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राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को नहीं आयी बिरसा मुंडा की याद

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नवल किशोर कुमार

बिरसा की उपेक्षा

गत 9 जून, 2021 को 121वें शहादत दिवस के मौके पर देश भर में धरती आबा बिरसा मुंडा को याद किया गया। लेकिन इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बिरसा मुंडा की याद नहीं आयी। ध्यातव्य है कि महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि के मौके पर दोनों के द्वारा सोशल मीडिया व प्रेस सूचना ब्यूरो के जरिए प्रेस विज्ञप्ति जारी कर याद किया जाता रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर सवाल भी उठाया गया कि क्या आदिवासी होने की वजह से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बिरसा की याद नहीं आयी। 

इस संबंध में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक अखबार ‘दलित-आदिवासी दुनिया’ के संपादक मुक्ति तिर्की ने बताया कि यह हम आदिवासियों का अपमान है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। देश के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर आदिवासियों के महानायक की अनदेखी की जाती रही है। दरअसल इनकी अनदेखी इसलिए भी है क्योंकि हम आदिवासी इनके लिए महत्व रखते ही नहीं हैं। वहीं झारखंड के प्रसिद्ध आदिवासी साहित्यकार महादेव टोप्पो का कहना है कि अभी आदिवासी सरकार के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। जबकि संसद भवन में बिरसा मुंडा की तस्वीर है। सामान्य दिनों में वहां उनकी जयंती व पुण्यतिथि के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन भी होता है। लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से नहीं हुआ होगा। लेकिन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों को इसकी सूचना नहीं हो, यह कैसे हो सकता है। कहीं न कहीं उनके द्वारा बिरसा की उपेक्षा सरकार की कार्यशैली व आदिवासियों के संबंध में उनकी सोच पर सवाल उठाता है।

झारखंड में बढ़ी तल्खी, राज्यपाल और मुख्यमंत्री आमने-सामने

आदिवासी बहुल राज्य झारखंड में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच तल्खी बढ़ गई है। इसकी वजह झारखंड में ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी के गठन संबंधी नियम में हाल ही में राज्य सरकार द्वारा किया गया संशोधन है। दरअसल, राज्य सरकार ने एक अध्यादेश जारी कर पूर्व के नियमों में संशोधन किया है। इस संशोधन के साथ ही हेमंत सोरेन सरकार ने कमेटी के गठन में राज्यपाल की भूमिका को नगण्य कर दिया है। इस संबंध में 10 जून, 2021 को राजभवन द्वारा राज्य सरकार से संशोधन से संबंधित संचिका मांगी गई है। वहीं पूर्व सांसद व आदिवासी सेंगेल अभियान के अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है राज्य सरकार की अधिसूचना संविधान के अनुच्छेद 244 (1) में उल्लिखित प्रावधान का उल्लंघन करता है।

उत्तर प्रदेश के बनारस में याद किए गए बिरसा

गत 9 जून, 2021 को देश भर में बिरसा मुंडा को 121वें शहादत दिवस के मौके पर याद किया गया। उत्तर प्रदेश के बनारस में भी बिरसा मुंडा को याद किया गया। जिले के खेवली पोस्ट के कपरफोड़वा गांव में हुए एक आयोजन का उद्घाटन ग्राम प्रधान गुड्डू गोंड ने किया। इस मौके पर उन्होंने धरती आबा बिरसा मुंडा को याद करते हुए कहा कि आदिवासी समाज के महानायक भगवान बिरसा मुंडा आदिवासी समाज के साथ ही संपूर्ण भारत के महानायक हैं। उन्होंने महज 25 साल की अवस्था में अंग्रेजी हुकूमत को दिखा दिया था कि मूलनिवासियों को ज्यादा दिन तक गुलाम नहीं बना सकते। वहीं डॉ. सेवा राम पटेल  ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा का योगदान इस देश में भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम के आयोजन में भुमक राकेश मरावी, अनिल, सुक्खू सिंह मरावी, विनोद शाह, रवि कुमार विरेंद्र कुमार, सोनू कुमार, रमेश कुमार गोंड, पिंकी, श्रेया, पूजा, अंजली, प्रियंका आदि की महत्वपूर्ण भूमिक रही। 

उत्तर प्रदेश के बनारस जिले के एक गांव में बिरसा मुंडा की शहादत दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते एक वक्ता

राजस्थान : आंबेडकर का पोस्टर लगाने पर विवाद, दलित युवक विनोद मेघवाल की हत्या

देश में दलित उत्पीड़न की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की रावतसर तहसील के किंकरालिया गाँव  में समंती तत्वों ने डॉ. आंबेडकर का पोस्टर लगाने से पैदा हुए विवाद पर दलित युवक विनोद मेघवाल की हत्या कर दी। हत्या क आरोपी राकेश सियाग फरार बताया जा रहा है। दरअसल, जैसे-जैसे राजस्थान के विभिन्न इलाक़ों में दलित वर्ग के युवाओं में अम्बेडकरवादी चेतना का प्रचार प्रसार होने से जागृति आ रही है, सामंती ताकतों को यह नागवार गुजर रहा है।

बताते चलें कि मृतक विनोद मेघवाल ने बीते 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती के मौके पर पोस्टर लगाये थे, जिन्हें जातिवादी तत्वों ने फाड़ दिया था। इसके खिलाफ विनोद ने आवाज उठाई थी और पंचायत में पोस्टर फाड़नेवालों को माफ़ी माँगनी पड़ी थी। इसी खुन्नस में गत 5 जून, 2021 को अपराधियों ने विनोद और उसके चचेरे भाई मुकेश को खेत पर जाते वक्त घेरकर हमला कर दिया। इस हमले के बाद विनोद की मौत अस्पताल में उपचार के दौरान हो गई। वहीं मुकेश अभी भी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। 

स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार 14 अप्रैल की घटना के बाद विनोद को निरंतर धमकियां दी जा रही थीं। उसने थाने में दो बार लिखित शिकायत भी दर्ज करायी। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि पुलिस ने डॉ. आंबेडकर का पोस्टर फाड़े जाने के संबंध में कहा है कि इस साल स्कूलों में हनुमान चालीसा का वितरण किए जाने का विरोध करने पर विनोद को धमकियां मिली थीं। 

राजस्थान के भीलवाड़ा में दलित युवा पत्रकार पर जानलेवा हमला

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की रायपुर तहसील के नान्दशा जागीर गांव में दलित पत्रकार व स्थानीय महिला सरपंच के पति रामचंद्र बलाई के उपर गांव के ही ऊंची जाति के लोगों ने गत 9 जून की रात जानलेवा हमला किया। उन्हों घायल अवस्था में स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मिली जानकारी के अनुसार रामचंद्र बलाई दैनिक नवज्योति के स्थानीय पत्रकार है। उनकी पत्नी गत वर्ष हुए पंचायतीराज चुनाव में चुनाव जीतने के बाद सरपंच बनीं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गांव में राजपूत जाति के लोग दलित पत्रकार की पत्नी के सरपंच चुने जाने को लेकर खुन्नस में थे।

Ramswaroop Mantri

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