इंदौर का भागीरथपुरा इस वक्त पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. यहां दूषित पानी की वजह से अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं. इसके पीछे मुख्य वजह ड्रेनेज के पानी का नर्मदा पाइपलाइन में मिलना बताया जा रहा है. पानी की सैंपल रिपोर्ट में भी इसके दूषित होने की पुष्टि हो चुकी है. पानी को लेकर पीड़ितों ने जो बताया वह चौंकाने वाला था.पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुके इंदौर के भगीरथुपरा दूषित पानी कांड की एक और सच्चाई सामने आई है. पीड़ितों ने पानी की जो स्थिति बताई, वो जानने के बाद किसी के भी होश उड़ जाएंगे…
रंग बदलता था पानी
परदेसीपुरा के वर्मा अस्पताल में भर्ती रेखा कार्डिया भी दूषित पानी की वजह से 3 दिन से बीमार हैं. उन्हें उल्टी-दस्त और चक्कर आने की शिकायत हुई. जब पता चला कि इलाके के अन्य लोगों को भी यह समस्या हो रही है तो उन्हें भी तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया. रेखा ने बताया, उनके घर में केवल नर्मदा पाइपलाइन का पानी आता है. जिस पानी को वह शाम को भरकर अपने घर में रखती थीं, वह रात तक पीला पड़ जाता था. सुबह होते खून की तरह सुर्ख लाल हो जाता है. वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं और एक स्कूल में काम करती हैं. पानी के दूषित होने का उन्हें पता नहीं था. बर्तन में से उन्होंने यही पानी पीने और खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से वह बीमार पड़ गईं.
सड़क पर चला रहा खुदाई का काम
पानी के रंग बदलने वाली बात भागीरथपुरा के कई लोगों ने लोकल 18 की टीम को कही. साथ यह भी बताया कि इसकी शिकायत भी वह पार्षद कर चुके थे. अस्पताल में भर्ती नेहा विश्वकर्मा ने बताया, उनके घर में नर्मदा पाइपलाइन का पानी नहीं आता है. वह अपने बोरिंग का ही पानी पीती हैं, लेकिन मोहल्ले की दुकान से इसी पानी से बनी कुछ चीजें उन्होंने खाईं. दुकान पर पानी पिया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. वह बताती हैं कि कुछ हफ्तों से लगातार सड़कों पर खुदाई का काम चल रहा है, जिसकी वजह से ड्रेनेज लाइन फूट गई है और लोगों को गंदे पानी का सामना करना पड़ा.
स्थिति को देखते हुए भागीरथपुरा में पानी की सप्लाई को रोका गया है. वहीं लोगों को सतर्क भी किया जा रहा है. साथ ही क्लोरीन की गोलियां दी जा रही हैं. पीने के पानी के लिए नगर निगम की तरफ से टैंकर मुहैया कराए जा रहे हैं. वहीं, अलग-अलग जगह पर ड्रेनेज लाइन को भी चेक किया जा रहा है, ताकि तत्काल प्रभाव से इस समस्या का समाधान किया जा सके.
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया है. 25 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 के बीच इलाके में उल्टी-दस्त फैल गया, जिसमें 8 लोगों की मौत और 1100 से ज्यादा लोग बीमार होने की जानकारी सामने आई है. 111 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
क्या लोग पहले से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे?
हां. स्थानीय लोग कई महीनों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे. नगर निगम की हेल्पलाइन 311 पर सितंबर महीने में भी शिकायतें दर्ज कराई गई थीं. NEWS 18 के पास इन शिकायतों के प्रमाण मौजूद हैं.
सोशल मीडिया पर इस बारे में क्या कहा जा रहा था?
इलाके के सोशल मीडिया ग्रुपों में कई दिनों से लोग एक-दूसरे को नर्मदा का पानी इस्तेमाल न करने की चेतावनी दे रहे थे. इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया.
क्या जनप्रतिनिधि और अधिकारियों ने शिकायतों पर ध्यान दिया?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और नगर निगम अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण हालात बिगड़ते चले गए.
मौतों का आंकड़ा क्या है?
स्थानीय स्तर पर भागीरथपुरा से 8 मौतों की जानकारी सामने आई है, लेकिन प्रशासन की ओर से फिलहाल सिर्फ 3 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है. इसी को लेकर मौतों के आंकड़ों पर संशय बना हुआ है.
इस घटना ने इंदौर की छवि पर क्या असर डाला है?
देश के सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर पर दूषित पानी से मौतों का दाग लग गया है. साल 2025 जाते-जाते शहर को यह दर्दनाक घटना दे गया.
प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले पर तत्काल संज्ञान लिया. कलेक्टर को जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए.
किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है?
जोन-4 के जोनल प्रभारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को सस्पेंड किया गया है. इसके अलावा प्रभारी PHE उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव को तत्काल सेवा से अलग कर दिया गया है.
क्या इस मामले की जांच होगी?
हां. पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है. यह समिति आईएएस नवजीवन पंवार के निर्देशन में जांच करेगी. समिति में सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय शामिल हैं.
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना को बेहद दुखद बताया. उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और बीमार लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए.
जान जाने के बाद जागे
नगर निगम ने स्थिति को संभालने के लिए मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है. साथ ही पानी के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि पानी किस वजह से दूषित हुआ. एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाके में वैकल्पिक स्वच्छ पानी की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं. इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों की टीमों ने इलाके में हजारों घरों का सर्वे किया है. जिन लोगों में हल्के लक्षण पाए गए, उन्हें मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन स्थानीय लोगों में डर और नाराजगी दोनों है. लोगों का कहना है कि “स्वच्छ शहर” कहलाने वाले इंदौर में इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.





