इंदौर, । केंद्र सरकार की योजना के नाम पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में करोड़ों के घोटाले के आरोप लगे हैं। इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (आइपीडीएस) के नाम पर बिजली कंपनी शहर में 100 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्य करवाने का दावा कर रही है। शिकायत हुई है कि निजी कंपनी के जरिए हुए काम में शहर की सड़कों पर लगने वाले ट्रांसफॉर्मर और खंबे से लेकर तार तक बेच दिए गए। बिजली के दो डिवीजन पर सबसे ज्यादा गड़बड़ी का आरोप लगा है। बिजली कंपनी ने बिना सत्यापन के जांच कर भुगतान भी कर दिया।करीब तीन वर्षों से बिजली कंपनी में आइपीडीएस के तहत काम जारी है। तीन निजी कंपनियों को काम दिया गया है। बीते दिनों हैदराबाद की क्षेमा नामक कंपनी के बिलों के भुगतान के बाद कंपनी में अधिकारी द्वारा मोटे लेन-देन के बाद बिल पास करने की चर्चा चली। कुछ दिनों पहले एक वकील अभिजीत पांडे ने अपने क्षेत्र में पुराने की जगह नया ट्रांसफार्मर लगाने की शिकायत सीधे उर्जा सचिव को कर दी। पता चला कि केंद्र की योजना के नाम पर खरीदे गए ट्रांसफॉर्मर और खंबे का बड़ा हिस्सा जमीन पर लगाने की बजाय निजी बिल्डरों को बेचे गए, जबकि बिजली कंपनी इन खंबों और उपकरणों को लगाने के लिए बिना रोकटोक भुगतान करती गई।
बिजली कंपनी के इंदौर के उत्तर और दक्षिणी शहर संभाग में सबसे ज्यादा हेरफेर और फर्जी भुगतान का आरोप लगा है। शिकायत के बाद बिजली कंपनी ने जांच कमेटी बना दी है। हालांकि कमेटी के सदस्यों के नाम गोपनीय रखे गए हैं। अब योजना में हुए पूरे काम का भौतिक सत्यापन करने की बजाय सैंपल के लिए कुछ जगह सत्यापन कर जांच निपटाने की कोशिश शुरू हो चुकी है। जांच और आइपीडीएस के घोटाले को लेकर आइपीडीएस के प्रोजेक्ट डायरेक्टर बिजली कंपनी के इंजीनियर अशोक शर्मा ने चुप्पी साध ली है। उनसे नईदुनिया ने जांच व शिकायत की जानकारी मांगी तो शर्मा ने बाहर होने की बात कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया।
जांच बैठा हीहमारे पास शिकायत आई थी कि आइपीडीएस में नियम विरुद्ध बिलिंग और भुगतान किया गया है। जांच कमेटी बना दी गई है। गड़बड़ी पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।– अमित तोमर, एमडी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी





