राजेन्द्र चतुर्वेदी
55 से 60 हजार रुपए के कपड़े, तीन लाख का चश्मा, साढ़े छह लाख के जूते, सवा लाख का पेन लिया हुआ एक आदमी साढ़े आठ हजार करोड़ के हवाई जहाज से उतरता है।
फिर 40 करोड़ की कार में बैठकर भारी सुरक्षा तामझाम से घिरा हुआ वह आदमी मंच पर पहुंचता है और वहां खड़े होकर चाय बेचने की सच्ची झूठी कहानियां सुनाने लगता है और जनता भावुक हो जाती है।
यही मीडिया की ताकत है तात, जिस ताकत को बढ़ाने के लिए अब भी नाना जतन, नाना धतकरम किए जा रहे हैं।
एक आदमी देश के सबसे ऊंचे निर्वाचित पद पर पहुंच गया है, फिर भी वह पद की गरिमा को तार तार करते हुए एक मंच से कहता है कि कौन है, वह राष्ट्रीय विधवा जो गरीबों का हक मार रही है।
लोगों की समझ में साफ साफ आ जाए, इसलिए वह फिर कहता है, कौन है वह कांग्रेस की विधवा…। ये व्यक्ति उस महिला को राष्ट्रीय विधवा कहता है, कांग्रेस की विधवा कहता है, जिसका पति देश के लिए शहीद हो गया था।
ये व्यक्ति दुनिया के शीर्ष 10 अर्थशास्त्रियों में से एक, उम्र में कम से कम 15 साल बड़े और देश के 10 साल तक प्रधानमंत्री रहे नेता को अपनी वाणी से लोकसभा में अपमानित करता है। और इनकी पार्टी के सांसद मेजें थपथपाते हैं, हंसते हैं।
ये महानुभाव विपक्ष की एक कद्दावर महिला नेता को देश की सर्वोच्च पंचायत यानी लोकसभा में शूर्पणखा कह देते हैं, उनकी हंसी की बहुत फूहड़ तरीके से नकल उतारते हैं और इनकी पार्टी के सांसद शर्मिंदा होने की जगह मेजें थपथपाकर इनके बयान का समर्थन करते हैं।
और जब विपक्ष का एक नेता इन्हें रावण कह देता है तो मंच से खड़े होकर स्यापा करते हैं और जनता भावुक होकर नाक सुड़कने लगती है।
यही मीडिया की ताकत है तात, जिस ताकत को बढ़ाने के लिए अब भी नाना प्रकार के जतन किए जा रहे हैं, नाना प्रकार के धतकरम किए जा रहे हैं।
इस पोस्ट को विस्तार देकर, इसमें सभी घटनाओं को जोड़कर एक अच्छी खासी किताब तैयार की जा सकती है। खैर…।
यह पोस्ट एक मित्र के सवाल का जवाब है।
#राजेन्द्र चतुर्वेदी





