भोपाल
राजधानी में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। गुरुवार को नाम वापसी के आखिरी दिन जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। यहां के सात वार्डों में 61 लोगों ने नामांकन दाखिल किए थे। जिसमें वार्ड-2, 8 और 10 ओबीसी आरक्षण की वजह से होल्ड किए गए हैं। गुरुवार को नाम वापसी के दौरान दोपहर तीन बजे तक 9 लोगों ने नामांकन पत्र वापस ले लिया, जिसके बाद 52 उम्मीदवार चुनाव मैदान में रहे।
सबसे ज्यादा उम्मीदवार वार्ड-9 में हैं, यहां 13 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं फंदा जनपद के 20 वार्ड हैं। इसमें से 15 में चुनाव होने हैं। पांच वार्ड होल्ड कर दिए हैं। यहां पर सदस्य के तौर पर नामांकन जमा करने के लिए करीब 74 फॉर्म आए थे। इसमें से दो लोगों ने नामांकन वापस ले लिए हैं। अब यहां पर 72 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
बैरसिया में 25 वार्डों में सदस्य के लिए चुनाव होने हैं। इसमें से 7 वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित होने से होल्ड कर दिया है। यहां पर 180 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया था। अंतिम दिन 17 लोगों ने नामांकन वापस लिए। अब यहां पर 163 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। देर रात उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित करने का सिलसिला जारी रहा।
जिपं सदस्य के तौर पर 8 प्रत्याशी ऐसे थे। जो एक-दूसरे के खिलाफ एक ही वार्ड में एक ही घर से एक-दूसरे के सामने खड़े थे। इसमें 6 प्रत्याशी ऐसे हैं, जो कि पति-पत्नी थे। दो प्रत्याशी सगे भाई हैं। जिन्होंने चुनाव मैदान में या तो डमी उम्मीदवार के तौर पर गृहिणी को उतार दिया था, तो किसी ने सगे भाई को, लेकिन अध्यक्ष पद का आरक्षण नहीं होने से समीकरण बिगड़ गया। इसलिए डमी उम्मीदवारों के नामांकन वापस ले लिए।
देर रात ही से डोर-टू-डोर वोट मांगने का अभियान शुरू
1.अध्यक्ष के लिए आरक्षण नहीं हुआ, पांच साल से थी तैयारी
बैरसिया के गढ़ा जहांगीर निवासी गजेंद्र सिंह सोलंकी उम्र-43 साल। 12वीं पास हैं। पत्रकारिता भी कर रहे हैं। सीमेंट के व्यापार से जुड़े हैं। वार्ड नंबर 6 से जिपं सदस्य के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए नामांकन जमा किया है। पांच साल पहले सरपंच पद का चुनाव लड़ा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। गजेंद्र ने बताया कि जिपं अध्यक्ष का आरक्षण नहीं हुआ है। इसलिए पत्नी आनंद कुंवर को प्रत्याशी के तौर पर खुद के सामने ही खड़ा किया है।
2.अध्यक्ष बनाने के लिए पत्नी के साथ अब चुनाव प्रचार में
ये हैं नजीराबाद निवासी हटेसिंह सोलंकी। पिछले जिपं के कार्यकाल में जिपं सदस्य के तौर पर निर्वाचित हुए थे। इस बार भी सदस्य बनने नामांकन वार्ड नंबर 6 से दाखिल किया है। सोलंकी ने बताया कि पत्नी सोनू गृहिणी है, लेकिन इस बार जिपं अध्यक्ष का आरक्षण नहीं हुआ है। इससे पत्नी को चुनाव मैदान में उतारना पड़ रहा है। उनका भी नामांकन वार्ड नंबर छह से ही दाखिल कराया है। मेरे पांच भाई हैं। सभी किसान हैं, सभी की जमीन मिलाकर करीब 80 एकड़ है।
3.पहले ड्राइवर था, चुनाव के बाद सदस्य, फिर जिपं अध्यक्ष बने
हर्राखेड़ा निवासी मनमोहन नागर पिछली बार जिपं सदस्य के तौर पर जीते थे। वार्ड 10 से चुनाव लड़ा था। सभी सदस्यों ने मिलकर उनको अध्यक्ष चुना था। 2015 से अभी तक वो जिपं अध्यक्ष रहे। नागर ने बताया कि राजनीति में आने का इरादा नहीं था। मेरे भाई जैसे दोस्त अवनीश भार्गव के बड़े भाई 1996 में अरविंद भार्गव जिपं सदस्य के तौर पर जीते थे। उस समय अवनीश की गाड़ी चलाता था। उनका ड्राइवर था।
4.नजीराबाद निवासी विजय सक्सेना पेशे से शिक्षक
प्राइवेट स्कूल का संचालन करते हैं। पिछले 23 साल से स्कूल शिक्षा से जुड़े हुए हैं। राजनीति में भी दखल रखते हैं। उनको आशंका थी कि कहीं नामांकन निरस्त न हो जाए। इसलिए उन्होंने भाई अजय सक्सेना को खुद के सामने प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में खड़ा कराया है। विजय ने बताया कि पहली बार चुनाव मैदान में खड़ा हो रहा हूं। वे अपने क्षेत्र में सामाजिक कामों से पहले से जुड़े हुए हैं। सक्सेना एमए पास हैं।





