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अफ़ग़ानिस्तान : अबलाओं की चीखों को आवाज़ देतीं कुछ कविताएँ

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(1)
अफ़ग़ानिस्तान महज़ एक मुल्क नहीं है
कँटीली झाड़ियों से भरा एक भूखंड है
सारे फूल यहाँ कुचल दिए गए हैं
सारी हरी घास उखाड़ी जा चुकी है
यहाँ की धरती साँपों बिच्छुओं से पटी है
यहाँ पाँव धरने का अंजाम सिर्फ़ मौत है
दुनिया के बहुत से हिस्सों में तानाशाह
ऐसे ही भूखंडों के निर्माण में जुटे हैं
ऐसे तानाशाहों पर हम अगर मुग्ध रहे
दुनिया में हर जगह होंगे अफ़ग़ानिस्तान
(2)
अफ़ग़ानिस्तान महज़ एक मुल्क नहीं है
यह इतिहास का रक्तरंजित अध्याय है
इस ख़ूनी अध्याय के पन्ने पलटते हुए
उंगलियाँ रक्त से सन कर झुरझुराती हैं
ऐसे अध्याय वहशियों की प्रेरणा होते हैं
मनुष्यता के पक्षधरों के लिए नसीहत
इस अध्याय को पढ़ते हुए जो लोग मज़े से
चटख़ारे लेते हुए उंगलियाँ चाट रहे हैं
उन पर पैनी नज़र रखी जानी चाहिए
ये वही लोग हैं जो मनुष्यता के इतिहास में
ऐसे अध्याय जोड़ने के लिए कसमसा रहे हैं
(3)
अफ़ग़ानिस्तान महज़ एक मुल्क नहीं है
यह लाभ-हानि के गणित की बिसात भी है
अफ़ग़ानिस्तान में पसरी चीखों से निर्लिप्त
शासनाध्यक्ष जोड़ घटा गुणा भाग में लगे हैं
कि दरिंदों के समर्थन से क्या हासिल होगा
और कौन सा हासिल विरोध से खो जाएगा
वे विरोध भी करते हैं तो उनका नाम नहीं लेते
शासनाध्यक्षों ने यह गणित गिद्धों से सीखा है
या मुर्दाखोर गिद्धों ने इन शासनाध्यक्षों से?
(4)
अफ़ग़ानिस्तान महज़ एक मुल्क नहीं है
यह ख़ूबसूरत दृश्यों की क़त्लगाह है
मज़हबी हुकूमत को शोर नापसंद है
उसे मरघटी सन्नाटा ही अच्छा लगता है
इस हुकूमत में चहकने पर रोक होगी
पेड़ों पर चिड़ियाँ नहीं चहकेंगी
स्कूल जाती बच्चियाँ नहीं चहकेंगी
बाज़ार में घूमते या काम पर आते जाते
मर्द और औरतें नहीं चहक सकेंगे
चहकने पर सज़ा-ए-मौत दी जाएगी
चहकने वालों पर नज़र रखी जाएगी
हालात ऐसे बना दिए जाएँगे कि चहक
सपनों में भी आए तो सिसकी की तरह
चहकते लोग दुनिया भर के तानाशाहों की
आँखों में कंकड़ियों की तरह कसकते हैं
(5)
अफ़ग़ानिस्तान महज़ एक मुल्क नहीं है
यह नफ़रत का लावा उगलता ज्वालामुखी है
ऐसे ज्वालामुखी एक जगह तक महदूद नहीं
दुनिया के हर हिस्से में यह लावा धधक रहा है
यक़ीन न हो तो अपने आसपास ही देखिए
आपके कहकहों के शोर में भी गूँज उठती हैं
आग से जले, झुलसे लोगों की चीख़ें, कराहें
मनुष्यता के पक्षधरों को समझना ही होगा कि
विलाप दुनिया के किसी भी हिस्से में हो, कँपाता है
लावा किसी भी ज्वालामुखी से फूटे, जलाता है

-हरभगवान चावला,संपर्क-93545 45440,ईमेल-hbchawla1958@gmail.com

               संकलन -निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद,उप्र,
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