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हर मिनट में पांच किताबें बेच रहा है प्रभात प्रकाशन

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दिल्ली में हों और किताबों से दोस्ती का मन हो तो दरियागंज चले आइए। कम दाम पर ढेर सारी किताबें खरीदने के लिए संडे बाजार तो है ही, यहां आपको कतार से एक से बढ़कर एक प्रकाशक मिल जाएंगे। संख्या सैकड़ों में नहीं, हजारों में है जिसकी वजह से दिल्ली का यह इलाका देश का सबसे बड़ा पुस्तक बाजार कहलाता है। यहीं पर आपको देश के सबसे बड़े प्रकाशन समूहों में शुमार प्रभात प्रकाशन भी मिलेगा।

यूं हुई थी शुरुआत 

प्रभात प्रकाशन की शुरुआत साल 1958 में श्यामसुंदर जी ने की थी। आज उनका कारोबार उनके बेटे प्रभात कुमार और पीयूष कुमार संभाल रहे हैं। बातचीत में पीयूष कुमार बताते हैं, हमारी कोशिश रहती है कि हम उचित मूल्य पर अच्छी पुस्तकें डिलिवर करें। हम पांच हजार से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन कर चुके हैं। इनमें नोबेल विजेता रविंद्र नाथ टैगोर से लेकर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, हिलेरी क्लिंटन, दलाई लामा जैसी विभूतियों तक की रचनाएं शामिल हैं। इसके अलावा साहित्य अमृत नाम से पिछले कई दशकों से हम मासिक साहित्यिक पत्रिका का भी प्रकाशन कर रहे हैं। ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट में हम हिंदी के नंबर वन प्रकाशक हैं। हम आईएसओ प्रमाणित प्रकाशन हैं। विश्व में हम यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले हिंदी प्रकाशन संस्थान हैं।

14 अखबार पढ़ते थे पिताजी 

वक्त के साथ पाठकों का मिजाज भी बदलता रहता है। उनकी उम्मीद पर कैसे खरे उतरते हैं, इस सवाल पर पीयूष कुमार बताते हैं, हम किताबों में नयापन लाते हैं जिस वजह से बाकियों की तुलना में अच्छा कर पा रहे हैं। तभी तो हर एक मिनट पर हम पांच किताबें बेच रहे हैं। इसके लिए कंटेंट के साथ ही मार्केटिंग बहुत जरूरी है और डिस्पैच सिस्टम का सशक्त होना भी जरूरी है। पाठक को अगर समय पर पुस्तक नहीं मिलेगी तो दिक्कत हो सकती है। कंटेंट में नयापन लाने के लिए क्या करते हैं, इस पर पीयूष बताते हैं, मैं खुद भी एक अदद पाठक हूं। रीडिंग और वॉकिंग मेरा शौक है। रोज मैं आठ अखबार पढ़ता हूं, जिनमें अंग्रेजी और हिंदी दोनों के होते हैं। मेरे पिताजी तो दिन में 14 अखबार रोज पढ़ा करते थे। कई बार हॉकर तक कह देता था कि इतने अखबार भला कौन पढ़ता है। मैं अंग्रेजी में किताबें, मैगजीन आदि ज्यादा पढ़ता हूं इसलिए अच्छा कंटेंट अंग्रेजी से हिंदी में ला पाता हूं। हमारे प्रकाशन के संस्थापक श्यामसुंदर जी का भी मानना रहा है कि हिंदी पाठकों के पास दुनिया में किसी भी विषय या मुद्दे पर उपलब्ध बढ़िया कंटेंट होना चाहिए। मेरा मानना है कि हिंदी किताबों को बेस्टसेलर तीन चीजें ही बनाती हैं। पहला – मजबूत कंटेंट, दूसरा – मार्केटिंग और तीसरा – रीडर्स के साथ मजबूत कनेक्शन।

सोशल मीडिया पर 15 लाख सब्सक्राइबर 

सोशल मीडिया के दौर में रीडर्स से कनेक्ट में कितनी आसानी होती है, इस सवाल पर पीयूष बताते हैं – हम यूट्यूब से लेकर इंस्टाग्राम, ट्विटर सब पर हैं। इनमें हमारे करीब 15 लाख सब्सक्राइबर हैं। सोशल मीडिया रीच के मामले में हम देश के टॉप पब्लिशर हैं। हमारी कोशिश रहती है कि हमारी किताबें भारत के सभी 788 जिलों में उपलब्ध रहें। कोविड के दौर में काम थोड़ा ठंडा रहा मगर अब हम फिर से अपनी पोजिशन पा चुके हैं।

बच्चों के लिए भी किताबें ला रहे 

क्या कुछ नया करने की कोशिश कर रहे हैं, इस सवाल पर पीयूष बताते हैं – हमने बच्चों के लिए बुक्स छापनी शुरू की हैं। अलग-अलग चिल्ड्रन बुक फेयर में जाकर हमें लगा कि बच्चों के लिए भी हमें किताबें लानी चाहिए। इसके अलावा हमारी कोशिश है कि अभी जहां हर एक मिनट पर हम पांच किताबें बेच रहे हैं, वहीं भविष्य में इस आंकड़े को प्रति मिनट 20 किताबों तक लेकर जाएं।

हिंदी पाठक किताबें खूब खरीद रहा 

नई पीढ़ी में पढ़ने की ललक जगाने के लिए क्या कुछ किया जा सकता है, इस सवाल पर पीयूष कुमार बताते हैं – स्कूलों में लगातार पुस्तक प्रदर्शनियां लगनी चाहिए, जिससे छात्र-छात्राओं में पढ़ने के प्रति रुचि जाग्रत हो। किताबों को लेकर पाठकों का रुझान किस तरह का है, इस सवाल पर वह कहते हैं, मुझे लगता है कि पाठकों के लिए यह स्वर्णिम समय है। हिंदी के पाठक बड़ी संख्या में पुस्तकें खरीद रहे हैं। क्षेत्रीय भाषाओं की बात करें तो मराठी, तमिल, मलयालम व गुजराती की पुस्तकें काफी बड़ी संख्या में पढ़ी जाती हैं।

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