भोपाल। मप्र में आईपीएस अफसरों का कैडर रिव्यू होने से राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को 14 पदों से हाथ धोना पड़ेगा। खास बात यह है कि यह पद राज्य की दोनों जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू ओर लोकायुक्त संगठन के एसपी के पद हैं। इस वजह से अब राज्य पुलिस सेवा के अफसरों में रिव्यू प्रस्ताव को लेकर नाराजगी है। दरअसल केन्द्र को भेजे गए रिव्यू प्रस्ताव में यह पद अब आईपीएस अफसरों के लिए मांगे गए है। इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद रापुसे के अफसरों को इन दोनों ही एजेंसियों के पुलिस अधीक्षक पद से हाथ धोना पड़ेगा। अब तक इनकी सभी 14 संभागीय इकाइयों में अधिकतर राज्य पुलिस सेवा के वरिष्ठ एएसपी रैंक के अफसर ही पुलिस अधीक्षकों के पदों पर पदस्थ किए जाते हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में इन दोनों ही संगठनों में एसपी के पद पर कार्यरत रहे एक रापुसे के अफसर के करोड़ों रुपए के काले धन के लेनदेन में नाम आने के बाद राज्य शासन ने अब इन पदों पर आईपीएस अफसरों को पदस्थ करने का फैसला किया है। यह बात अलग है कि इस मामले में दो वरिष्ठ आईपीएस अफसरों के नाम भी शामिल सामने आए हैं। राज्य सरकार द्वारा कैडर रिव्यू का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया जिसमें अफसरों के लिए कुल 39 नई पोस्ट की मांग की गई है। फिलहाल प्रदेश में कैडर पोस्ट की संख्या 166 हैं। इस प्रस्ताव में पांच पोस्ट को समाप्त करने का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसमें स्पेशल डीजी पुलिस ट्रेनिंग मुख्यालय, आईजी होमगार्ड जबलपुर, आईजी पीटीआरआई, आईजी जवाहर लाल नेहरू पुलिस अकादमी (जेएनपीए) सागर और आईजी आरएपीटीसी इंदौर शामिल हैं।
पहले आईपीएस अफसर ही बनते थे एसपी
प्रदेश की दोनों एजेंसियों ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त मेंं करीब 17 साल पूर्व 2003 तक आईपीएस अफसरों को ही पुलिस अधीक्षक पद पर पदस्थ किया जाता था। इसके बाद प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद इसमें बदलाव करते हुए राज्य पुलिस सेवा के प्रमोटी अफसरों को भी इन एजेंसियों में एसपी बनाकर कमान सौंपी जाने लगी थी। दो साल पहले पड़े आयकर छापों के बाद सामने आए सबूतों के बाद अब फिर से पुरानी व्यवस्था को ही शुरू करने की तैयारी कर ली गई है। इनमें प्रमोटी एएसपी अरूण मिश्रा का भी नाम सामने आया है। वे लंबे समय तक लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में बतौर एसपी पदस्थ रहे हैं।
यह नए पद भी मांगे
केन्द्र को भेजे गए कैडर रिव्यू प्रस्ताव में डीजी पुलिस फायर सर्विस व पुलिस अकादमी आईपीटी भौंरी के लिए दो पदों की मांग की गई है। इसके अलावा एडीजी के आठ पदों की भी मांग की गई है। इनमें स्टेट सायबर क्राइम मुख्यालय भोपाल, आरएपीटीसी इंदौर, जेएनपीए सागर, पीटीआरआई भोपाल, एंटी नक्सल आॅपरेशन, नारकोटिक्स शाखा, एसटीएफ और ट्रेनिंग मुख्यालय भोपाल शामिल हैं। इसी तरह से एक पद स्टेट डिजॉस्टर इमरजेंसी रिपॉन्स फोर्स (एसडीईआरएफ) में आईजी का मांगा है। इसी तरह सें एसएएफ पुलिस मुख्यालय, प्रोविजनिंग पीएचक्यू, विशेष महिला प्रकोष्ठ, पुलिस चयन एवं भर्ती शाखा मुख्यालय, कार्मिक पीएचक्यू प्लानिंग और एंटी नक्सल आॅपरेशन के लिए आठ डीआईजी के पदों की भी मांग की गई है।
इन जगहों के लिए मांगे एसपी के 20 नए पद
कैडर रिब्यू प्रस्ताव में अन्य जगहों के लिए भी एसपी के 20 नए पदों की मांग की गई है। इनमें नव गठित जिला निवाड़ी, कमांडेट 36वीं बटालियन एसएएफ मंडला, एसपी हेडक्वार्टर भोपाल व इंदौर, सायबर क्राइम में तीन एसपी, एसटीएफ में दो एसपी, लोकायुक्त में एसपी के चार पद (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर), ईओडब्ल्यू में एसपी के चार पद (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर), एटीएस में दो एसपी और पीटीएस उज्जैन में एसपी का एक पद रहेगा।
तीन अफसर बन सकते हैं डीजी
केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ आईपीएस अधिकारी यूसी षड़ंगी की प्रदेश वापसी न होने की वजह से अब एक अपै्रल को अन्वेष मंगलम डीजी वेतनमान में पदोन्नत हो जाएंगे। उन्हें पुलिस हाउसिंग कॉपोर्रेशन में पदस्थ वीके सिंह के सेवानिवृत्त होने की वजह से पदोन्नत किया जा रहा है। उनके 1988 बैच के अन्य अधिकारी डीजी बन चुके हैं। इसी तरह से अगर जेल डीजी अरविन्द कुमार प्रतिनियुक्ति पर जाते हैं तो कैलाश मकवाणा के डीजी पद पर पदोन्नत होने का भी रास्ता खुल जाएगा। यह बात अलग है कि जल्द ही कैडर रिव्यू संभावित है। इसमें भी डीजी के दो पद मांगे गए हैं। इन पदों के स्वीकृत होने पर मकवाणा और प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ एसएल थाउसेन भी डीजी वेतनमान में पदोन्नत हो जाएंगे। गौरतलब है कि इसी साल होमगार्ड डीजी अशोक दोहरे और अभियोजन डीजी विजय यादव भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
रिव्यू प्रस्ताव को लेकर नाराजगी…कैडर रिव्यू में रापुसे के अफसरों को धोना पड़ेगा 14 पदों से हाथ





