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छोटा केस, बड़ी कार्यवाही

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पुलिस, जज और रसूखदार अफसर तीनों पर जांच व कार्यवाही
कोर्ट के फाइनल आदेश के बाद कलेक्टर के आवेदन पर, शासन ने जारी की टाईम बार चालान पेश करने की अनुमति
तत्कालीन विजय नगर थाने के दो टीआई सहित तीन पुलिस अफसरों को दिया बड़ा दंड

इंदौर/भोपाल । (सात्विक गुप्ता 9827070242) कानून के जानकारों को यह स्टोरी पढ़ कर आश्चर्य भी होगा और कलमकार राजेन्द्र के.गुप्ता के द्वारा की गई कानूनी लिखा—पढ़ी का लोहा भी माना जाएगा। जिसमे पुलिस, जज और आरोपी अफसर के खेल को फेल करते हुए, प्रकरण को वही ला कर खड़ा कर दिया, जहा से शुरू हुआ था, जिन पुलिस अफसरों ने आरोपी आबकारी अफसर को सजा से बचाने की साजिश रची, उन सभी पुलिस अफसरों को भी सजा भोगना पड़ी ।
राजनीतिक परिवार से जुड़े, रसूखदार बनने वाले आबकारी अफसर पराक्रम सिंह चंद्रावत पर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए आबकारी एक्ट के अपराध में, आरोपी अफसर चन्द्रावत को सजा से बचाने की साजिश रची और बचाया भी, किंतु कलमकार गुप्ता ने कानून और कागजों की लिखा—पढ़ी का ऐसा कमाल दिखाया की, कोर्ट ने कलमकार की रिवीजन स्वीकार करके, उस आबकारी अफसर और वर्तमान टीआई को समन जारी करके जवाब तलब किया, जवाब देने में अब तक पुलिस को पसीने आ रहे है, वही दूसरी तरफ इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने तत्कालीन पुलिस एसपी पूर्व आशुतोष बागरी (वर्तमान में पुलिस उपायुक्त पद) के आवेदन पर शासन से समय उपरांत कोर्ट में चालान पेश करने की अनुमति मांगी, शासन ने भी अनुमति जारी कर दी, मुद्दा छोटा है किंतु संयम और समझ से लड़ाई लड़ी जाए तो, वक्त जरूर लगता है किंतु उसका परिणाम बहुत बड़ा आता है, सबसे बड़ी बात पुलिस, जज और  रसूखदार की उच्च स्तरीय सेटिंग भी फेल हो गई …! जो अफसर इस प्रकरण की लिखा—पढ़ी में शामिल है, वो भी चकित है…., तमाम सेटिंग फेल हो गई, आरोपी अफसर सजा से बच नहीं पाएगा, बल्कि उसके कारण तीन पुलिस अफसरों को भी सजा मिल गई, जो उनको जीवन भर विपरीत प्रभाव डालेगा…..

Ramswaroop Mantri

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