इंदौर
प्रदेश में कोरोना से हो रही मौत, रेमडेसिविर, ऑक्सीजन की कमी को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सोमवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई की। हाईकोर्ट ने शासन को आदेश दिए थे कि संक्रमण की रोकथाम के लिए क्या किया जा रहा है, इस पर रिपोर्ट पेश की जाए। सोमवार को महाधिवक्ता ने वर्चुअल सुनवाई के जरिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव ने चीफ जस्टिस मो. रफीक, जस्टिस अतुल श्रीधरन की खंडपीठ के समक्ष जवाब दिया कि प्रदेश में संक्रमण के आंकड़े तेजी से गिरते जा रहे हैं। वहीं रिकवरी भी बढ़ गई है। संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वाले हो गए हैं। जून के पहले सप्ताह तक प्रदेश में लॉकडाउन हटाने की स्थिति आ जाएगी।
अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी पूरी तरह खत्म हो गई है। हम सरप्लस में आ गए हैं। कई अस्पतालों ने ऑक्सीजन डिपॉजिट भी कर ली है। रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी भी अब नहीं है। हर अस्पताल के पास इसका पर्याप्त स्टॉक है। इंजेक्शन के लिए बाजारों में मरीजों के परिजन अब नहीं भटक रहे हैं।
इंदौर के अधिवक्ता मनीष यादव सहित भाेपाल, ग्वालियर, जबलपुर व कई शहरों से लोगों ने 15 से ज्यादा जनहित याचिकाएं दायर की थी। डिविजन बेंच ने लगभग एक दर्जन याचिकाओं को निर्देशों के साथ निराकृत भी कर दी। हाईकोर्ट अब आगामी गुरुवार या शुक्रवार को फिर सुनवाई कर सकती है।
जनहित याचिका में की मांग- वैक्सीन के लिए ग्लोबल टेंडर मंगाए सरकार, 19 मई को सुनवाई
इंदौर | मध्यप्रदेश में भी वैक्सीनेशन के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए जाने को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका सोमवार को दायर की गई। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में वैक्सीन की किल्लत के कारण टीकाकरण कछुआ चाल से चल रहा है।
कोवैक्सीन और कोविशील्ड के अलावा अभी तीसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है। वैज्ञानिक सितंबर, अक्टूबर में तीसरी लहर आने की बात कह चुके हैं। ऐसे में पूरी क्षमता के साथ वैक्सीनेशन नहीं किया तो मध्यप्रदेश बुरी तरह संक्रमण की चपेट में आ जाएगा। तीसरी लहर में बच्चों के भी प्रभावित होने की चेतावनी वैज्ञानिकों ने दी है।
राज्य सरकार को केंद्र के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। कोर्ट इस याचिका पर आगामी 19 मई को सुनवाई करेगी। स्टेट बार काउंसिल के सदस्य सुनील गुप्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने यह जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा है कि 18 साल से अधिक उम्र वालों को दिन-दिनभर प्रयास के बाद भी स्लाॅट नहीं मिल रहे हैं। छह करोड़ जनसंख्या का एक साथ वैक्सीनेशन होगा तो ही इम्युनिटी बन पाएगी।





