को गोशाला तक तो पहुचा दिया गया है. लेकिन इन गोशाला में गायों को न तो भूसा मिल पाता है और न ही ठंड से बचने के लिए कोई व्यवस्था की गई है. जिसके चलते गाय आपनी जान गंवा रही हैं. बारीगढ़ नगर पंचायत में ऐसी एक अस्थाई गोशाला है जहां गायों के लिए न तो भूसा है और न ही ठंड से बचने की व्यवस्था है.

एक तरफ़ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव गायों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं वहीं जमीन पर गायों के हालात कुछ और ही हैं. छतरपुर जिले के बारीगढ़ में ऐसी ही एक गोशाला है, जिसका संचालन नगर पंचायत अपने स्तर पर करती है. बकायदा गायों को चराने के लिए बरेदियों को पैसा दिया जाता है. लेकिन गायों के खाने के लिए न तो पर्याप्त भूसा है और न ही ठंड से बचने के लिए कोई इंतजाम हैं. जिसके कारण हर साल यहां आधे से ज्यादा गायें मर जाती हैं. गायों की हालत है क्या है, जानिए इस ग्राउंड रिर्पोट में…

श्री पाल गुप्ता बातचीत में बताते हैं कि ये गोशाला अस्थाई तौर पर चलती है. हर साल 4 महीने के लिए यहां गाय रखी जाती हैं. पानी -भूसा की व्यवस्था नगर पंचायत ही करती है. गाय को चराने के लिए बरेदी को पैसा भी नगर पंचायत ही देती है.

सालों से स्थाई गोशाला की मांग कर रहे हैं 
वहीं राजू शेख बताते हैं कि गायों को चराने के लिए नगर पंचायत से पैसा मिलता है. सालों से हर साल ऐसे ही गायों की व्यवस्था की जाती है. हम स्थायी गोशाला की मांग सालों से कर रहे हैं. यहां कोई गोशाला नहीं है. यहां अवारा पशुओं की ऐसे ही व्यवस्था हर साल की जाती है.

गायों को चराने के लिए मिलते हैं हर महीने 10 हजार रुपए 
गायों को चराने वाले बरेदी मनोज पाल बताते हैं कि यहां लगभग 500 गाय हैं. हम लोग ही गाय चराते हैं. सुबह साढ़े 10 बजे यहां से नदी-जंगल ले जाते हैं. फिर शाम को साढ़े 5 बजे वापस यहीं ले आते हैं. नगर पंचायत ही इसका संचालन करती है. हम 6 लोग गाय चराते हैं. इसके लिए नगर पंचायत से हमें हर महीने 10 हजार रुपए भी दिया जाता है. 5 साल से इस गोशाला का अस्थाई तौर ऐसे ही संचालन किया जा रहा है. बछिया के मरने की वजह पूछने पर बताते हैं कि हम उसी गाय-बछिया को अंदर लेते हैं जिसको लोग यहां करके जाते हैं, हर किसी गाय -बछिया को नहीं लेते हैं.

हर साल सैंकड़ों गायें मर जाती हैं 
यहीं के रहवासी चंदु कुशवाहा बताते हैं कि अभी यहां चार से पांच सौ गायें दिख रही हैं. लेकिन फरवरी में सब मर जाएंगी. रात-भर भूखी रहती हैं. ऐसे ही अंदर घुसेड़ दी जाती हैं. जंगल में नदी का पानी ही मिलता है. हर साल यहां ठंड में सैंकड़ों गाय मर जाती हैं.

वहीं नगर पंचायत बारीगढ़ के सीएमओ अजय अगिनहोत्री बताते हैं कि इस गोशाला के लिए शासन से किसी भी प्रकार का पैसा नहीं आता है. किसानों के कहने पर हमनें ये व्यवस्था की है. नगर पंचायत अपने स्तर पर ही इसका संचालन करती है. हमारा काम गोशाला का संचालन करना नहीं है. किसानों की फसलें अवारा पशुओं से बच जाएं इसलिए अस्थाई तौर पर हर साल 4 महीने के लिए ये व्यवस्था की जाती है. ये कोई गोशाला नहीं है और न ही इसका कोई बजट आता है. कांजी हाउस के तौर पर ये व्यवस्था की गई है. हालांकि, उन्होंने कैमरे के सामने आने पर मना कर दिया. उनका कहना था कि न ये हमारा विभाग और न ही इसके लिए शासन से बजट आता है. इसलिए कैमरे पर हम बाइट नहीं देंगे.

Ramswaroop Mantri

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