10 Min Read

पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की ऐतिहासिक जीत और महागठबंधन की करारी शिकस्त ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दे दिया है. इस चुनाव में आरजेडी को अपने इतिहास की सबसे बड़ी हारों में से एक का सामना करना पड़ा है. पार्टी न सिर्फ सीटों में बुरी तरह पिछड़ी, बल्कि पहली बार यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत को उसी मजबूती के साथ आगे बढ़ा पाएंगे?
नेतृत्व क्षमता पर उठा सवाल : राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद हैं, लेकिन पार्टी के सभी बड़े नीतिगत फैसला अब तेजस्वी यादव लेने लगे हैं. 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने पूरे कैंपेनिंग की जिम्मेदारी अपने कंधे पर ली थी उसके बाद से लगातार पार्टी के नीतिगत फैसला हो या संगठन को लेकर कोई भी निर्णय लेना हो तेजस्वी ही सबकुछ देख रहे हैं.
2025 बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम ने तेजस्वी यादव की रणनीति, नेतृत्व, संगठन क्षमता और गठबंधन में कोऑर्डिनेशन पर बड़े प्रश्न चिह्न लगा दिए हैं. अब तेजस्वी के सामने कई ऐसी चुनौतियाँ खड़ी हैं, जिनसे निपटना न सिर्फ मुश्किल होगा बल्कि आने वाले वर्षों में उनके सामने राजनीतिक चुनौती भी होगा.
विधानसभा का चुनाव परिणाम : तेजस्वी यादव 2020 से लगातार पार्टी के सभी बड़े नीतिगत फैसला चाहे वह टिकट का बांटने का फैसला हो या संगठन में कोई फैसला. 2020 विधानसभा चुनाव में 75 सीटें जीतने वाली आरजेडी 2025 में 25 सीट पर सिमट गई.
EVM पर सवाल : विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद एक बार फिर से राजद की तरफ से ईवीएम पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और हिलसा से पार्टी के उम्मीदवार रहे शक्ति सिंह यादव का कहना है कि लोकतंत्र में ऐसा कभी हुआ है, क्या ऐसा स्ट्राइक रेट किसी ने कभी देखा है? यह चुनाव परिणाम पूरी तरीके से मिशनरी मैनेजमेंट का परिणाम है. ईवीएम की सुनामी इसी रूप में आई है. बिहार के बाहर काम करने वाले मजदूरों का सपना था कि वह लोग अब जाकर बिहार में काम करेंगे.




