डॉ. विकास मानव
_एक सवाल :_
“मेरा भाई बॉथरूम में मेरी पैंटी सूंघते हुए हैंडप्रैक्टिस कर रहा था. देखकर पहले तो मुझे हंसी आई लेकिन न्यूडबॉडी और पेनिस ने मुझे बेहद अट्रेक्ट किया. इतना प्यार प्रेमी या पति से भी मुझे नहीं हुआ, जितना उससे हो गया है.
_क्या मैं उसके साथ सेक्स सेलिब्रेट कर सकती हूँ? आजकल तो मां – बेटे, बाप-बेटी में भी सहमति से सब होने लगा है.”_
——————
यह मुंबई से रानी मिश्रा ने पूछा है. हम उनको अलग से जबाब देकर भी, यहां लिख रहे हैं, क्योंकि यह विचित्र तरह की बीमारी है. ऐसी विकृति की लत वाले बाकी लोग भी समझ सकेंगे.
*यह चौकाने वाली बात नहीं है. आम होता जा रहा है यह कल्चर. गत दिवस पाकिस्तान की शीर्ष यूनिवर्सिटी के एग्जाम में में “भाई- बहन के बीच सेक्स” पर निबंध लिखने का प्रश्न दिया गया. आप सब को पता है.*
—————————————
हमारा वैदिक साहित्य कहता है कि मां, बहन, बेटी को भी जवान बेटे, भाई, बाप के साथ अकेले में नहीं रहना चाहिए. बंद कमरे में तो बिलकुल नहीं. यौन-अग्नि का वेग अनियंत्रित हो सकता है. उसके बाद जो होता है, वह अनैतिक, चरित्रहीनता, महापाप है.
_हम धर्मग्रंथोँ की वकालत किए बिना सिर्फ एक सवाल पर विचार करने के लिए कह रहे है : यह क्या मनोस्वास्थ्य है? इसे मन-मस्तिष्क का रोग नहीं कहेँगे तो क्या कहेँगे?_
यौनऊर्जा सभी ऊर्जाओं का स्रोत है. इसको पशु, हवसी, यांत्रिक बनकर नष्ट करना खुद को सभी प्राणियों से श्रेष्ट कहने वाले मनुष्य के लिए स्वाभाविक नहीं कहा जा सकता.
_बिना वास्तविक प्रेम के सेक्स पशु करते हैं, यह इंसान का सब्जेक्ट नहीं है. समग्र प्रेम एक से ही संभव है. प्रेमरहित सेक्स जहर का काम करता है, ख़ासकर फीमेल्स के लिए._
विज्ञान की भाषा में कहें तो होर्मोनल असंतुलन, ब्लड सर्कुलेशन, आरएच फैक्टर, डीएनए सभी पहलू पर विसंगति पैदा होती है.
_कहीं भी, किसी से भी, कैसा भी सेक्स : इस तरह की सोच इंसान को मानसिक रोग के शिखर पर ले जाकर शारीरिक तल पर भी रोगी बना देती है._
ऐसी मानसिकता में दाम्पत्य जीवन कैसा होता है, यह बताने की जरूरत नहीं है. ऐसे लोग समाज को कैसी संतान देते हैं, यह भी बताने की जरूरत नहीं है.
प्रेम का संबंध मस्तिष्क से नहीं हृदय से है. संभोग सिर्फ जिस्मानी कौतुक नहीं, एक पवित्रतम साधना है जो भावना, संवेदना, चेतना को प्रभावित करती हुई आत्मा तक को तृप्त करती है.
_जहां तक स्त्री की बात है : बेशक उसमें पुरुष से 08 गुना अधिक यौनिक गर्मी होती है. लेकिन उसकी योनि कचराघर नहीं है की उसमें किसी का भी, कितनो का भी सब भरकर उसे सड़ते नाले में तब्दील कर दिया जाए._
आप जिसे प्यार करती हैं या आप का जो पति है : उस से आप सारी हसरत पूरी कर सकती हैं. अगर आप ऐसा करना तय करती हैं तो इतनी बड़ी तादात में पुरुष दुराचारी नहीं बनेगा. केंद्र में आप है. आप ही उसकी मा, बहन, प्रेमिका, पत्नि, बेटी, सहकर्मी हैं.
_अगर पति/प्रेमी रोगी है, तो इलाज़ करवा लें. दरिद्र हैं आप, इसके लिए पैसे नहीं हैं तो निःशुल्क इलाज़ का प्रबंध हम करवा देंगे. वह नामर्द है, तो उसको आपके काबिल बनाने का इंतजाम हम करते ही हैं — बिना कुछ लिए._
अगर वह इसके लिए भी रेडी नहीं होता : तब बेशक वह आपसे प्रेम नहीं करता. उसे सिर्फ अपनी हवस से मतलब.
_ऐसे में आप उसे छोड़ सकती हैं. परिवार – समाज के नाते नहीं छोड़ सकती तो : किसी योग्यतम से अपनी संतुष्टि कर सकती हैं, लेकिन सिर्फ एक से और कम से कम रक्तसंबंधी से तो बिल्कुल नहीं._







