अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

निगम मंडल में नियुक्तियों को लेकर उदासीन शिव सरकार

Share

भोपाल। अफसरों व अपनों को मनमाफिक पदस्थापना और पद देने में तनिक भी देरी न करने वाली प्रदेश की शिव सरकार पूर्व की अपनी ही सरकार की तरह इस बार भी कार्यकर्ताओं को सत्ता में भागीदारी देने के लिए अब तक तैयार नहीं दिख रही है। चौथी बार भाजपा की सरकार बने हुए एक साल का समय बीत चुका है , लेकिन अब तक सरकार ने निगम मंडलों से लेकर अन्य संस्थाओं में राजनैतिक नियुक्तियां करने की पहल तक शुरू नहीं की है। यही वजह है कि अब इन नियुक्तियों की तुलना बीरबल की खिचड़ी से की जाने लगी है।  इस बीच सरकार पर इन नियुक्तियों को लेकर बन रहे दबाब को कम करने के लिए अब दमोह उपचुनाव का बहाना मिल गया है।
इसकी वजह से अब निगम मंडल-प्राधिकरणों में नियुक्ति की आस लगाए नेताओं का इंतजार फिर से बढ़ गया है। दरअसल सत्ता व संगठन द्वारा इन दावेदार नेताओं को साफ कर दिया गया है कि सरकार की पहली प्राथमिकता कोरोना से पार पाना है। ऐसे में फिलहाल राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होंगी। इसकी वजह से अब यह दावेदार संगठन में पद पाने की कवायद में लग गए हैं। उल्लेखनीय है कि बीते विधानसभा चुनाव और उपचुनाव के समय मजबूत दावेदारी के बाद भी टिकट से वंचित नेताओं को संगठन ने  निगम मंडल-प्राधिकरण और आयोगों में एडजस्ट करने का भरोसा दिलाया था। इसकी वजह से ही यह नेता सरकार बनने के बाद से निगम मंडलों में नियुक्तियां होने का इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश कोरोना की पहली लहर से बाहर आया तो इन नियुक्तियों को लेकर सत्ता व संगठन के बीच कुछ नेताओं को निगम मंडलों में पद देने पर मंथन किया गया था। इसमें पार्टी के कुछ सीनियर और श्रीमंत समर्थक नेताओं के नामों पर आम राय बनी थी , जिसके बाद इसके लिए दिल्ली स्तर पर चर्चा का दौर शुरू किया गया था। सूत्रों के मुताबिक उस समय तय किया गया था कि पहले प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति, प्रवक्ता, पेनालिस्टों की नियुक्तियां की जाएंगी, इसके बाद निगम मंडल में नियुक्तियां की जाएंगी। इस बीच दमोह उपचुनाव आ गया है, जिसकी वजह से सरकार को इसका बहाना मिल गया है।
अब संगठन में शामिल होने पर जोर
निगम मंडल में नियुक्तियों को लेकर उदासीनता को देखते हुए अब इन नेताओं ने संगठन में शामिल होने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया है। इसके लिए अब यह दावेदार प्रभावशाली नेताओं को साधने में लग गए हैं। यह बात अलग है कि फिलहाल प्रदेश संगठन में प्रकोष्ठों के अलावा कई मोर्चाे की प्रदेश कार्यकारिणी  प्रवक्ताओं, पेनालिस्टों और प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों के पद ही रिक्त हैं।  
ढाई साल में नहीं हुई प्रदेश कार्यसमिति
भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की हर तीन माह में होने वाली बैठक पिछले ढाई साल से नहीं हुई है। इस बैठक में बीते तीन माह के कार्यकाल के दौरान आयोजित किए गए पार्टी कार्यक्रमों की समीक्षा करने के साथ ही आगामी तीन महीने की रणनीति तय की जाती है।
कांग्रेस उठा चुकी है फायदा
पूर्व में भी भाजपा सरकार में नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार मांग करने के बाद भी सरकार द्वारा नियुक्तियों में कोई रुचि नहीं ली गई थी, लिहाजा चुनावी साल में भी यह पद रिक्त पड़े रहे। इसकी नाराजगी का असर यह रहा है कि कई प्रभावशाली नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सिर्फ प्रचार में दिखावे के लिए ही काम किया , जिसकी वजह से कांग्रेस की सरकार बन गई थी। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद तत्कालीन सीएम कमलनाथ ने इन रिक्त पड़े अधिकांश पदों  पर नियुक्तियां कर दी थीं। बाद में नाथ सरकार के गिरने के बाद भाजपा की सरकार तो बन गई, लेकिन उसके बाद भी कई संस्थाओं पर कांग्रेस नेताओं का कब्जा बना हुआ है। इसके बाद भी भाजपा सरकार व संगठन ऐसे मामलों में सबक लेने को तैयार नहीं दिख रही है।

You can sh

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें