राजेन्द्र के.गुप्ता
*भ्रष्टाचार की जाँच में जाँच एजेंसी की ये कैसी ईमानदारी, जो सवाल उठा रही है*
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लोकायुक्त के ईमानदार बड़े अधिकारी रिटायर्ड होने के पहले एक आबकारी अफ़सर के यहाँ छापे में मिली सम्पत्ति के अतिरिक्त, लगभग 25 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति को पत्नी की वैधानिक कमाई की सम्पत्ति स्वीकार करके, भ्रष्टाचार के केस में ख़ात्मा साईन कर गए है ! हालाँकि मामला बड़ा होने के कारण माननीय लोकायुक्त महोदय की स्वीकृति में लंबित है ।वही वाणिज्यिक कर मंत्रालय की PS ने आबकारी डीईओ पराक्रम सिंह चन्द्रावत के केस में जारी की अनुमिति में धाराओं का ग़लत उल्लेख कर देने की जानकारी भी सूत्रों से मिल रही है, सुधार के बाद चालान पेश किया जाएगा, *काश भ्रष्टाचार की जाँच व कार्यवाही करने वाले सभी जिम्मेदार अफसरों के द्वारा ऐसे ही ईमानदारी से कर्तव्य निभाया जाए तो भारत से भ्रष्टाचार जल्दी ही समाप्त हो जाएगा * वही दाऊद गैंग से जुड़े फ़रार तस्कर से फरारी में याराना निभाने वाले आबकारी अफ़सर के विरुद्ध भी जाँच में इंदौर डीसी से लोकायुक्त को भेजने के लिए प्रतिवेदन माँगा है, वही एक अन्य केस में विभागीय जाँच में तस्करी की शराब पकड़ कर छोड़ना साबित हो गया है पर कार्रवाही महीनों से आबकारी कमिश्नर के पास वजन से दबी पड़ी है




