जूली सचदेवा
_डिप्रेशन के लक्षण : तनाव, घबड़ाहट, मूड आफ होना और उदासी. नींद का उड़ जाना और सहवास की इच्छा का कम होना या खत्म होना।_
सबसे जरूरी बातें डिप्रेशन की : यह पागलपन की निशानी नहीं. शुगर और बीपी बीमारी जैसी, परेशानी के हिसाब से दवा और इलाज जरूरी. गुस्सा और दुख की वजह से कुछ करने के ख्याल लगातार आयें और साथ में दूसरे लक्षण हों, लगातार दो हफ्ते तक उदास,या रूटीन बहुत डिस्टर्ब हो और एनर्जी लेवल कम हो जाय : तो विशेषज्ञ डॉक्टर की शरण लें.
कैसे होता है डिप्रेशन : सेरेटेनिन की कमी से. सेरेटेनिन की कमी से नींद में खलल पड़ती है. अमूमन दवा इसके बढ़ाने के लिए दी जाती है.
डोपामइन या हैप्पी हार्मोन की कमी उदासी का कारण बनती है. ऐसी घटना से लगे अब कुछ नहीं हो सकता.
किसी करीबी का गुजर जाना, जाब या बिजनेस में नुकसान , उदासी का घातक असर पड़ता है.
*डिप्रेशन की केटेगरी :*
(1). माइल्ड डिप्रेशन
रूटीन प्रभावित हो, उदासी हावी हो, नींद खराब हो,भूख कम या ज्यादा,सिर दर्द, चिढ़ना.
खुद कशी का ख्याल, सेक्स की इच्छा कम,नशे की तरह झुकाव।
क्या करें. नींद बेहतर करने की दवा, लाइफस्टाइल सुधारें।
(2). माडरेट डिप्रेशन
माइल्ड डिप्रेशन से आगे की स्टेज. उसकी बातें थोड़े से ज्यादा रुप में दवा का इस्तेमाल तीन चार महीने करें.
(3). सीवियर डिप्रेशन
काफी गंभीर रहना मुख्य लक्षण है. दवा लगातार खायें. कभी मिस ना करें।
साइकाइट्रिस्ट की हर बात माने. डिप्रेशन की सभी कैटेगरी में सभी में सभी लक्षण मौजूद हो ये ज़रूरी नहीं। हां ज्यादा तर लक्षण हो सकते हैं पर ये दो तीन हफ्ते तक लगातार हों सजग हो जाएं.
डिप्रेशन का असर तन और मन दोनों पर पड़ सकता है। अगर डिप्रेशन के साथ कोई दूसरी बीमारी भी हो तो उसके बढ़ने की आशंका रहती है.
(4). प्रीमेनेस्टुअल डाइस्कोफिरिक डिसओर्डर
ये महिलाओं में होता है. बनावटी खुश रहने वाले अधिक शिकार. खुद को इसका पता चल जाता है.
_बच्चों में डिप्रेशन की बीमारी कम होती हैं पर पूरी तरह से इंकार नहीं किया जा सकता है। उनके विहेवियर पर ध्यान देते रहें।_
*आयुर्वेद में उपाय*
ब्राह्मी, जटामांसी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा का इस्तेमाल डिप्रेशन के इलाज के लिए किया जाता है। इससे दवाएं बनाई जाती हैं।
अश्वगंधारिष्ट,सरस्वतारिष्ट, तैयार किया जा सकता है। ये हर्वल वाइन होते हैं इसका उपयोग भी इलाज में किया जाता है.
,शिरोधारा से भी फायदा होता है। इसमें तिल के तेल आदि में जटामांसी और दूसरी चीजें मिलाई जाती है.
*योग और मेडीटेशन*
जैसे ही नींद आदि में सुधार हो कर सब नोर्मल हो जाता है। तो सेक्स इच्छा भी पहले की तरह नोर्मल हो जाती है और इसके लिए अलग से कुछ भी करने की जरूरत नहीं। मतलब ये मन चंगा तो कठौती में गंगा।
(चेतना विकास मिशन)




