अग्नि आलोक

*सरकार हमें अर्बन नक्सल बताकर डर पैदा करना चाहती है~ डॉ. जी. जी. परीख*

Share

, इस डर को खत्म करने का एक ही तरीका है कि बड़ी संख्या में हम जेल भरें*

*शहरीकरण रोकने के लिए ग्रामीण विकास हेतु काम करने की जरूरत*

डॉ सुनीलम 

    स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. जी. जी. परीख से आज उनके निवास, गणेश प्रसाद बिल्डिंग, ग्रांट रोड में मुलाकात हुई। मैंने देखा वो दर्द से कराह रहे थे, मुझे देखते ही बोले ” शारीरिक क्षमता इतनी कम हुई है कि जिंदा रहना कठिन काम लगता  है, पिछले कुछ महीनों से चलना फिरना बिल्कुल बंद हो गया है, दोनों पैरों में बहुत दर्द रहता है l लेकिन जीजी तो जीजी है कुछ ही देर बाद ही मुझे काम बताना शुरू कर दिया । उन्होंने कहा  “समाजवादी आंदोलन के लिए 10 करोड़ का कॉरपस फंड  इकट्ठा करना चाहिए । समाजवादी संस्थाओं के कामकाज को सहयोग करने के लिए 25 करोड़ का फंड इकट्ठा करना बहुत जरूरी है l इस काम को आगे बढ़ाने के लिए देशभर की समाजवादी संस्थाओं की विस्तृत सूची बनानी चाहिए। हम समाजवादी संस्थाएं का काम 2019 से ही  रुका पड़ा है। मैंने कोशिश की थी कि, एस.एम जोशी सोशलिस्ट फाऊंडेशन में इस पहल का एक ऑफिस बन जाए जो देशभर की समाजवादी संस्थाओं  को जोड़ने, वैचारिक प्रशिक्षण देने और आपात स्थिति में आर्थिक मदद उपलब्ध कराने का काम कर पाए, लेकिन वह नही हो पाया। आप सबने मिलकर समाजवादी समागम बनाया था, तब से लेकर हमने अब तक जो जो किया उसकी सूची बनाकर  मूल्यांकन करना चाहिए। मैं पढ़ता रहता हूँ कि हरभजन सिंह सिद्धू देश-विदेश में हिंद मजदूर सभा के कार्यक्रमों में, मजदूरों के संघर्ष में व्यस्त रहते हैं l प्रोफेसर राजकुमार जैन दिन-रात समाजवादी आंदोलन की विभिन्न घटनाओं, व्यक्तियों और संस्थाओं के बारे में लिखते रहते हैं। अरुण श्रीवास्तव गोरखपुर में सतत रूप से  समाजवादी विचार के प्रचार- प्रसार के लिए पूरी लगन से कार्य कर रहे हैं। आप भी पिछले 28 वर्षों से किसान आंदोलन में संघर्षरत हैं । 

रमाशंकर सिंह ने गांधी, डॉ लोहिया और मधु लिमए, मधु दंडवते  पर 25-30 किताबें निकाली है। प्रोफेसर आनंद कुमार को देशभर के कार्यक्रम में बुलाया जाता है, कल ही वे आपातकाल पर किसी एक पुस्तक के लोकार्पण के लिए बेंगलुरु में थे। वे आजकल 

लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण के कार्यक्रम में बहुत व्यस्त रहते हैं। आप सब व्यस्त है, मुझे आप में से किसी की प्रतिबद्धता पर कोई प्रश्न चिन्ह नहीं लगाना  लेकिन *समाजवादी विचार का प्रशिक्षण कहाँ हो रहा है*? यह प्रश्न मेरे मन में है l

पहले आप युवाओं के शिविर लगाते थे, उससे जबर सिंह, धर्मेंद्र, कुलदीप, रविंद्र जैसे साथी निकले। जो युसूफ़ मेहेरअली सेंटर का काम आगे  बढ़ा रहे हैं। युसूफ़ मेहेरअली सेंटर पर इनकम टैक्स की नोटिस है, हम लड़ रहे है विभाग के अंदर पर ये भी सच है कि बड़ा बकाया है, इस काम में  मधु मोहिते, नितिन आनेराव और गुड्डी के साथ-साथ युसूफ मेहेरअली सेंटर की स्थानीय टीम  लगी रहती है। बहुत सारे लोग मदद भी कर रहे हैं। अभी 2 जुलाई के दिन जब युसूफ मेहेरअली की स्मृतिदिन पर युसूफ मेहेरअली सेंटर, तारा में कार्यक्रम किया गया तब कई लोगों ने मिलकर 4 लाख रुपए की सहयोग राशि जाहिर की, कुछ के पैसे भी आ गए l ये सब हो रहा है लेकिन हमें इस काम और *समाजवादी विचार को आगे बढ़ाने के लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं की जरूरत है*। सुनियोजित और संगठित कार्य करने के लिए करोड़ों रुपए की जरूरत है।

हमारे जमाने में हम अपनी कमाई का 10% हिस्सा सोशलिस्ट पार्टी को देते थे, अपने विचार को आगे बढ़ाने के लिए खर्च करते थे। आज आपको ऐसे लोगों की तलाश करनी चाहिए जो समाजवाद के सपनों को धरती पर उतारने के लिए अपनी कमाई का 10% देने को तैयार हों। *समाजवादियों को ग्रामीण क्षेत्र के विकास पर कार्य करना चाहिए, यह शहरीकरण रोकने के लिए जरुरी है। गांव के लोग शहर न जाए बल्कि शहर से लोग गांव लौटें, इस दिशा में भी कार्य करना जरुरी है*। उन्होंने कहा कि *जो मॉडल युसूफ मेहेरअली सेंटर ने तैयार किया है उस प्रयोग को यदि गाँव गाँव में ले जाया जाए तो गाँव से शहर की ओर होने वाले  पलायन रोका जा सकता है*। बीच में मैने इसी संदर्भ में सुधींद्र कुलकर्णी का एक लेख पढ़ा था, जिसमें उन्होंने चीन द्वारा अपनाई गई नीति का उल्लेख किया था, उन्होंने लिखा है कि चीन ने अपने सबसे गरीब राज्य को विकसित करने के लिए राज्य का सर्वे किया, जरूरतों को जाना। यह विश्लेषण किया कि लोग गरीब क्यों है ? फिर हर एक परिवार की ग़रीबी को दूर करने और उसका जीवन स्तर राष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिए क्या कुछ करना है, यह परामर्श देने और सरकार से मदद दिलाने के लिए एक तकनीकी जानकार व्यक्ति की नियुक्ति की। जिसको एक समय सीमा के भीतर उस परिवार को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

यह प्रयोग सफल रहा। मैं इस प्रयोग का उल्लेख इसलिए नहीं कर रहा हूं कि उसे भारत में भी ज्यों का त्यों लागू किया जाए लेकिन यह  बता रहा हूं कि इस दिशा में समाजवादियों को सोचने की जरूरत है। अपने तरीके से इसपर काम करने की जरूरत है।

डॉ लोहिया, जॉर्ज फर्नांडिस, मधु दंडवते और सुरेंद्र मोहन ने ग्रामीण विकास के लिए अपने-अपने तरीके से योगदान किया। एम.एल. दांतवाला और एल सी जैन जैसे लोग थे जो दिन-रात इस दिशा में सोचते थे । मैं चाहता हूं कि आप सब भी इस बारे में सोचें । आप सब जो काम कर रहे हैं वह जरूरी है लेकिन केवल उतना करने से समाजवादी विचार आगे नहीं बढ़ेगा। उसके लिए आपको संगठित और समयबद्ध प्रयास करना पड़ेगा। समाज में बहुत सारे लोग समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। पैसे का योगदान भी करना चाहते हैं लेकिन हम उन तक कैसे पहुंचे, इस पर ठोस रणनीति बनाने की जरूरत है। कल ही गुड्डी ने बताया कि संविधान दिंडी और लोकायत की एक्टिविटी को अर्बन नक्सल एक्टिविटी बताया जा रहा है l इस मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार), कांग्रेस, शिवसेना (ठाकरे गुट) ने भूमिका ली है, साथ ही शरद पवार जी ने स्पष्ट भूमिका लेते हुए कहा कि लोकायत के कामों से मैं भली-भांति परिचित हूँ l इससे एक सपोर्ट सिस्टम इस मुद्दे पर खड़ा हो गया लेकिन ऐसा क्यूँ कहा गया ये हमें सोचना चाहिए l *सरकार हमें अर्बन नक्सल बताकर डर पैदा करना चाहती है। इस डर को खत्म करने का एक ही तरीका है कि बड़ी संख्या में हम जेल भरें*। अंग्रेजों ने भी डर पैदा करने का काम किया था लेकिन गांधी जी, समाजवादियों सहित तमाम स्वतंत्रता सेनानियों ने उस डर को तोड़ दिया, तभी आम लोग बड़े पैमाने पर आंदोलन में उतरे और बड़े पैमाने पर लोग जेल गए l डर खत्म होने का नतीजा था कि 

हम आजाद हुए। हमें इस लड़ाई को समाजवादियों की लड़ाई बनानी चाहिए l अब मैं इस उम्र में बहुत कर सकता नहीं, नहीं तो जो मैंने आपको कहा वो सब मैं करने का प्रयास करता l”

डॉ सुनीलम 

8447715810

kssmultapi@gmail.com

Exit mobile version