इंदौर – प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन श्री राजेन्द्र सिंह भदौरिया ने बताया कि दिनांक 2.03.2026 को माननीय न्यारयालय,श्रीमती रमा जयंत मित्तल पंचम अपर सत्र न्या.याधीश एवं विशेष न्यानयालय (पॉक्सो अधिनियम) ने थाना बाणगंगा के विशेष प्रकरण क्रमांक 105/2024 में निर्णय पारित करते हुए आरोपी शिवम उर्फ मेंटोला उम्र 22 वर्ष निवास, इंदौर को धारा 5(एम)/6 पॉक्सो अधिनियम में 20 वर्ष का सश्रम कारावास व धारा 377 भा.द.स. मे 10 वर्ष का सश्रम कारावास और कुल 20000/- रुपये के अर्थदण्ड से दंडित किया।प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक श्रीमती वर्षा पाठक द्वारा की गयी।
नोट :- पीड़ित प्रतिकर योजनान्तर्गत माननीय न्याायालय द्वारा पीड़ित को हुयी शारीरिक एवं मानसिक क्षति को ध्यान में रखते हुए 4,00,000/- रुपये की राशि प्रदाय करने बाबत अनुशंसा की गयी।
अभियोजन का प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि दिनांक 16.04.2024 को बालक की माता ने आरक्षी केन्द्र बाणगंगा, जिला इंदौर पर उपस्थित होकर इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह दिनांक 15.04.2024 को रात्रि करीब 09:00 बजे घर पर काम कर रही थी तभी उसका छोटा भाई आया और पूछा कि बालक कहां है तो उसने कहा कि बाहर खेल रहा होगा, किंतु बालक कहीं दिख नहीं रहा था, तब उसने, उसके भाई-बहन के साथ बालक के बारे में आसपास के लोगों से पूछा तो उनके द्वारा बताया गया कि शिवम के साथ जाते देखा था। उसके बाद शिवम के घर जाकर देखा तो उसकी मां ने बताया कि शिवम, बालक को लेकर कहीं गया है, कहां गया है उसे पता नहीं। उसके बाद वे शिवम के घर की तीसरी मंजिल पर बालक को आवाज देते हुए ढूढने पहुंचे तब देखा कि बाथरूम से शिवम, बालक को लेकर निकला, तब बालक उन्हें रोकर बताने लगा कि भैय्या ने उसके साथ गलत काम किया है भैय्या जब गलत काम कर रहें थें तो तब मै चिल्लाया था तो भैय्या ने मेरा मुंह दबा दिया था। फरियादी की रिपोर्ट के आधार पर थाना बाणगंगा, जिला इंदौर में अभियुक्त के विरुद्ध अपराध क्रमांक 554/2024 धारा 377 भा.द.सं. व लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 5 (एम)/6, 3/4, 3(ग)/4 एवं 3 (घ)/4 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना आरंभ की गई। विवेचना के दौरान पीड़ित बालक का मेडिकल परीक्षण करवाया गया अन्य साक्षीगणो के कथन लेखबद्ध किए गए अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया संपूर्ण विवेचना पश्चात् अभियोग-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रकरण मे अभियोजन द्वारा 09 साक्षियों की साक्ष्य करायी एवं न्यायालय के समक्ष अपने मामले को प्रमाणित किया जिससे सहमत होते हुये न्यायालय द्वारा अभियुक्त को दोषी पाते हुये उक्त दण्ड से दंण्डित किया गया।
05 वर्षीय बालक के साथ दुष्कृत्य करने वाले आरोपी को हुआ 20 वर्ष का सश्रम कारावास






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