श्रमिक दिवस पर सम्मेलन, जुलूस और मध्यप्रदेश शासन को आवेदन प्रस्तुत
सभी श्रम कानूनों का पालन करें सरकार!
आंतराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर श्रमिक जनता संघ और नर्मदा बचाओ आंदोलन ने सभी श्रमिकों की आवाज बुलंद की| नर्मदा घाटी के किसान, मजदूर, मछुआरे, कारीगर, छोटे दुकानदार सभी श्रमिकों में से जिनका डूबग्रस्त होते हुए आजतक पुनर्वास पूरा नहीं हुआ है; उनके साथ हुआ अन्याय उजागर किया|

धरमपुरी पुनर्वसाहट में आयोजित ‘श्रमिक अधिकार सम्मेलन’ में टीनशेड में 6 सालों से रहने के लिए मजबूर सुशीला नाथ ने, धरमपुरी के मछुआरों के प्रतिनिधी विक्रम वर्मा ने तथा कमला यादव और भगवान सेप्टा ने एक-एक समुदाय की हकीकत बयाँ की| धरमपुरी के नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधी जाउल हक़ जी ने भी बताया कि धरमपुरी के कई ध्वस्त हुए वॉर्डस के गरीब, श्रमिक 2023 से आजतक बिना पुनर्वास जीने के लिए मजबूर है तो पुनर्वसाहट में कई मकानों के लिए भूखंड भी डूबग्रस्त है और सुविधाओं की खामीयां भी गंभीर है! सभी विस्थापितों के पुनर्वास के तथा 2025 के मानसून में किसी गांव/ घरों में पानी न भरने देने के आग्रह के साथ, आने वाले वर्षाकाल में भी सत्याग्रह की चेतावनी का आवेदन जिला, संभाग और राज्यस्तरीय अधिकारियों को भेजा गया|

नर्मदा घाटी के मछुआरों के आवेदन में 31 मत्स्य सहकारी समितियों के 2017 से प्रस्तावित संघ को पंजीयन देने का आग्रह भी किया| गुजरात के तीनों राज्यों की बोर्ड स्थापन करके उसके द्वारा सरदार सरोवर में मत्स्याखेट करने का तथा सरदार सरोवर जलाशय में क्रूझ चलाने का विरोध दर्ज किया गया और राज्य मत्स्य संघ के नाम मछुआरे भी श्रमिक होने के नाते उनकी ओर से विशेष आवेदन पेश किया|

श्रमिक जनता संघ ने, भारत के सभी श्रमिकों के हित में ईमानदारी, कानूनी प्रक्रिया के द्वारा श्रमिकों का रोजगार, सही वेतन, ठेका मजदूरों का अधिकार तथा पलायन के लिए मजबूर होकर अत्याचार भुगतने वालों की मांगों का आवेदन भी श्रम मंत्रालय के हर स्तर पर प्रस्तुत किया! इसमें इंदौर संभाग में चल रही कंपनियों में श्रमिकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार, कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन से छटनी या उद्योग का बंदीकरण तथा श्रमिक संगठन पर बेबुनियाद आरोप लगाने, महिला श्रमिकों का शोषण जैसे कई मुद्दों पर श्रम मंत्रालय ने अपना अधिकार का, श्रम कानूनों के आधार पर उपयोग करना, सही समय पर हस्तक्षेप करके, समझौता प्रक्रिया या कानूनी कार्यवाही द्वारा सुलझाव से औद्योगिक क्षेत्र में शांति और रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी गयी| श्रमिक जनता संघ की ओर से पदाधिकारी संजय चौहान, राजकुमार दुबे, कैलाश भवर ने हकीकत प्रस्तुत की!
मेधा पाटकर जी ने श्रमिकों के बीच समन्वय, एक जुटता पर जोर देते हुए श्रम कानूनों के पालन न होते हुए हो रहे विविध प्रकार के अन्याय को विस्तार से उजागर किया| विकास की परियोजनाओं से हो रहे विस्थापितों पर भी ‘बिना पुनर्वास डूब’ से श्रमिकों की अवमानना होने की दखल मध्यप्रदेश शासन क्यों नहीं ले रही, यह सवाल भी उठाया| राष्ट्रीय स्तर के 29 श्रम कानूनों की वापसी और 4 कमजोर संहिता लाना श्रमिकों के अहित से लिए निर्णय का सभी उपस्थितों ने विरोध प्रकट किया|
तीन घंटे चले सम्मेलन में नवीन मिश्रा जी के गीतों ने श्रमिकों, मेहनतकशों, किसानों का दर्द सबके मन में भरने के साथ एकजुट और हकदारी के ऐलान से सभी को प्रेरित किया| प्रकाश यादव, आकाश वर्मा के नारों से गूंज उठी श्रमिकों की आवाज! सैकड़ो स्त्री- पुरुषों ने जुलूस निकालकर, धरमपुरी तहसील कार्यालय पर पहुंचे तब तहसीलदार श्रीमती शिवानी श्रीवास्तव जी के समक्ष तीन आवेदनों को हेमेंद्र मंडलोई और संजय चौहान ने पढ़कर सुनाया तथा कईयों ने अपनी बात जोड़ देते हुए, भोपाल तक सभी संबंधित अधिकारियों तक आवेदन पहुंचाने का आग्रह जोशपूर्ण तरीके से पेश किया|
तहसीलदार महोदया ने गंभीरता से सभी की सुनवाई की| उन्होंने धरमपुरी तहसील के विस्थापित श्रमिकों के कार्य को पूरा करने के आश्वासन के साथ तीनों आवेदनों को राज्यस्तर पर त्वरित पहुचाना मंजूर किया|
चंचल सोनेर बैजनाथ आनंद पन्नालाल पाटीदार सुनीता मछुआरा





