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तो क्या पंजाब में भगवंत मान अपने दम पर चलाएंगे केजरीवाल सरकार?

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एस पी मित्तल, अजमेर
19 मार्च को राजभवन में पंजाब के 10 और मंत्रियों ने शपथ ले ली। भगवंत मान 16 मार्च को पहले ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। यानी सीएम सहित 11 मंत्री हो गए हैं। 117 विधायकों की संख्या के अनुरूप कुल 18 मंत्री बनाए जा सकते हैं। 19 मार्च को 10 मंत्रियों की शपथ लेने के साथ ही राजनीति खासकर आम आदमी पार्टी की राजनीति में अनेक सवाल उठ खड़े हुए हंै। मान ने 16 मार्च को सीएम पद की शपथ ली और 19 मार्च को 10 मंत्रियों को शपथ दिला दी। यानी मान नए मंत्रियों के नाम पर विचार विमर्श करने के लिए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से दिल्ली आकर नहीं मिले। पंजाब की राजनीति को समझने वालों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार में मान की ही छाप देखने को मिली है। फिलहाल उन विधायकों को मंत्री नहीं बनाया गया है जो अरविंद केजरीवाल के समर्थक माने जाते हैं। केजरीवाल समर्थकों का कहना है कि भगवंत मान सरकार चलाने में आम आदमी पार्टी ने पूरी छूट दी है। लेकिन जो लोग अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली और महत्वाकांक्षा से परिचित है उनका सवाल है कि क्या केजरीवाल भगवंत मान को स्वतंत्र तौर पर पंजाब की सरकार चलाने की छूट दे सकते हैं? सब जानते हैं कि पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के अधिकारों में रात दिन का अंतर है। पंजाब के मुख्यमंत्री को प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति करने का अधिकार है। जबकि केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास ऐसे अधिकार नहीं है। दिल्ली के सीएम के पास सीमित अधिकार है और उन्हें अपनी सरकार के निर्णयों पर उप राज्यपाल की स्वीकृति लेना जरूरी होता है। जबकि पंजाब का सीएम आदेश जारी करता है,जिस पर प्रशासन और पुलिस को अमल करना होता है। यह भी सही है कि चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली का जो मॉडल रखा उस पर ही पंजाब की जनता ने मोहर लगाई है। 117 में से 92 विधायकों की जीत के पीछे केजरीवाल का चेहरा ही है। लेकिन 16 मार्च को जब सरदार भगत सिंह के गांव खटकड़कलां में मुख्यमंत्री की शपथ के समय जब दो लाख लोग एकत्रित हुए तब समारोह में केजरीवाल ने एक शब्द भी नहीं बोला। समारोह से राज्यपाल के चले जाने के बाद भगवंत मान ने राजनीतिक भाषण दिया, लेकिन अरविंद केजरीवाल का नहीं बोलना अनेक सवाल खड़े कर रहा है। शपथ के बाद केजरीवाल ने भगवंत मान से अलग से कोई बातचीत भी नहीं की और वे शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद दिल्ली के लिए रवाना हो गए। जिन लोगों ने शपथ ग्रहण समारोह का लाइव टीवी पर देखा उन्होंने यह भी देखा होगा कि पूरे समारोह में अरविंद केजरीवाल के चेहरे पर एक बार भी मुस्कान देखने को नहीं मिली। 19 मार्च को मंत्रियों के शपथ ग्रहण में भी आम आदमी पार्टी का कोई बड़ा नेता नहीं देखा गया। आमतौर पर पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद संजय सिंह और पार्टी के प्रवक्ता व विधायक राघव चड्ढा हर समारोह में नजर आते हैं लेकिन मंत्रियों के शपथ ग्रहण में इन नेताओं की भी कोई उछल कूद देखने को नहीं मिली। जिन दस मंत्रियों ने शपथ ली उनके नामों की घोषणा एक दिन पहले ही सीएम ने सोशल मीडिया पर कर दी। यानी मंत्रियों के चयन में भी केजरीवाल की कोई भूमिका फिलहाल देखने को नहीं मिली है। सवाल उठता है कि क्या अरविंद केजरीवाल पंजाब में भगवंत मान को सरकार चलाने की पूरी तरह स्वतंत्रता देंगे? क्या भगवंत मान अपने दम पर केजरीवाल सरकार चला पाएंगे। सब जानते हैं कि चुनाव के दौरान आम ने अनेक वादे किए हैं, इनमें सबसे बड़ा वादा 300 यूनिट तक बिजली फ्री देने का है। इसी प्रकार महिलाओं को प्रतिमाह पारिश्रमिक देने की भी घोषणा की गई है। क्या ये सभी घोषणाएं भगवंत मान पूरी कर पाएंगे? क्या इन मांगों को पूरा करने में अरविंद केजरीवाल के दिमाग की जरुरत नहीं होगी? फिलहाल तो ऐसा ही लग रहा है कि भगवंत मान ने अपने दम पर सरकार की शुरुआत की है। देखना होगा कि अरविंद केजरीवाल के सहयोग के बगैर मान की सरकार कितने दिनों तक चलती है। 

Ramswaroop Mantri

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