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*सोनम वांगचुक:कितना आसान है न आजकल किसी को भी देशद्रोही बना देना?*

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विजय सिंह ठकुराय 

प्रथम Pinned कमेंट में एक 6 माह पुराना वीडियो है, जब सोनम वांगचुक UN द्वारा आयोजित एक पर्यावरण कांफ्रेंस में भाग लेने पड़ोसी मुल्क गया था। तब तक छठी सूची के नाम पर केंद्र द्वारा ठगा जा चुका था, मन में खीज अथवा रोष तो होगा। पर बंदा फिर भी पाकिस्तान के मंच पर, सैकड़ों मीडिया और पाकिस्तानी मंत्रियों के सामने अपने प्रधानमंत्री की तारीफ करने से न चूका। और सरकार ने इसी पाकिस्तानी विजिट के नाम पर इसका पाकिस्तानी कनेक्शन निकाल कर इसे देशद्रोही घोषित कर दिया। 

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कितना आसान है न आजकल किसी को भी देशद्रोही बना देना?

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संयुक्त राष्ट्र संघ, स्विट्जरलैंड और इटली की यूनिवर्सिटी ने स्वयं इस बंदे से कृषि संबंधित इनोवेटिव तकनीकों को लेकर करोड़ों का भुगतान किया, उस धन को सरकार ने “विदेशी फंडिंग” प्रचारित कर दिया, जबकि वह धन डोनेशन नहीं, बल्कि शुल्क था, उस पर FCRA लागू ही नहीं होता। सोचिए, खेती से जुड़ी जानकारी साझा करने पर “भारत की संप्रभुता” से जुड़ी जानकारियां साझा करने का आरोप लगाया गया है।

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2020 में एक अर्थशास्त्री और नोबेल विजेता के तौर पर यूनुस इससे खुद मिलने आया, तस्वीर सोनम ने खुद पोस्ट की। आज उस तस्वीर के बहाने इस बंदे का 2025 में बांग्लादेशी कनेक्शन भिड़ाया जा रहा है। 

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एक विख्यात कॉमेडियन के चीनी सैनिकों को रास्ता दिखाने वाले स्टैंडअप जोक का बचाव करते हुए सोनम ने उसे माफ़ करने, उसकी पीड़ा समझते हुए मुख्य समस्या (चीनी घुसपैठ) को सुलझाने का आग्रह किया तो अन्धभगतों की फौज ने बिना वीडियो को समझे देखे इसे सोनम का ही बयान बता कर उसे चीनी एजेंट साबित कर दिया, जबकि शायद ही कोई हो, जिसने सोनम की तरह चीन के खिलाफ आवाज उठाई हो। 

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नीचता की हद देखिए। एक स्कूल बस खरीदने के लिए इसने लगभग सवा तीन लाख रुपए अपनी जेब से डोनेट किये, जिसका भुगतान बाद में किसी अन्य डोनर ने वांगचुक को कर दिया। तब वांगचुक ने विनम्रता से इसे अस्वीकार कर धन को स्कूल के फंड में दान दे दिया। तो इस पर केस बनाया जा रहा है कि एंट्री क्यों नहीं की? सवा तीन लाख का आरोप उस बंदे पर, जो पिछले 5 साल में दो करोड़ की जेब से चैरिटी कर चुका हो। यूनियन टेरीटरी बनते ही अपनी जेब से केंद्र सरकार को 5 लाख रुपए लदाख के विकास के लिए डोनेशन दिया हो, उसे पर ऐसे चिन्दी इल्जाम लगाए जा रहे हैं। 

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पूरे लदाख में सोनम वांगचुक एकलौता ऐसा व्यक्ति है, जो स्वेच्छा से आज तक अपनी करोड़ों की व्यक्तिगत आय पर आयकर भरता आया है, जबकि लदाख वासियों को आयकर से 100% छूट है। उसके बाद भी इस बंदे पर  इन 4 साल पहले कुछ मजदूरों की दिहाड़ी भुगतान न करने जैसा टुच्चा केस तक लगाया गया है। 

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नीचता की पराकाष्ठा देखिए कि राजनीतिक प्रतिशोध में नियमों का हवाला देकर बच्चों के विद्यालय के लिए दी जमीन ही वापस हड़प ली, जबकि तमाम डॉक्यूमेंट सिद्ध करने के लिए मौजूद हैं कि सरकारी अफसरों ने ही बार-बार लिखित निवेदन करने के बाद भी लैंड लीज के डॉक्यूमेंट साइन नहीं होने दिए, जबकि सोनम द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर जमीन पर यूनिवर्सिटी हेतु भवन बनाये जा चुके हैं, जिन्हें अब जमींदोज कर दिया जाएगा। (भवन चित्र कमेंट में)

अगर इन सब मामलों की निष्पक्ष जांच हो जाएं तो सभी चार्जेज 5 मिनट में खारिज हो जाएंगे। पर ऐसा न हो, इसलिए कानून ही ऐसा लगाया है कि सालों तक कोई सुनवाई-जमानत का प्रावधान ही न बने और लदाख की प्राकृतिक सम्पदाएँ आराम से गुज्जु सेठों को बेची जा सकें।

शायद सोनम की जगह कोई और होता तो अपने द्वारा किये गए तमाम आविष्कारों के पेटेंट लेकर विदेश निकल जाता और अरबों रुपए कमा कर मौज में जिंदगी बिताता। अथवा सत्ता से ही हाथ मिला कर लदाख का सांसद बन कर आराम से जीवन काटता। 

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देश का कैसा दुर्भाग्य है कि जिसने अपना तमाम जीवन भारत के लोगों, बच्चों, छात्रों, किसानों, सैनिकों की भलाई के लिए खपा दिया – आज वह देशद्रोही है। जो साधु वेश धर के लूटने चले हैं – वे सबसे बड़े देशभक्त हैं। 

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क्या ही कहिए, अमृतकाल में आपका स्वागत है। 

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– झकझकिया

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(चित्र के बैकग्राउंड में सोनम द्वारा ठंडे इलाकों में आर्मी के लिए बनाया गया सोलर एनर्जी से गर्म रहने वाला टेंट)

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