भोपाल)। वैसे तो हर राजनेता की कथनी और करनी को लेकर तरह-तरह की चर्चायें लोग करते नजर आते हैं इस प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में भी चाहे लोहपुरुष मुख्यमंत्री डीपी मिश्रा हों या पीसी सेठी या झुग्गी-झोंपडिय़ों के मसीहा अर्जुन सिंह हों वैसे तो भाजपा के नेता सुंदरलाल पटवा की कार्यशैली के बारे में भी कई तरह कि किवदंतियां इन दिनों भाजपाई ही नहीं बल्कि कांग्रेसी नेताओं के मुखाग्रन्दि से अक्सर सुनने को मिल जाती हैं, पटवा जी अक्सर कहा करते थे कि ”ज्यों की त्यों रख दीनी चुनरिया”लेकिन उनके इस कथन के बारे में उनके मित्र कांग्रेस के नेता क्या कहते हैं यह सभी जानते हैं, विगत १५ सालों से इस प्रदेश की राजनीति में सुंदरलाल पटवा के ही चेले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की कार्यशैली और कथनी करनी को लेकर भी लोग चटकारे लेकर चर्चा करते नजर आते हैं, तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के मुखाग्रबिन्द से लोगों को अक्सर यह भी खूब सुनने को मिला कि हमारे शासनकाल में राजनेता, भ्रष्ट अधिकारियों, दलालों और माफियाओं का कोई स्थान नहीं है अबकी बार हमारा मूड कुछ बदला हुआ है
, ”हम माफियाओं को दस फीट नीचे जमीन में गाढ़ देंगे” लेकिन उनके मुखाग्रबिन्द से इन शब्दों को सुनते ही कुछ क्षण के लिये तो लगता है कि क्या सच में माफियाओं को शिवराज दस फुट जमीन में गाड़ देेंगे? उनके इस दावे में कितनी सच्चाई है, इसकी भुक्तभोगी तो इस प्रदेश के राजनीति से जुड़े लोग और प्रदेश की जनता भली-भांति परिचित हैं कि जिन माफियाओं को दस फुट जमीन में गाडऩे की बात कर रहे हैं तो वहीं उनके सत्ता के काबिज होने के दिन से ही इस प्रदेश में अवैध रेत खनन और अवैध वन कटाई के दौर का भी श्रीगणेश हुआ था, यह अलग बात है कि जिस मां नर्मदा को वह अपने बुढ़ापे की काशी होने का दावा करते हैं उसी मां नर्मदा की ”नमामि देवी नर्मदा यात्रा” करने की घोषणा के चंद घंटों बाद ही प्रदेश के भाजपा कार्यालय में मौजूद नेताओं के मुखाग्रबिन्द से शिवराज की नमामि देवी नर्मदा यात्रा के बारे में जिस तरह के कमेंट्स आए थे उन्हें सुनकर तो यही लगता था कि नमामि देवी नर्मदा यात्रा नहीं बल्कि यह रेत खोजो यात्रा थी। खैर, नमामि देवी नर्मदा यात्रा के नाम पर करोड़ों रुपये इस खजाने से खर्च किये गये लेकिन उसके नतीजे क्या निकले यह तो नर्मदा किनारे किये गये पौधारोपण पर करोड़ों रुपये बहाने के बाद भी उतने पौधे आज नजर नहीं आ रहे हैं, ऐसे एक नहीं अनेकों उदाहरण मुख्यमंत्री शिवराज की कथनी और करनी के अनेक उदाहरण हैं जिन्हें कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा के देव दुर्लभ कार्यकर्ता उंगलियों पर गिनाते नजर आते हैं। खैर, यह उनकी अपनी शासन की कार्यशैली की पद्धति है वह चाहें अपने राज्य में चाहे नीचे से लेकर ऊपर तक या ऊपर से लेकर से नीचे तक भ्रष्टाचार की गंगोत्री बहायें और उस गंगोत्री में सरकारी आंकड़ों की फर्जी रंगोली सजाकर उनके चहेते अधिकारी जिनको उनके शासनकाल में भजकलदारम की लत लग गई है वह जो भी करें यह अलग बात है, यह सब होते हुए भी दूध देने वाली गाय ”नौकरशाही” का कुछ नहीं बिगाड़ पाते हैं हां, यदि उन्होंने किसी को निपटाया तो अपनी पार्टी के उन लोगों को निपटाया जो उनकी राजनीति बिछात में दखलंदाजी करते हैं। शिवराज की कार्यकाल की कथनी-करनी के चलते ऐसे भाजपा के एक नहीं अनेकों नेताओं के नाम गिनाए जा सकते हैं जिनको शिवराज सिंह ने किनारे करने के लिए बड़ी चतुराई का खेल खेला, उनके इसी खेल के चलते शिवराज सिंह ने सत्ता पर काबिज होने के लिये पहले तो उमा भारती को निपटाया, उसके बाद बाबूलाल गौर जैसे लोकप्रिय नेता को भी किनारे लगाने का भरसक प्रयास करते रहे लेकिन गौर थे जो हिमालय की तरह अडिग रहे और उनकी लोकप्रियता और कार्यशैली को कोई नहीं बिगाड़ पाया, प्रदेश के इतिहास में जहां गृह मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर जो इतिहास इस प्रदेश के लोग गिनाते हैं उनमें केवल बाबूलाल गौर ही ऐसे अपवाद स्वरूप गृहमंत्री हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवनकाल शान से जिया लेकिन यदि भाजपा के नेताओं की बात पर भरोसा करें तो लाख चाहते हुए भी शिवराज उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाये,
तो वहीं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा की कार्यशैली और उनके बड़बोलेपन को भी प्रदेश के भाजपा के कार्यकर्ताओं ने देखा, उनके इस बड़बोलेपन के उनको भी शिवराज ने ठिकाने लगाकर पोखरण विस्फोट की तरह उड़ा दिया हालांकि भाजपा के कुछ जानकार नेताओं की बात पर विश्वास करें तो अपने शासनकाल में शिवराज ने कांग्रेस पार्टी की तरह पंडितों को चुन-चुनकर ठिकाने लगाया भाजपा के नेताओं में चल रही इन दिनों चर्चाओं पर यदि भरोसा करें तो आगामी कुछ दिनों में इस प्रदेश में प्रभात झा जो बिहारी ब्राह्मण थे उनकी ही तर्ज पर अब प्रदेश के दो दिग्गज पंडित नेताओं के साथ प्रभात झा जैसी पोखरण नीति को दोहराने की तैयारी में लगे हैं। राजनीति के जानकर यह जानते ही नहीं बल्कि अक्सर कांग्रेस के पतन के कारणों के लिए कांग्रेस के आलाकमान द्वारा पंडितों की उपेक्षा को मानते हैं ?मगर फिर भी राजनैतिकोंं इस लाख टके सबाल के जबाब खोजने में लगे हुए हैं कि आखिर पंडितों ने शिवराज का ऐसा क्या बिगडा़ जिससे वह पंडित के साथ पोखरण जैसी घटनाएं कर उनका प्रभात जैसा हाल करने पर तुले हुए हैं? राजनीति से जुड़े और आमजन भी इस बात से भलीभाँति परिचित है कि शिवराज सिंह पर जब जब राजनैतिक संकट आया तब तब उन्हें संकट से उभारने का काम भी संकटमोचन की भूमिका अदा करते हुए पंडित डा, नरोत्तम मिश्रा ने शिवराज को संकट से उभारा ?हालांकि शिवराज सिंह की कार्यशैली और भाग्य के बारे में भाजपा नेताओं का कहना है कि उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह से इनका प्रणयसूत्र में बंधन हुआ तबसे इनका भाग्योदय हुआ है वैसे भी लोगों के विकास और प्रसिद्धि को लेकर किसी न किसी का हाथ होने की चर्चायें करते रहते हैं उसकी सफलता के पीछे महिला होने का दावा किया जाता है,
यदि भाजपा के कुछ नेताओं की मानें तो ऐसा ही कुछ शिवराज के साथ साधना सिंह की साधना के चलते भाग्योदय हो रहा है? हालांकि भाजपा के नेता दबी जुबान से शिवराज की रणनीति और कार्यशैली के चलते प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने के प्रयास में लगे होने का दावा करते नजर आते हैं? अब यह भविष्य के गर्भ में है कि कब शिवराज सिंह अपनी कार्यशैली के चलते अपनी परम्परा के अनुसार कब प्रदेश के दो पंडितों को निपटाकर प्रभात झा जैसा पोखण कांड करने वाले हैं? तो वहीं कब वह प्रधानमंत्री बनने वाले हैं यह भविष्य के गर्भ में हैं…?





