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उत्तर प्रदेश में पालतू कुत्तों की गंदगी रोकने के आदेश

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अशोक मधुप

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के लिए जिम्मेदारों को निर्देश दिए।उन्होंने पालतू कुत्ते रखने वालों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि जो लोग घर में लोग पालतू कुत्ता रखते हैं, कुत्तों को सड़कों पर ले जाकर गंदगी न पैदा करवाएं। जरूरत पड़ने पर उनका रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कराएं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कुत्ता पालने वाले लोगों के लिए साफ-सफाई को लेकर सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि जानवरों को रोड पर लेकर निकलते वक्त साफ-सफाई का ध्यान रखें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुत्तों के रजिस्ट्रेशन की बात अब कह रहे हैं। देश में नगर पालिका एक्ट बनने के समय से ही कुत्तों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है। अट्ठारह सौ चौरासी के आसपास  नगर पालिका एक्ट लागू हुआ। उत्तर प्रदेश की बिजनौर नगर पालिका एक्ट में व्यवस्था है कि कुत्ता पालने वाले को कुत्ते का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसका शुल्क साल में एक रुपया होगा। शुल्क लेकर नगर पालिका अपना बेज लगा पट्टा कुत्ते के स्वामी को देगी।कुत्ता स्वामी कुत्ते को यह पट्टा पहनकर रखेगा। पट्टे को पहने कुत्ते को पालतू माना जाएगा नहीं तो उसे आवारा पकड़ कर नगर पालिका शहर से दूर छुड़वा देगी। एक्ट बन गया पर उस समय कुत्ता महत्वपूर्ण लोग पालते  थे।उनसे न किसी ने अपने पालतू कुत्ते का पालिका में रजिस्ट्रेशन कराने को कहा। न कुत्ता स्वामियों ने अपने कुत्ते का रजिस्ट्रेशन कराया। नगर पालिका को बने 133 साल हो गए, इस दौरान एक कुत्ते का भी पंजींकरण  नही हुआ। कुछ ऐसी ही हालत अन्य जगहों की भी होगी।आजका पालिका स्टाफ जानता भी नही कि पालतू कुत्तों का पालिका में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। लेखक को  दो बार छह -छह  माह के लिए अमेरिका में रहने का अवसर मिला। वहां स्ट्रीट डॉग और स्ट्रीट एनीमल नहीं है ।वहां के लोगो ने स्ट्रीट एनिमल को पूरी तरह खत्म कर दिया।

कुत्ता −बिल्ली आदि के पालने के लिए वहाँ स्वामी को टैक्स देना पड़ता है।टैम्पा में यह टैक्स प्रति माह 50 डॉलर है। पशु पालक यह टैक्स अपनी सोसाइटी को चुकाता है।इसके बावजूद घर से निकलते समय कुत्ता /बिल्ली स्वामी एक हाथ में अपने पशु का पट्टा पकड़े होता है। दूसरे हाथ के पंजे पर पॉलिथीन को उल्टी करके  चढ़ाए हुए होता है। पशु के गंदगी करने के बाद पशु स्वामी उस गंदगी को उठाकर पॉलिथीन में रख लेता है। पॉलिथीन का मुंह बंद करके डस्टबिन में डाल दिया जाता है ।कुछ सोसाइटी में जगह −जगह बॉक्स भी लगें है।इसके ऊपर के भाग में रोल की पोलिथिन की खाली थैली होती हैं।पशु पालक यहां से पॉलीथिन लेकर उल्टीकर अपने हाथ पर चढ़ा लेता है।इस पोलीथिन बॉक्स के नीचे पशु की गंदगी की भरी पॉलीथिन डालने की भी व्यवस्था है।टैम्पा की हमारी सोसाइटी में कुत्तों को घुमाने का पार्क भी था।इस पार्क के चारों और लोहे की जाली लगी है।कुत्ता स्वामी कुत्ते को पार्क में लेकर गेट बंद कर देता है।उसके बाद पशु का पट्टा खोलकर उसे घूमने के लिए छोड़ दिया जाता हैं।

हालाकि हाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के सख्ती करने के कारण पालिकाओं की सफाई व्यवस्था सुधारी है। आवारा सुअर घूमते  दिखाई देने बंद हो गए हैं, किंतु कुत्ता स्वामी घर से निकलते ही कुत्ते का पट्टा  खेल देतें हैं। उसे आजाद कर दिया  जाता है कि कहीं भी  गंदगी करे। सार्वजनिक पार्क में भी ऐसी  ही हालत है। किंतु कुत्ता− बिल्ली पालकों  में पड़ी गलत आदत का सुधारने में समय लगेगा। इसके लिए उनपर सख्ती करनी होगी। शहरों की बडी समस्या आवारा कुत्तों भी हैं।उनको भी शहरों  से बाहर का रास्ता दिखाना होगा। 

अशोक मधुप

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Ramswaroop Mantri

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