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*ताजा खबर:क्यों पाकिस्तान पर था नेवी का भारी दवाब,लुंगी में थाइलैंड भागे बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति, ट्रंप का सीरिया से प्रतिबंध हटाने का ऐलान…* 

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डोनाल्ड ट्रंप की मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात लाई रंग

अमेरिका और सऊदी अरब ने 600 अरब डॉलर का रक्षा और AI में निवेश का समझौता किया है। वाइट हाउस ने मंगलवार को बताया है कि अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ 600 अरब डॉलर की रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डील की है। इसमें कई बड़े AI चिप ऑर्डर और रक्षा सौदे शामिल हैं। दोनों देशों के बीच 142 अरब डॉलर की हथियारों की डील भी हुई है। ये तब हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब के दौरे पर हैं। ट्रंप ने रियाद में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को अविश्वसनीय व्यक्ति बताते हुए कहा कि वह अमेरिका और सऊदी अरब के बीच बेहतर संबंधों की नींव रख रहे हैं। 

अमेरिका और सऊदी अरब ने 600 अरब डॉलर का रक्षा और AI में निवेश का समझौता किया है। वाइट हाउस ने मंगलवार को बताया है कि अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ 600 अरब डॉलर की रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डील की है। इसमें कई बड़े AI चिप ऑर्डर और रक्षा सौदे शामिल हैं। दोनों देशों के बीच 142 अरब डॉलर की हथियारों की डील भी हुई है। ये तब हुआ है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब के दौरे पर हैं। ट्रंप ने रियाद में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को अविश्वसनीय व्यक्ति बताते हुए कहा कि वह अमेरिका और सऊदी अरब के बीच बेहतर संबंधों की नींव रख रहे हैं।

वाइट हाउस ने अपने बयान में कहा है कि सऊदी अरब अमेरिका में 600 बिलियन का निवेश करेगा। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और भी मजबूत होंगे। इन सौदों में सऊदी अरब की नई सरकारी AI कंपनी, हुमैन का एक बड़ा समझौता भी शामिल है। हुमैन अगले पांच सालों में आधुनिक चिप्स का इस्तेमाल करके AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएगी। ट्रंप के रियाद दौरे पर ये समझौता हुआ है।

व्हाइट हाउस ने बताया है कि सऊदी अरब को 142 अरब डॉलर के स्टेट-ऑफ-द-आर्ट वॉरफाइटिंग इक्विपमेंट दिए जाएंगे। यह सौदा कई अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ किया गया है। इसके तहत सऊदी अरब को एयर फ़ोर्स, स्पेस कैपेबिलिटी, मिसाइल डिफेंस, समुद्री और सीमा सुरक्षा, लैंड फोर्स मॉडर्नाइजेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम अपग्रेड जैसी चीजें मिलेंगी।

डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार से सऊदी अरब, कतर और यूएई के चार दिन के दौरे पर हैं। उनके इस दौरे में का मकसद एक ट्रिलियन से ज्यादा के सौदे और निवेश हासिल करना हैं। कतर, सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात अमेरिकी हथियारों के सबसे बड़े खरीदार हैं और अमेरिका से अच्छे संबंध रखते हैं। इन सभी देशों ने AI में भारी निवेश करने की योजना बनाई है।

मंत्रियों के साथ रियाद पहुंचे हैं ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप के साथ रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऊर्जा सचिव क्रिस राइट और वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक भी आए हैं। ट्रंप सऊदी अरब के बाद कतर और यूएई का दौरा करेंगे। ट्रंप के इस दौरे का उद्देश्य अमेरिका में इन खाड़ी देशों से निवेश लाना है। अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि वह इस यात्रा का उपयोग सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों के साथ आर्थिक समझौते शुरू करने के लिए करना चाहता है।

ऑपरेशन सिंदूर में ‘साइलेंट’ रहकर नेवी ने PAK पर ऐसे बनाया प्रेशर

ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन नेवी ने ‘साइलेंट’ रहकर अपना रोल निभाया और इस तरह निभाया कि पाकिस्तान के पास मौजूद सीमित वॉरशिप भी अपने हार्बर से बाहर नहीं आ पाए। इंडियन नेवी का दबाव इतना ज्यादा था कि पाकिस्तान ने समंदर में कोई हरकत करने की सोची भी नहीं। साथ ही इंडियन नेवी के कैरियर बेटल ग्रुप और दूसरे वॉरशिप ने जिस तरह पेट्रोलिंग की और निगरानी की उससे कई मर्चेंट शिप ने अपना रास्ता बदल लिया और पाकिस्तान के पोर्ट पर जाने से बचने लगे। जिससे पाकिस्तान की इकॉनमी भी हिट होने लगी। 

ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन नेवी ने ‘साइलेंट’ रहकर अपना रोल निभाया और इस तरह निभाया कि पाकिस्तान के पास मौजूद सीमित वॉरशिप भी अपने हार्बर से बाहर नहीं आ पाए। इंडियन नेवी का दबाव इतना ज्यादा था कि पाकिस्तान ने समंदर में कोई हरकत करने की सोची भी नहीं। साथ ही इंडियन नेवी के कैरियर बेटल ग्रुप और दूसरे वॉरशिप ने जिस तरह पेट्रोलिंग की और निगरानी की उससे कई मर्चेंट शिप ने अपना रास्ता बदल लिया और पाकिस्तान के पोर्ट पर जाने से बचने लगे। जिससे पाकिस्तान की इकॉनमी भी हिट होने लगी।

क्यों पाकिस्तान पर था नेवी का भारी दवाब

इंडियन नेवी की तैनाती ने पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया था कि अगर पाकिस्तान ज्यादा तनाव बढ़ाता है यानी स्थिति ज्यादा एस्केलेट होती है तो नेवी के निशाने पर सिर्फ उसके वॉरशिप ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के जमीनी ठिकाने भी हैं। एक तरफ पाकिस्तान की एयरफोर्स और आर्मी को भारत की एयरफोर्स और आर्मी करारा जवाब दे रही थी, वहीं इंडियन नेवी की तरफ से साफ था कि अगर पाकिस्तान बाज नहीं आएगा और इंडियन नेवी ने एक्शन शुरू कर दिया तो पाकिस्तान की एयरफोर्स को दो हिस्सों में बंटकर काम करना होगा, जो पाकिस्तान के लिए बहुत ही खराब स्थिति होती। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान की नेवी के पास कोई एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं है। इसलिए पाकिस्तान नेवी को अपने एयर ऑपरेशन के लिए अपनी एयरफोर्स पर ही निर्भर रहना होता। जबकि इंडियन नेवी का एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत फॉरवर्ड एरिया में लगातार चक्कर लगा रहा था।

इंडियन नेवी के कैरियर बेटल ग्रुप में एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत के साथ ही कई वॉरशिप तैनात कर दी गई। एयरक्राफ्ट कैरियर में फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर दोनों ही होते हैं। मिग-29K फाइटर जेट के साथ रोमियो हेलिकॉप्टर पाकिस्तान की नीदें उड़ा रहा था। एयरक्राफ्ट कैरियर में 30 से ज्यादा एयरक्राफ्ट आ सकते हैं। साथ ही लंबी दूरी की ब्रह्मोस मिसाइल की मौजूदगी ने पाकिस्तान को लगातार दबाव में रखा। नेवी के एयर बॉर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगातार हवा में थे और लगातार लंबी दूरी तक उनकी चौकस नजरें थी। कैरियर बेटल ग्रुप में एयरक्राफ्ट कैरियर के चारों तरफ सबमरीन भी होती हैं, साथ ही 8 से 10 वॉरशिप भी इसका हिस्सा होते हैं।

इंडियन नेवी की क्षमता और नंबर दोनों ज्यादा

नेवी ने वेस्टर्न कोस्ट में एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ कम से कम 7 डिस्ट्रॉयर तैनात किए, इसमें सबसे आधुनिक ड्रिस्ट्रॉयर भी शामिल हैं। साथ ही करीब सात फ्रिगेट भी लगातार पाकिस्तान को दबाव में रख रही थी। डिस्ट्रॉयर में सर्फेस टू सर्फेंस और सर्फेस टू एयर अटैक की क्षमता है। इसमें एंटी सबमरीन कैपिसिटी के साथ दो हेलिकॉप्टर भी कैरी किए जा सकते हैं। इसके अलावा कई फास्ट अटैक क्राफ्ट, मिसाइल बोट भी बड़ी संख्या में तैनाती में थी। जबकि पाकिस्तान की क्षमता देखें तो उसके पास एक भी डिस्ट्रॉयर नहीं है। फ्रिगेट कुछ पुरानी हैं और नई फ्रिगेट सिर्फ चार ही हैं। 3 से 4 सबमरीन ही ऑपरेशनल हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का सीरिया से प्रतिबंध हटाने का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान करते हुए सीरिया पर लगे प्रतिबंधों को हटाने का फैसला लिया है। सऊदी अरब के दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने मंगलवार को ये ऐलान किया है। सीरिया के नए नेतृत्व के साथ अमेरिका के संबंधों को सामान्य करने की दिशा में ये ट्रंप का ये बड़ा कदम है। रियाद में यूएस-सऊदी निवेश मंच पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सीरिया से सैंक्शन हटाने का फैसला सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ चर्चा के बाद लिया है। वह सीरिया के अंतरिम प्रेसीडेंट से मुलाकात भी करने जा रहे हैं। खबर विस्तार से

जो तुर्की बना पाकिस्‍तान का मददगार, अब उसे करेंगे कंगाल

भारत में तुर्की के खिलाफ जबरदस्‍त गुस्‍सा है। इसने हाल में आतंकी पाकिस्‍तान के साथ खड़े होकर अपना असली चेहरा दिखा दिया है। अब भारतीय इस धोखेबाज पर अपनी कमाई की एक फूटी कौड़ी खर्च नहीं करना चाहते हैं। इसका बिगुल बज गया है। पुणे के व्यापारियों ने तुर्की से सेब खरीदना बंद कर दिया है। इसके बजाय वे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ईरान और अन्य क्षेत्रों से सेब खरीद रहे हैं। तुर्की के सेबों का कारोबार आमतौर पर एक सीजन में 1,000 करोड़ से 1,200 करोड़ रुपये तक होता है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर एक लेटर वायरल हुआ है। इसमें तुर्की ने भारतीय पर्यटकों से अपनी यात्रा रद्द न करने की अपील की है। लेकिन, जिस तरह तुर्की ने बेशर्मी के साथ पाकिस्‍तान का साथ दिया, उसके बाद भारत में लोग बहुत नाराज है। वे सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई ट्रैवल एजेंसियों जैसे ईजमाईट्रिप और कॉक्‍स एंड किंग्‍स ने भी तुर्की और अजरबैजान के ट्रैवल पैकेज रद्द कर दिए हैं।

पुणे के व्यापारियों ने तुर्की से सेब न खरीदने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि तुर्की ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किया था। अब ये व्यापारी हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ईरान जैसी जगहों से सेब खरीद रहे हैं। पुणे की एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (APMC) के एक सेब व्यापारी सुयोग जेंडे ने बताया कि तुर्की के सेबों की मांग में भारी कमी आई है।

भारत को नहीं खाने तुर्की के सेब

जेंडे ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, ‘हमने तुर्की से सेब न खरीदने का फैसला किया है और हम हिमाचल, उत्तराखंड, ईरान और अन्य क्षेत्रों से सेब खरीदेंगे। यह फैसला हमारे देशभक्ति के कर्तव्य और देश के समर्थन में है।’ उन्होंने ‘ऑपरेशन दोस्त’ का हवाला देते हुए यह भी कहा, ‘जब तुर्की में भूकंप आया था तो भारत सबसे पहले उनकी मदद करने वाला देश था, लेकिन उसने पाकिस्तान का समर्थन किया।’

यह कदम व्यापक राष्ट्रवादी भावना को दर्शाता है। घरेलू उत्पादों को आयात से ज्‍यादा महत्व देने की बात है। स्थानीय फल व्यापारियों के अनुसार, तुर्की के सेबों की मांग लगभग 50% तक गिर गई है।

चीनी माल की फजीहत का सबसे बड़ा संकेत, ‘मेड इन इंडिया’ का बजा डंका

शेयर बाजार में कुछ अलग ही रंग देखने को मिला। एक तरफ चीन के डिफेंस स्टॉक्स में गिरावट आई तो दूसरी तरफ भारत के डिफेंस स्टॉक्स में उछाल देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मेड इन इंडिया’ डिफेंस उपकरणों पर जोर दिया है। इसके बाद HAL, BDL, BEL और MDL जैसे भारतीय डिफेंस स्टॉक्स में तेजी आई। चीन की बात करें तो चीन स्टेट शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन और झुझोऊ होंगडा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्प लिमिटेड के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, भारत में पीएम मोदी के आत्मनिर्भरता पर जोर देने के बाद डिफेंस स्टॉक्स में दौड़ पड़े। पीएम ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति के बारे में साफ संदेश दिया है। उन्‍होंने कह दिया है कि भारत न्‍यूक्लियर ब्‍लैकमेलिंग बर्दाश्‍त नहीं करेगा। घर में घुसकर मारेगा।

पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने आतंकी ढांचे को ध्‍वस्‍त करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्‍च किया था। इसके तहत पाकिस्‍तान और पाक अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) में पिनपॉइंट टारगेट सेट किए गए थे। भारत ने इसमें 100 फीसदी सफलता हासिल की। इसके बाद पाकिस्‍तान ने जवाबी कार्रवाई की। इसमें चीन के हथियारों के इस्‍तेमाल की बात भी सामने आई है। पाकिस्‍तान के आर्सनल में 80 फीसदी से ज्‍यादा चीनी हथियार हैं। भारत-पाकिस्‍तान संघर्ष में ये पूरी तरह फुस्‍स साबित हुए।

ढेर हो गए चीन के ड‍िफेंस स्‍टॉक

आज चीन के डिफेंस स्टॉक्स में गिरावट से इसका सबूत मिलता है। चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन के शेयर 4% से ज्यादा गिर गए। यह कंपनी मिलिट्री और सिविलियन जहाज बनाती है। मिलिट्री इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने वाली झुझोऊ होंगडा इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्प लिमिटेड के शेयरों में भी 6% से ज्यादा की गिरावट आई। इसी तरह चीनी जेट J-10C और J-17 बनाने वाली कंपनी एविक चेंगदू एयरक्राफ्ट कंपनी लिमिटेड के शेयर 9% तक लुढ़क गए। चाइना एवियोनिक्स सिस्टम्स कंपनी लिमिटेड के शेयरों में 1.91% की गिरावट आई।

पाकिस्तान ज्यादातर डिफेंस उपकरण इम्पोर्ट करता है। इसमें J-10C फाइटर जेट भी शामिल हैं। 2019-2023 के बीच पाकिस्तान के इम्पोर्ट में 82% हिस्सा चीन का था। जबकि 2009-2012 के दौरान यह आंकड़ा 51% था।

भारत में द‍िखा उलटा ट्रेंड

इसके उलट, भारत के डिफेंस स्टॉक्स में आज तेजी देखने को मिली। इसकी वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर जोर देना है। उन्होंने कहा कि हमें मिलिट्री के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपने पहले भाषण में मोदी ने बीते रोज पाकिस्तान को चेतावनी दी कि भारत न्यूक्लियर ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति बताया। उन्होंने कहा कि यह न्याय के लिए भारत का अटल संकल्प है।

बांग्‍लादेश से अचानक क्‍यों भागे पाकिस्‍तान के उच्‍चायुक्‍त

बांग्लादेश में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ अचानक देश छोड़कर चले गए हैं। सैयद मारूफ 11 मई की सुबह ढाका से दुबई होते हुए इस्लामाबाद चले गए। इस बारे में बांग्लादेश सरकार को पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई। उनके बांग्लादेश छोड़ने के दिन ही ढाका स्थित पाकिस्तान उच्चायोग ने औपचारिक रूप से बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय को इस बारे में सूचित किया। मारूफ के अचानक ढाका छोड़कर छुट्टी पर जाने से बांग्लादेश के राजनयिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी दी है। राजनयिक नियमों के हिसाब से जब कोई राजदूत अपने कार्यकाल से छुट्टी लेता है तो विदेश मंत्रालय को छुट्टी की अवधि और उनकी अनुपस्थिति में कौन जिम्मेदारी संभालेगा, इसकी आधिकारिक सूचना दी जाती है। पाकिस्तान उच्चायोग ने मारूफ के जाने के बाद उप उच्चायुक्त मोहम्मद आसिफ को कार्यवाहक उच्चायुक्त के रूप में नियुक्त किया है। उच्चायोग ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिया है कि मारूफ दो सप्ताह बाद लौट सकते हैं।

ढाका में काफी सक्रिय थे मारूफ

सैयद मारूफ ढाका में बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर करने के लिए काफी सक्रियता से काम कर रहे थे। बीते साल अगस्त में शेख हसीना गिरने के बाद से मारूफ मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के चहेते बने हुए थे। वह लगातार यूनुस सरकार के प्रमुख नेताओं के साथ बैठकें कर रहे थे। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश सचिव की यात्रा सहित कई यात्राओं को आयोजित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मारूफ की ढाका में सक्रिय भूमिका और अब वहां से अचानक रवानगी ने कई अटकलों को जन्म दिया है। इसे पाकिस्तान के राजनयिक रुख में बदलाव के संकेत की तरह भी देखा जा रहा है। सैयद अहमद मारूफ ने दिसंबर 2023 में बांग्लादेश में उच्चायुक्त के रूप में पदभार संभाला था। यूनुस सरकार आने के बाद पाकिस्तान ने बांग्लादेश से रिश्ते सुधारने की जो कोशिशें की हैं, उसमें मारूफ का भी अहम रोल रहा है। ऐसे में उनका इस तरह जाने ने ध्यान खींचा है।

Ramswaroop Mantri

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