डॉ. प्रिया ‘मानवी’
आरामतलवी, सेक्सुअल अतृप्ति, दुराचारवृत्ति, अनियमित खानपान और तनाव से कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्हीं में से एक है थायराइड, जो लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है।
जब थायराइड ग्लैंड उचित मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है, तो इस समस्या का सामना करना पड़ता है। गर्दन के सामने एंडोक्राइन ग्लैंड मौजूद होता है जो हार्मोन उत्पन्न करता है और अन्य अंगों को नियंत्रित करता है।
थायरोक्सिन टी 3 और ट्राईआयोडोथायोनिन टी 4 थायराइड हार्मोन में शामिल हैं। ये हार्मोन चयापचय प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। वे शरीर में ऊर्जा के उपयोग को बनाए रखने में मदद करते हैं। ये हृदय गति से लेकर पाचन, फर्टिलिटी तक सब कुछ प्रभावित करते हैं।
*थायराइड का स्वास्थ्य पर प्रभाव :*
थायराइड हार्मोन की अधिकता या कम उत्पादन इस समस्या का कारण साबित होता है। थायराइड हार्मोन के अधिक उत्पादन को हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है।
थायराइड हार्मोन के कम उत्पादन को हाइपोथायरायडिज्म के रूप में जाना जाता है।
थायराइड ग्रंथि गर्दन पर स्थित एक तितली के आकार का अंग है। शरीर में इसकी नियमित मात्रा जहां मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करती है, तो वही ऊर्जा के स्तर और समग्र स्वास्थ्य को नियंत्रित करने में मदद करता है।
पुरूषों की तुलना में महिलाओं में थायराइड के मामले अधिक, बहुत अधिक देखने को मिलते हैं। ऐसा इसलिए भी होता है अधिकतम महिलाओं को नेचुरल और कम्प्लीट सेक्सुअल सटिस्फैक्शन नहीं मिलता. पुरुष पर केवल अन्य कारण उत्तरदायी बनते हैं. इसलिये उनको यह रोग कम होता है.
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार भारत में युवा महिलाओं में थायरॉयड डिसफंक्शन की समस्या आमतौर पर देखने को मिल रही है। यहां हर आठ में से एक युवा महिला थायरॉयड डिसफंक्शन का शिकार है। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ये समस्या 71.4 फीसदी अधिक पाई गई। हांलाकि सबक्लीनिकल हाइपोथायरायडिज्म का प्रचलन उम्र के साथ बढ़ता गया है।
थायराइड हार्मोन शरीर में मेटबॉलिज्म को मेंटेन करने में मदद करता है। शरीर में इसकी कमी फूड डाइजेस्ट करने की कपेसिटी को घटा देती है. उसे फैट में कनवर्ट कर देती है। इससे वेटगेन का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा शरीर में कमज़ोरी महसूस होने लगती है। वे महिलाएं, जो गर्भवती है, उसमें फीटस डेवलपमेंट में समस्या बढ़ने लगती है। जो गर्भवती नहीं हैं, उनके गर्भवती होने की संभावना घटने लगती है.
*1. हृदय स्वास्थ्य पर असर :*
अपर्याप्त थायरॉइड हार्मोन से हृदय की गति धीमी होने लगती है। इससे धमनियों का लचीलापन कम होने लगता है। साथ ही शरीर में रक्त का संचार प्रभावित होता है, जिससे ब्लडप्रेशर बढ़ने लगता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल स्तर आर्टरीज़ का संकुचित और कठोर बनाता है। इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है।
*2. फर्टिलिटी पर इफेक्ट :*
हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉयड ग्रंथि भरपूर मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है। गला सूखता है. उसमें सूजन और भारीपन महसूस होता है.
मासिक धर्म अनियमित होता है और ब्लड फ्लो भी प्रभावित होता है. इससे कंसीव करने यानी गर्भ धारण करने की क्षमता में गिरावट आने लगती है।
हाइपरथायरायडिज्म में अतिसक्रिय थायरॉयड ग्रंथि के कारण समय से पहले गर्भपात अनियमित मासिक धर्मचक्र और पेरामेनोपॉल की समस्या बढ़ भी सकती है।
गर्भ ठहर भी गया तो बच्चे की ग्रोथ में बाधा उत्पन्न होने लगती है। इससे बच्चे में लो आईक्यू स्तर का सामना करना पड़ता है।
थायराइड नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करता है। शरीर में हार्मोनल असंतुलन मिसकैरेज का भी कारण साबित होता है।
*3. डायबिटीज का जोखिम :*
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार डायबिटीज़ और थायरॉयड एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। दरअसल, शरीर में थायराइड हार्मोन का उचित स्तर कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म और पेनक्रियाटिक फंक्शन को रेग्यूलेट करने में मदद करता है।
मगर हार्मोन की कमी या उच्च स्तर शरीर में डायबिटीज़ के खतरे को बढ़ा देता है और ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
थायरॉयड रोग इंसुलिन के उत्पादन में भी बाधा डालता है। इंसुलिन ब्लड सेल्स को ऊर्जा प्रदान करने के लिए ग्लूकोज का उपयोग करने में सक्षम बनाता है। इससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित बना रहता है।
*4. वेटगेन की समस्या :*
शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी बढ़ने से बॉडी की प्रोडक्टीविटी में कमी आने लगती है। साथ ही शरीर में थकान बनी रहती है।
इसके अलावा फूड को डाइजेस्ट करने की क्षमता में गिरावट आने लगती है, जिससे वो फैट्स के रूप में एकत्रित होने लगता है। इससे शरीर में चर्बी जमा होने लगती है, जिससे वज़न बढ़ने लगता है।
*5. यौनजीवन पर प्रभाव :*
थायराइड से जो लक्षण और जो समस्याएं उत्पन्न होती हैं उनके चलते सेक्सलाइफ खराब होना स्वाभाविक है.
पीरियड विकार योनि को स्वस्थ नहीं रहने देता. स्त्री को पर्याप्त सेक्स-अनुभूति नहीं होती. उसे सम्भोग का कम्प्लीट आनंद नहीं आता. मोटापा शरीर को भी असुंदर और थुलथुला बना देता है. ऐसे में पुरुष का आकर्षण भी कम हो जाता है.
*थायराइड से राहत पाने के उपाय :*
1. व्यायाम और बॉडी रिलेसन :
शरीर में जमा कैलोरीज़ के स्तर को कम करने के लिए व्यायाम की मदद लें। इससे फैट्स को बर्न करके शरीर में हेल्दी वेट मैनेजमेंट में मदद मिलती है।
महिलाओं को वेट ट्रेनिंग और हाई इंटैसिटी एक्सरसाइज़ करने की सलाह दी जाती है। इससे हड्डियों की मज़बूती बढ़ती है और थकान कम होती है।
मॉर्निंगवॉक में टहलें, रेंगे नहीं बल्कि इतनी गति दिखाएं कि पसीना आए. सेक्स से बेहतर कोई एक्सरसाइज नहीं होती. आपका पार्टनर ऐसा होना चाहिए की प्रचण्ड सर्दी के समय भी आपको इतना हॉट कर दे की आप पसीने से भीग जाएँ. सेक्स आपको बेसुध करने वाला सावित हो. आप खुद भी ऐक्टिव बने, बेजान-सी पड़ी रहने से कोई व्यायाम नहीं होता.
*2. हेल्दी डाइट प्लान :*
आहार को लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। अपनी मील में आयोडाइज्ड नमक शामिल करें। पत्ता गोभी और फूल गोभी के अत्यधिक सेवन से बचें।
मौसमी फलों को अपने आहार में अवश्य शामिल करें। जंक फूड से दूरी बनाकर रखें और मील को समय पर लें। गले की प्रॉब्लम विशुद्ध वीर्यपान से समाप्त हो जाती है. किंतु शुद्धतम वीर्य लाखों में किसी एक पुरुष में मिलता है. अशुद्ध वीर्य बेहद नुकसानदेय होता है. इसलिए ऐसे प्रयोग से बचने ही भलाई है. विशुद्ध वीर्य हमसे प्राप्त किया जा सकता है.
*3. औषधि सेवन :*
जांच के बाद डॉक्टर की ओर से सुझाई गई दवाओं का सेवन करें। हर 3 से 6 महीने में शरीर में थायराइड के स्तर की जांच अवश्य करवाएं। इससे समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है और उसके कारणों को दूर किया जा सकता है।
जहाँ तक हमारे रोल की बात है, हम मेडिसिन नहीं मेडिटेशन बेस्ड हैं. हम प्राणिक हीलिंग, टचथेरेपी, मेडिटेटिव मसाजथेरेपी और स्प्रिचुअल सेक्सथेरेपी से बीमारी का समूल नाश करते हैं. हम व्यापार नहीं करते, इसलिए हमारी सर्विसेज शुल्क मुक्त हैं.
*4. कैफीन और स्मोकिंग निषेध :*
जो स्मेकिंग करते हैं और कैफीन का सेवन करते हैं, उनमें थायराइड हार्मोंस की कमी बढ़ने लगती है।
सिगरेट के धुएं से थायोसाइनेट कंपाउड आयोडीन की मात्रा को शरीर में ब्लाक करता है। इससे थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम होने लगता है।





