बांग्लादेश की कहानी पिछले डेढ़ साल में किसी डार्क सस्पेंस थ्रिलर फिल्म जैसी रही है. जहां तख्तापलट है, उपद्रव है, नोबेल विजेता की लाचारी है, पूर्व पीएम को फांसी की सजा है और अब युवा नेताओं की सरेआम हत्याएं हैं. एक वक्त इकोनॉमी में भारत को टक्कर देने वाला ‘सोनार बांग्ला’ 16 महीनों में कैसे जलकर खाक हो गया, पढ़िए बांग्लादेश की बर्बादी की स्क्रिप्ट लिखने वाले वो 10 अनकट सीन.

4 अगस्त 2024… बांग्लादेश में छात्रों के पीछे छिपकर कट्टरपंथियों ने ऐसा उपद्रव मचाया कि पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी. कई लोग मौत की नींद सो गए. फिर सेना ने कमान संभाली. लेकिन हालात नहीं बदले. शेख हसीना के नेताओं पर हमले होने लगे. हिन्दुओं को निशाना बनाया गया. यह अराजकता का पहला ट्रेलर था, जिसने बता दिया कि आने वाले दिन कितने खौफनाक होंगे.

5 अगस्त 2024… दोपहर होते-होते उपद्रव चरम पर पहुंच गया. आखिरकार शेख हसीना को अपना प्यार मुल्क छोड़कर भागना पड़ा. जो तस्वीरें आईं, वो डरा देने वाली थीं. कैसे उपद्रवी शेख हसीना के घर में घुस गए, सामान लूट ले गए. यहां तक कि बांग्लादेश के राष्ट्रपिता की प्रतिमा गिरा दी गई.

7 अगस्त 2024… तमाम हिन्दू परिवारों के घरों में आग लगा दी गई. उनके परिवार पर हमले किए गए. कई लोगों की मौत हो गई. वे लोग गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई बचाने नहीं आया. बाद में सभी हिन्दुओं को खुद अपनी रक्षा के लिए उतरना पड़ा और एक दिन ढाका की सड़कें हिन्दुओं की भीड़ से पट गईं.

8 अगस्त 2024… एक ओर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डॉ. मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के चीफ के तौर पर शपथ ले रहे थे, दूसरी ओर देश में बदले की राजनीति शुरू हो गई. अवामी लीग के नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया, जेलें भरी जाने लगीं और पुलिस पर भी हमले हुए. नतीजा पुलिस का भी मनोबल टूट गया. उन्होंने हथियार डाल दिए.

नवंबर 2024… शांति की अपीलें धरी रह गईं जब इस्कॉन (ISKCON) से जुड़े चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार किया गया. यह हिन्दुओं पर सबसे बड़े हमलों में से एक था. इसके बाद हुए बवाल में चटगांव में वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की निर्मम हत्या कर दी गई. इसने बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष छवि को पूरी तरह तार-तार कर दिया. इसके बाद से लगातार हमले जारी रहे.

जून 2025… सैकड़ों की संख्या में बांग्लादेशी पश्चिम बंगाल में भारत की सीमा पर आ धमके. घुसने की कोशिश की. लेकिन भारत के लोग लाठी डंडे लेकर अड़ गए. उन्हें खदेड़कर ही दम लिया. तब से अब तक बॉर्डर पर छोटी मोटी झड़पें लगातार हो रही हैं. हालांकि, अब भारत सरकार ने सुरक्षाबलों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया है. नतीजा थोड़ी शांति है.

17 नवंबर 2025… यह वो मोड़ था जिसने आग में घी डाल दिया. बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को उनकी गैरहाजिरी में मौत की सजा सुना दी. उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहरा दिया. इस फैसले ने देश को दो हिस्सों में बांट दिया, एक जो जश्न मना रहा था और दूसरा जो डरा हुआ था.

12-18 दिसंबर 2025…. हिंसा का नया दौर शुरू हुआ. इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी को गोली मार दी गई. 18 दिसंबर को उनकी मौत के बाद ढाका जल उठा. यह हत्या साबित कर गई कि बांग्लादेश में अब कानून का नहीं, बल्कि ‘बंदूक’ का राज है.

22 दिसंबर 2025… चटगांव जिले में हिंदू परिवारों के घर में आगजनी हो गई. पश्चिम सुल्तानपुर गांव में तड़के 3.45 बजे दो हिंदू परिवारों के घरों में आग लगा दी गई. कहा जा रहा है कि हमलावरों ने घरों के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए थे, जिससे कोई घर से बाहर न निकल पाए. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों घर में कुल सात कमरे थे, जो जलकर खाक हो गए.

24 दिसंबर 2025… आज देश में कर्फ्यू जैसे हालात हैं. हादी की हत्या के विरोध में आगजनी जारी है. इसी बीच, 17 साल से लंदन में बैठे तारिक रहमान की वतन वापसी की खबर ने सस्पेंस बढ़ा दिया है. 16 महीने पहले जहां से कहानी शुरू हुई थी, आज बांग्लादेश वहीं खड़ा है बस किरदार बदल गए हैं, खून अब भी बह रहा है.





