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*ब्रिटेन में भारतीय मूल के तीन को जेल,भीषण ठंड से कांपा उत्तर भारत; जल रहा बांग्लादेश; 16 एपस्टीन फाइलें वेबसाइट से गायब*

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ब्रिटेन भागे खोसला के खिलाफ जल्द ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी होगा; इंडिगो इसी माह से शुरू करेगी मुआवजा देना

गोवा पुलिस ने गोवा नाइटक्लब आग मामले में ब्रिटिश नागरिक सुरिंदर कुमार खोसला के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नाइट क्लब में छह दिसंबर को लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हो गई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।अधिकारी ने कहा, हमने उसे ब्रिटेन से वापस लाने के लिए ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। अधिकारी ने बताया कि आग हादसे के वक्त खोसला गोवा में मौजूद था, लेकिन इसके अगले ही दिन संभवतः सात दिसंबर को वह ब्रिटेन भाग गया। पुलिस के मुताबिक, खोसला अरपोरा में बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के मालिकों में से एक है। 

इंडिगो इसी माह से देना शुरू करेगी 10,000 का मुआवजा
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के निर्देश के बाद इंडिगो इस महीने की शुरुआत में बड़े पैमाने पर हुई उड़ान व्यवधानों से प्रभावित यात्रियों को 26 दिसंबर से मुआवजा देना शुरू करेगी। शुक्रवार को सरकार ने एयरलाइन को 3, 4 और 5 दिसंबर को हजारों उड़ानें रद्द या विलंबित होने के दौरान प्रभावित यात्रियों के लिए तत्काल मुआवजा प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।

सूत्रों के अनुसार, इस निर्देश के बाद इंडिगो उन दिनों कई घंटों तक हवाई अड्डों पर फंसे रहे और अत्यधिक प्रभावित ग्राहकों को 10,000 रुपये के यात्रा वाउचर जारी करेगी। इसके अलावा, सरकारी मानदंडों के अनुसार 5,000 रुपये से 10,000 रुपये तक का अतिरिक्त मुआवजा भी दिया जाएगा। नागरिक उड्डयन सचिव समीर सिन्हा ने एक समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश जारी किया। समयसीमा स्पष्ट करते हुए एक अधिकारी ने बताया, इंडिगो की वेबसाइट से सीधे टिकट बुक करने वाले यात्रियों को एक सप्ताह के भीतर मुआवजा देना शुरू कर दिया जाएगा। 

सोना तस्करी : रान्या की नजरबंदी में दखल नहीं देगा कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोने की तस्करी मामले में कन्नड़ अदाकारा रान्या राव की विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम (कोफेपोसा) कानून के तहत नजरबंदी में दखल देने से इन्कार कर दिया है। जस्टिस अनु सिवरमन और विजयकुमार ए पाटिल की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को यह आदेश दिया। इस आदेश में अदालत ने राव की मां एचपी रोहिणी की दायर याचिका को खारिज कर दिया। इसमें उन्होंने बेटी के खिलाफ कोफेपोसा के तहत पारित हिरासत आदेश की वैधता पर सवाल उठाया था।

राव को तीन मार्च 2025 को बंगलूरू के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने आरोप है कि राव के पास से 12.56 करोड़ रुपये की कीमत का 14.2 किलो सोना बरामद किया गया। डीआरआई के मुताबिक, राव ने बेल्ट और जैकेट में सोना छिपाकर सीमा शुल्क जांच से बचने की कोशिश की। राव के घर की तलाशी में 2.06 करोड़ रुपये के गहने और 2.67 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए। इससे इस मामले में जब्त की गई कुल संपत्ति का मूल्य 17.29 करोड़ रुपये हो गया।

गगनयान मिशन के लिए ड्रोग पैराशूट का परीक्षण सफल
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए बड़ी सफलता मिली है। इसरो ने बताया कि गगनयान क्रू मॉड्यूल के लिए तैयार किए जा रहे ड्रोग पैराशूट के क्वालिफिकेशन टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं।

परीक्षण 18 और 19 दिसंबर को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (टीबीआरएल) के रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (आरटीआरएस) फैसिलिटी में किए गए। इसरो के अनुसार, गगनयान क्रू मॉड्यूल के डिसेलरेशन सिस्टम में कुल 10 पैराशूट होते हैं, जो चार अलग-अलग प्रकार के हैं। मॉड्यूल के उतरने की प्रक्रिया की शुरुआत दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट के अलग होने से होती है, जिससे पैराशूट कंपार्टमेंट का सुरक्षात्मक कवर हट जाता है। इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट खुलते हैं, जो क्रू मॉड्यूल को स्थिर करते हैं और उसकी गति कम करते हैं।

खेल मंत्री के रवैये से नाखुश थे मेसी, इसलिए तय समय से पहले लौटे
कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में 13 दिसंबर को आयोजित फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के मुख्य आयोजक और गिरफ्तार आरोपी सतद्रु दत्ता ने जांच अधिकारियों को बताया है कि कार्यक्रम के दौरान बार-बार छुए जाने और गले लगाए जाने से मेसी असहज और नाखुश थे। इसी कारण वह तय कार्यक्रम के अनुसार पूरा समय रुकने के बजाय पहले ही लौट गए।

विशेष जांच दल (एसआईटी) अधिकारियों की लंबी पूछताछ में दत्ता ने कहा कि मेसी को पीठ पर हाथ रखने या गले लगाने जैसी हरकतें पसंद नहीं थीं और विदेशी सुरक्षा अधिकारियों ने इस बारे में पहले ही आयोजकों को आगाह किया था। दत्ता के अनुसार, भीड़ को संयम बरतने की बार-बार घोषणाओं के बावजूद हालात नहीं संभले और जिस तरह मेसी को चारों ओर से घेरकर छुआ गया, वह विश्व कप विजेता खिलाड़ी को स्वीकार्य नहीं था। पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास मेसी के काफी करीब नजर आए। तस्वीरों में उन्हें मेसी की कमर पर हाथ रखकर फोटो खिंचवाते देखा गया। आरोप है कि रिश्तेदारों को बिस्वास ने प्रभाव का इस्तेमाल कर मेसी तक पहुंच दिलाई।

मोटापा घटाने वाली दवाओं का इस्तेमाल ध्यान से करें
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने मोटापा कम करने वाली दवाओं के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि ऐसी दवाओं का उपयोग बेहद विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। प्रसिद्ध मधुमेह विशेषज्ञ होने के नाते उन्होंने स्पष्ट किया कि मोटापा केवल जीवनशैली या कॉस्मेटिक समस्या नहीं है, बल्कि जटिल व पुरानी बीमारी है।

एशिया ओशिनिया कॉन्फ्रेंस ऑन ओबेसिटी के उद्घाटन सत्र में जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में गैर-संचारी रोगों के कारण होने वाली 63% मौतों का सीधा संबंध मोटापे से है। उन्होंने मोटापे के प्रबंधन में बढ़ते व्यवसायीकरण और भ्रामक जानकारी के खिलाफ चेतावनी दी। मंत्री ने कहा कि बिना वैज्ञानिक आधार वाले दावे और त्वरित समाधान लोगों को गुमराह करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि दशकों पहले रिफाइंड तेल के व्यापक प्रचार के भी गंभीर स्वास्थ्य परिणाम सामने आए थे। उनके अनुसार इस सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए पूरे समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे।

आईएनएस सिंधुघोष की 40 वर्षों के बाद नौसेना से विदाई
भारतीय नौसेना की शक्तिशाली सिंधुघोष श्रेणी की पहली पनडुब्बी आईएनएस सिंधुघोष को 40 वर्षों की शानदार राष्ट्र सेवा के बाद डीकमीशन कर दिया गया है। पश्चिमी नौसेना कमान ने शनिवार को इसकी जानकारी साझा की। पनडुब्बी को विदा करने का आधिकारिक समारोह 19 दिसंबर की शाम मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आयोजित किया गया। 

पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। समारोह में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल वीएस शेखावत सहित कई दिग्गज अधिकारी और पूर्व कमांडिंग ऑफिसर भी मौजूद रहे। लेफ्टिनेंट कमांडर रजत शर्मा की कमान में पनडुब्बी को पे ऑफ किया गया। भारतीय जलक्षेत्र की सुरक्षा में चार दशकों तक इस पनडुब्बी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नौसेना ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस ऐतिहासिक विदाई समारोह की तस्वीरें भी साझा की हैं।

पूरा उत्तर भारत भीषण ठंड की चपेट में है। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक सर्द हवाएं

पूरा उत्तर भारत भीषण ठंड की चपेट में है। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक शनिवार को सर्द हवाएं कंपकंपी छुड़ाती रहीं। सुबह और रात के समय घने कोहरे के चलते मुश्किलें बढ़ गई हैं। दृश्यता कम होने से सड़क, रेल और हवाई यातायात बुरी तरह बाधित रहा। केवल दिल्ली में ही 129 उड़ानें रद्द हुईं। जम्मू-कश्मीर समेत पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ बर्फबारी के आसार हैं, जिससे मैदानों में ठंड बढ़ना तय है।

दिल्ली-एनसीआर में लोगों को घने कोहरे के साथ जहरीली धुंध का सामना करना पड़ रहा है। वायु प्रदूषण बदहाल स्थिति में है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार शाम चार बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 398 रहा, जो बहुत खराब श्रेणी में है। एनसीआर में भी स्थिति खराब रही। नोएडा सबसे प्रदूषित रहा और यहां एक्यूआई 401 था, जो गंभीर श्रेणी में है। गुरुग्राम में एक्यूआई 362, गाजियाबाद में 361 और ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 344 दर्ज किया गया। दिल्ली में कुछ इलाकों में चिंताजनक रूप से एक्यूआई गंभीर श्रेणी में बना हुआ है और सराय काले खां में यह 428, अक्षरधाम में 420 और राव तुला राम मार्ग पर 403 दर्ज किया गया।

उड़ानें प्रभावित, वाहनों की थमी रफ्तार : घने कोहरे के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धम गई। दिन भर धूप नहीं निकलने और दृश्यता कम होने की वजह से वाहन रेंगते नजर आए। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर घने कोहरे और धुंध के कारण रद्द हुईं 129 उड़ानों में 63 प्रस्थान और 66 आगमन वाली थीं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय, हवाई अड्डा प्राधिकरण और विभिन्न एयरलाइनों ने मौसम की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यात्रियों के लिए सलाह जारी की है और उन्हें अपनी उड़ानों की सही स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही घर से निकलने को कहा गया है।

राजधानी में आज सर्दी का ऑरेंज अलर्ट, कोहरा भी रहेगा
राजधानी में कड़ाके की ठंड के साथ कोहरा भी कहर बरपा रहा है। मौसम विभाग ने ठंड का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।  बादल छाए रहने और धुंध की वजह से चटख धूप भी नहीं निकल रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, ऐसी स्थितियां, 22 दिसंबर तक बरकरार रह सकती हैं। सोमवार को कोहरा रहने के आसार हैं। इसे लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

गाजियाबाद में दृश्यता शून्य: मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी बहुत घने कोहरे और ठंड की स्थिति के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। शनिवार को गाजियाबाद, कानपुर, आगरा व प्रयागराज समेत कई शहरों में दृश्यता शून्य रही। बरेली, झांसी समेत कई जगहों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम रह गई।

कश्मीर में आज से चिल्लेकलां
कश्मीर में 40 दिन कड़ाके की ठंड का चिल्लेकलां रविवार से शुरू हो रहा है। शनिवार को श्रीनगर में पारा शून्य से नीचे रहा।

हिमाचल-कश्मीर में पारा गिरा, बर्फबारी के संकेत
हिमाचल प्रदेश, कश्मीर घाटी और लद्दाख में पिछले 24 घंटों के दौरान तापमान में गिरावट आई है। अगले 24 घंटे के दौरान बारिश और भारी बर्फबारी के आसार हैं। हिमाचल में मौसम शुष्क रहा और 10 शहरों में तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। 21 दिसंबर को राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की संभावना है। चंबा और लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले इलाकों में भी हल्का हिमपात हो सकता है।

जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और आसपास के पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में अगले चार दिनों तक बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। रविवार को कश्मीर, लद्दाख के कुछ हिस्सों में भारी बर्फबारी हो सकती है।

इंडिगो ने जारी की एडवाइजरी
इंडिगो ने शनिवार को एक यात्रा एडवाइजरी जारी की। एयरलाइन ने यात्रियों को आगाह किया कि रविवार को दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में सुबह के समय घना कोहरा रहने की संभावना है, जिससे उड़ानों पर असर पड़ सकता है। एयरलाइन ने कहा कि कम दृश्यता के कारण उड़ानों में देरी या समय-सारिणी में बदलाव हो सकता है।

जारी बयान में इंडिगो ने बताया कि उसकी ऑपरेशन टीमें पूरी तरह सतर्क रहेंगी और मौसम की स्थिति पर हर मिनट नजर रखी जाएगी, ताकि यात्रियों को होने वाली असुविधा कम से कम हो। मौसमी कारणों से होने वाली दिक्कतों को स्वीकार करते हुए एयरलाइन ने यात्रियों के धैर्य के लिए आभार जताया। एडवाइजरी में कहा गया है कि सुबह के समय कोहरे के कारण दिल्ली और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में दृश्यता अचानक कम हो सकती है, जिसका सीधा असर उड़ान संचालन पर पड़ेगा। इंडिगो ने दोहराया कि सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी उड़ान की ताजा स्थिति जांच लें। जिन यात्रियों की उड़ानें प्रभावित होंगी, वे एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट के जरिये टिकट फिर से बुक कर सकते हैं या रिफंड का अनुरोध कर सकते हैं।

अरावली के अस्तित्व पर संकट: दिल्ली के अदृश्य प्रहरी की सुरक्षा में सेंध

दिल्ली-एनसीआर में रोजमर्रा की जिंदगी की भागदौड़ में हम अक्सर उस अदृश्य प्रहरी को नजरअंदाज कर रहे हैं जो हमें सुरक्षित रखता है। यह कोई और नहीं आरावली की पहाड़ियां हैं जो सिर्फ भूगोल नहीं बल्कि हमारे जीवन के कई पहलुओं को संतुलित करने वाली प्रकृति की शक्ति है। तपते थार रेगिस्तान से आती गर्म और धूलभरी हवाओं को रोककर ये हमारी राजधानी को राहत पहुंचाती हैं। बारिश का पानी सोखकर भूजल का स्तर बनाए रखती हैं और सबसे महत्वपूर्ण, अपनी हरियाली से ये प्रदूषण को अवशोषित करती हैं। अगर ये पहाड़ियां न हों तो आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि राजधानी का एक्यूआई किस स्तर तक जा सकता है।

अरावली के भविष्य पर 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संकट गहरा गया है। इस फैसले से आरावली का 91.3 फीसदी पहाड़ी क्षेत्र कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर हो सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल भौगोलिक सीमा का बदलाव नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण, जल संकट और मरुस्थलीकरण की ओर धकेलने वाला कदम साबित हो सकता है। ऐसे में अरावली का विनाश सीधे तौर पर करोड़ों लोगों की सेहत और भविष्य से जुड़ा मुद्दा बन गया है।

पर्यावरण विशेषज्ञ संजय मिश्रा ने बताया कि अरावली के बिना थार की रेत दिल्ली तक पहुंच जाएगी, जिससे पहले से खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) और गिरेगा। पहले ही कई ब्रेकेज हो चुके हैं, जहां से धूल दिल्ली में प्रवेश कर रही है। एक हेक्टेयर अरावली सालाना 20 लाख लीटर पानी रिचार्ज करती है। ऐसे में इसका विनाश दिल्ली-एनसीआर के जल संकट को और गहरा करेगा। उन्होंने दावा किया कि नए नियम से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियां असुरक्षित हो जाएंगी, जिससे निर्माण सामग्री के लिए और खनन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर पूरी शृंखला को संरक्षित नहीं किया गया तो दिल्ली-एनसीआर की जलवायु और स्वास्थ्य पर स्थायी क्षति होगी। यह सिर्फ पर्यावरण का संकट नहीं, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी का सवाल है।

दिल्ली की ग्रीन शील्ड
अरावली पर्वतमाला गुजरात से दिल्ली तक 692 किलोमीटर लंबी है, जो राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरती है। यह दक्षिण-पश्चिम मानसून को प्रभावित करती है, पूर्वी राजस्थान में वर्षा लाती है और पश्चिम से थार मरुस्थल के रेत-धूल के फैलाव को रोकती है। इसके तीन भाग हैं। 450 मीटर तक फैली दक्षिणी अरावली, 500-700 मीटर तक मध्य अरावली और दिल्ली के आसपास कम ऊंचाई वाली उत्तरी अरावली हैं। यहां रणथंबौर और सरिस्का जैसे टाइगर रिजर्व हैं जो जैव विविधता के हॉटस्पॉट हैं। अरावली दिल्ली-एनसीआर के लिए प्राकृतिक ग्रीन शील्ड का काम करती है, जो पीएम 2.5 कणों को अवशोषित करती है और धूल भरी आंधियों को रोकती है।

राजधानी की जैव विविधता का आधार
अरावली का दिल्ली में उत्तरी विस्तार दिल्ली रिज के रूप में जाना जाता है, जिसे राजधानी के ग्रीन लंग्स भी कहा जाता है। दिल्ली में अरावली की शुरुआत दक्षिण दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र से मानी जाती है, जहां असोला-भट्टी वन्यजीव अभयारण्य और भट्टी माइन्स स्थित हैं। यहां से यह उत्तर-पश्चिम दिशा में फैलते हुए वसंत कुंज, वसंत विहार, जेएनयू और महरौली क्षेत्र से गुजरती है। इसके बाद यह सेंट्रल रिज के रूप में धौला कुआं से सदर बाजार तक जाती है और अंत में नॉर्दर्न रिज के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय क्षेत्र को पार करते हुए यमुना नदी के पश्चिमी किनारे वजीराबाद के पास समाप्त होती है। दिल्ली में दिल्ली रिज की कुल लंबाई करीब 35 किलोमीटर है और इसका क्षेत्रफल करीब 8,000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। क्वार्टजाइट चट्टानों से बनी यह पर्वत शृंखला दिल्ली की जैव विविधता का महत्वपूर्ण आधार है और इसे पर्यावरण मंत्रालय, दिल्ली सरकार और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इको-सेंसिटिव जोन के रूप में संरक्षित माना गया है।

क्यों खतरनाक है नई परिभाषा?
सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर, 2025 को पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिश स्वीकार कर अरावली की नई परिभाषा तय की है। ऐसे में अब केवल वे भूमिरूप अरावली माने जाएंगे, जो आसपास की जमीन से 100 मीटर या अधिक ऊंचे हों। इसे समुद्र तल से नहीं माना जाएगा। दो पहाड़ियां 500 मीटर के दायरे में हों तो रेंज मानी जाएगी। पहले फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) 3 डिग्री ढलान के आधार पर परिभाषा तय करता था। पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार, खनन कार्य के लिए कथित सिस्टम की मिलीभगत से 100 मीटर या उससे ऊंची पहाड़ियों को भी 60 मीटर या 80 मीटर दिखाकर सरकार से अनुमति ले लेते हैं। उसके लिए ये पहाड़ी नापने के लिए अल्टीमीटर का सहारा लेते हैं, जबकि कई मौकों पर सरकार कह चुकी है कि पहाड़ की ऊंचाई अल्टीमीटर से नहीं नापी जा सकती है।

12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 ही 100 मीटर से ऊपर
एफएसआई की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के 15 जिलों में 20 मीटर से ऊंची 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 (8.7 फीसदी) ही 100 मीटर से ऊंची हैं। इससे 90 फीसदी से अधिक क्षेत्र संरक्षण से बाहर हो जाएगा और इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन और निर्माण की आशंका बढ़ जाएगी। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने चारों राज्यों में खनन पर रोक लगाई थी और समिति गठित की। अब कोर्ट ने नई खनन लीज पर रोक लगाई है, लेकिन मौजूदा परियोजनाओं और सस्टेनेबल माइनिंग की योजना बनाने का निर्देश दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिभाषा खनन माफिया और निर्माण कंपनियों को फायदा पहुंचाएगी, क्योंकि अरावली में तांबा, जस्ता, मार्बल जैसे खनिज प्रचुर हैं। इससे दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा जैसे शहरों में निर्माण सामग्री तो सस्ती मिलेगी, लेकिन पर्यावरणीय क्षति अपूरणीय होगी।

सेव अरावली अभियान सोशल मीडिया पर वायरल
सोशल मीडिया पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर सेव द अरावली के नाम से मुहिम चलाते हुए सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। यूजर्स ने अरावली को लेकर प्रस्तावित नई परिभाषा पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अरावली को केवल ऊंचाई या तकनीकी मापदंडों से नहीं, बल्कि उसके पर्यावरणीय महत्व के आधार पर देखा जाना चाहिए। कई यूजर्स ने #सेवअरावली अभियान के समर्थन में अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल तस्वीर भी बदली और इसे नई परिभाषा के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया।

लगभग 2.5 अरब से 541 मिलियन वर्ष पूर्व में बनी अरावली
अरावली पर्वत श्रृंखला दुनिया की सबसे प्राचीन फोल्ड माउंटेन रेंज में से एक है, जो मुख्य रूप से प्रोटेरोजोइक युग लगभग 2.5 अरब से 541 मिलियन वर्ष पूर्व में बनी। इसका निर्माण टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराव और ओरोजेनी (पर्वत निर्माण) प्रक्रियाओं से हुआ। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) और अन्य वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, यह भारतीय शील्ड का हिस्सा है, जो प्राचीन क्रेटॉन्स के टकराव से बना है। वहीं, लगभग 1.0-1.5 अरब साल पहले दिल्ली में मेसोप्रोटेरोजोइक युग के दौरान नया बेसिन बना, जिसमें दिल्ली सुपरग्रुप की चट्टानें जमा हुईं। इसके बाद पश्चिम में स्थित मारवार क्रेटॉन से टकराव हुआ, जिससे उत्तरी अरावली यानी दिल्ली रिज का निर्माण हुआ। इस चरण में समुद्र की परत यानी ओफियोलाइट भी शामिल हुई, जो उस समय समुद्री क्रस्ट के अवशेष थे।

अरावली पर्वत श्रृंखला का धार्मिक और पौराणिक इतिहास
राजस्थान पर्यटन विभाग, पुरातत्व सर्वेक्षण और शैक्षणिक अध्ययन के अनुसार, अरावली पर्वत श्रृंखला मुख्य रूप से भूवैज्ञानिक महत्व की है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी यह समृद्ध है। यहां कई प्राचीन मंदिर, तीर्थस्थल और पवित्र वन (सेक्रेड ग्रोव्स) हैं, जो हिंदू, जैन और आदिवासी परंपराओं से जुड़े हैं। पौराणिक रूप से इसका सीधा उल्लेख प्रमुख ग्रंथों जैसे वेद या महाभारत में कम है, लेकिन कुछ मान्यताओं में रामायण से हनुमान की यात्रा का जुड़ाव बताया जाता है।

अरावली का आस्थागत पक्ष

  • दिलवाड़ा जैन मंदिर (माउंट आबू, राजस्थान)
  • चलेश्वर महादेव मंदिर (माउंट आबू)
  • अंबाजी मंदिर (गुजरात)

न्याय विभाग की वेबसाइट से गायब हुईं जेफरी एपस्टीन से जुड़ी 16 फाइल, ट्रंप की फोटो समेत अहम दस्तावेज शामिल

अमेरिका के न्याय विभाग (डीओजे) की वेबसाइट से जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों की 16 फाइल गायब हो गई हैं। इनमें एक फोटो भी शामिल है, जिसमें कथित तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नजर आ रहे हैं। ये फाइल वेबसाइट पर अपलोड करने के बाद एक दिन से भी कम समय में गायब हो गईं। सरकार ने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है और जनता को कोई सूचना भी नहीं दी गई है। 

गायब हुए दस्तावेजों में निर्वस्त्र महिलाओं की पेंटिंग की तस्वीरें और एक फोटो शामिल थी, जिसमें ट्रंप, एपस्टीन, मेलानिया ट्रंप और एपस्टीन की सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल के साथ नजर आ रहे थे। वह फोटो ऐसे चित्रों के समूह में शामिल थी, जो फर्नीचर और दराज में रखे गए थे। 

न्याय विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन फाइल को जानबूझकर हटाया गया है या नहीं। विभाग ने सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी है और एक प्रवक्ता ने सवालों के जवाब नहीं दिए। इन फाइल के गायब होने से सोशल मीडिया पर अटकलें तेज हो गई हैं कि आखिर क्या दस्तावेज हटाया गया और क्यों। इस घटना ने एपस्टीन और उनके संपर्क में रहे प्रमुख लोगों के प्रति जनता की जिज्ञासा को और बढ़ा दिया है।

संसद की निगरानी समिति के डेमोक्रेट सदस्यों ने ट्रंप की तस्वीर गायब होने को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया और पूछा- और क्या-क्या छिपाया जा रहा है? अमेरिकी जनता के लिए पारदर्शिता जरूरी है। 

इस घटना ने न्याय विभाग की ओर से पहले जारी किए गए दस्तावेजों से पहले उठी चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है। हाल ही में लागू कानून के तहत एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए गए थे। लेकिन इन दस्तावेजों में उनके उन अपराधों या अंदरूनी फैसलों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई थी, जिनकी वजह से वह वर्षों तक गंभीर मामलों से बचते रहे। 

सबसे ज्यादा प्रतीक्षीत दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिनमें एफबीआई के पीड़ितों के इंटरव्यू और अधिकारियों के मुकदमों के निर्णयों की आंतरिक टिप्पणियां शामिल थीं। इससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उस समय एपस्टीन के खिलाफ संघीय मामले में कौन से निर्णय क्यों लिए गए और किन आधारों पर उन्हें मामूली अपराध स्वीकार करने की अनुमति दी गई।

ब्रिटेन के पूर्व राजकुमार एंड्रयू जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं, लेकिन उनके बारे में थोड़ी ही जानकारी दी गई है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि किन लोगों की सही में जांच हुई और किनकी नहीं। नई जानकारी में कुछ पहले नहीं देखे गए तथ्य भी थे, जैसे 1996 की शिकायत जिसमें एपस्टीन पर बच्चों की तस्वीरें चुराने का आरोप था और यह भी कि 2000 के दशक में न्याय विभाग संघीय मुकदमे से पीछे हट गया। हालांकि, ज्यादातर सामग्री में एपस्टीन के न्यूयॉर्क और यूएस वर्जिन आइलैंड्स स्थित घरों की तस्वीरें थीं, साथ ही कुछ प्रसिद्ध लोग और राजनेताओं की तस्वीरें भी शामिल थीं।

कफ सिरप केस: ढाई महीने में 42 फर्मों पर प्राथमिकी, महज 12 का निरस्त हुआ लाइसेंस

कोडीनयुक्त कफ सिरप की जालसाजी की जांच अक्तूबर से चल रही है। ढाई माह में जितनी तेजी से फर्मों की जांच की गई, अब उन पर कार्रवाई की रफ्तार धीमी हो गई है। ड्रग विभाग की ओर से एक के बाद एक 42 फर्मों पर प्राथमिकी तो दर्ज करवा दी गई है लेकिन अब तक केवल 12 का लाइसेंस निरस्त किया जा सका है। इस तरह की स्थिति तब है जब जालसाजी की पुष्टि भी हो चुकी है।

कफ सिरप की खरीद-बिक्री की जालसाजी के इस खेल में वाराणसी के साथ ही गोरखपुर, प्रयागराज से लेकर पूर्वांचल के जिलों के लोग शामिल हैं। वाराणसी में सबसे अधिक कफ सिरप रांची, झारखंड से मंगाए गए। हैरानी की बात यह है कि केवल कागज पर ही फर्म बनाकर कफ सिरप की आपूर्ति कर दी गई। हां बेचा गया, इसका कोई प्रमाण जांच में नहीं मिला।

पुलिस ने की कार्रवाई

स्थानीय स्तर पर जांच को लेकर किस तरह की गंभीरता बरती जा रही थी उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद लखनऊ से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त रौशन जैकब को वाराणसी तक आना पड़ा। नवंबर के अखिरी सप्ताह में एडिशनल कमिश्नर रेखा एस चौहान को भी जालसाजी करने वाली फर्मों को खोजने निकलना पड़ा।

रौशन जैकब के निर्देशन में टीम ने 28 फर्मों में जालसाजी का खुलासा एक ही दिन किया था। इसके बाद जांच की रफ्तार धीमी हो गई। कागज पर भले ही स्थानीय स्तर पर अधिकारी कार्रवाई कड़ी होने का दावा कर रहे हैं लेकिन अभी भी प्राथमिकी दर्ज होने वाले 30 फर्मों का लाइसेंस निरस्तीकरण न किए जाने से कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। इन फर्मों का लाइसेंस निरस्त कब होगा, इस पर अधिकारी भी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों की तुलना में 15 गुना महंगी खरीदी गईं होम्योपैथिक दवाएं, ऐसे उजागर हुईं अनियमितताएं

उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों की तुलना में 15 गुना तक महंगी होम्योपैथिक दवाओं की सरकारी खरीद की गई। प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), उत्तराखंड और ओडिशा में होम्योपैथिक दवाओं की खरीद से जुड़े जेम टेंडर के दस्तावेज की पड़ताल में ही दवा के दामों में कई गुना तक का अंतर सामने आया है। 

प्रयागराज के प्रिंसिपल, शहीद राजा हरि प्रसाद मल राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी द्वारा 18 और 19 दिसंबर को जेम पोर्टल पर जारी की गई 67 दवाओं की बिड पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इनमें कुछ मदों में प्रयागराज की दरें ओडिशा व उत्तराखंड के मुकाबले कई गुना अधिक हैं, जबकि दवाओं की स्ट्रेंथ और डाइल्यूशन समान है। उद्यमियों का कहना है कि यदि दवाएं एक ही श्रेणी और गुणवत्ता की हैं तो राज्यों के बीच इतना बड़ा अंतर तर्कसंगत नहीं है।

टेंडर की शर्तें सवालों के घेरे में 
होम्योपैथिक ड्रन मैन्युफैक्चरर्स एसो. का आरोप है कि दोनों ही संस्थानों ने प्री-बिड मीटिंग को अनिवार्य कर दिया है, स्पष्ट किया गया है कि जो इसमें शामिल नहीं होगा, उसे बिड प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस शर्त का इस्तेमाल अक्सर पहले से तय या पसंदीदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं, टेंडर में ब्रांड नेम से दवाएं मांगी गई हैं जबकि केंद्र और राज्य सरकार की जरूरी इग लिस्ट में ऐसा नहीं है।

अंतर से संदेह
देश में दवाओं की कीमतें आमतौर पर एक जैसी होती हैं, अधिकतम 8–10 प्रतिशत का अंतर स्वाभाविक माना जाता है। लेकिन प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), उत्तराखंड और उड़ीसा में होम्योपैथिक दवाओं की खरीद से जुड़े जेम टेंडर के दस्तावेज में एक ही दवा के दामों में कई गुना तक का अंतर सामने आया है। यह अंतर न सिर्फ आर्थिक रूप से चौंकाने वाला है, बल्कि ड्रग मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी छोटी और एमएसएमई इकाइयों के साथ हो रहे कथित भेदभाव की ओर भी इशारा करता है।

विधायक तुकाराम काटे 2009 के मामले में बरी; भीड़ के चलते लिफ्ट में प्रवेश नहीं कर पाए एकनाथ शिंदे

मुंबई की एक अदालत ने विधायक तुकाराम काटे, उनकी पत्नी मंगला काटे और 12 अन्य को 2009 में बीएमसी मुख्यालय में हुई झड़प और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में बरी कर दिया।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने 18 दिसंबर को सुनाए गए फैसले में सभी 14 आरोपियों को सबूतों के अभाव में सभी आरोपों से मुक्त किया। मामला नवंबर 2009 का है, जब पंजरपोल और चेंबूर क्षेत्रों में पानी की गंभीर किल्लत थी। उस समय मंगला काटे और उनके पति तुकाराम काटे के नेतृत्व में एक समूह बीएमसी हाइड्रोलिक इंजीनियर दिनेश गोंदालिया के कार्यालय में गया, ताकि पानी की समस्या का समाधान किया जा सके।

अभियोजन के अनुसार, जब उन्हें असंतोषजनक जवाब मिला, तो विवाद ने हिंसक रूप ले गया। आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, कांच के शीशे तोड़े, लकड़ी की दीवारें गिराईं और कंप्यूटर सीपीयू व कुर्सियां क्षतिग्रस्त की। कोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी का किसी सार्वजनिक सेवक को चोट पहुंचाने या मारने का कोई इरादा नहीं था। कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई विशेष सबूत नहीं है कि किसी ने जानबूझकर बीएमसी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। कोर्ट ने माना कि नुकसान आकस्मिक था और जानबूझकर नहीं हुआ, इसलिए सभी 14 आरोपियों को राहत दी गई।

शिंदे के एलीवेटर में प्रवेश के दौरान अफरा-तफरी
महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार में शनिवार को एक निजी कार्यक्रम के दौरान थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, जब उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एलीवेटर में प्रवेश नहीं कर पाए।

सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में शिंदे की पार्टी शिवसेना के कार्यकर्ता उनके साथ एलीवेटर की ओर दौड़ पड़े। कई कार्यकर्ता और पदाधिकारी पहले ही एलीवेटर में प्रवेश कर गए, जिससे अधिक भीड़ और भ्रम पैदा हुआ। शिंदे जब एलीवेटर में चढ़ने का प्रयास कर रहे थे, उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सुरक्षा कर्मियों और होटल कर्मियों ने हस्तक्षेप किया और शिंदे के लिए जगह बनाई। बाद में पुलिस ने क्षेत्र को खाली किया और सुरक्षा बढ़ा दी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि स्थिति जल्द नियंत्रित कर ली गई।

काला जादू का झांसा देकर महिला के 10 लाख के आभूषण चोरी
मुंबई में एक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसने कथित रूप से काला जादू रोकने का झांसा देकर महिला से 10 लाख रुपये मूल्य के आभूषण चुरा लिए।

विले पार्ले पुलिस के अनुसार, आरोपी रामचंद्र सुतार ने महिला को बताया कि किसी ने उसके परिवार पर काला जादू किया है और वह कुछ अनुष्ठान कर इसे रोक सकता है। अक्तूबर में वह महिला के घर गया और पूजा के नाम पर भारी रकम ली। बाद में उसने महिला से सभी सोने के गहने एक स्टील कंटेनर में रखने के लिए कहा और कहा कि तब तक न खोले जब तक वह निर्देश न दे। जब महिला ने परिवार की शादी के लिए कंटेनर खोला, तो वह खाली था। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है और आरोपी की तलाश जारी है।

‘मजदूर का पसीना सूखने से पहले मेहनताना दें’, पैगम्बर साहब का हवाला देकर कोर्ट का मदुरै निगम को आदेश

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने पैगम्बर मोहम्मद की एक प्रसिद्ध हदीस ‘मजदूर का पसीना सूखने से पहले मेहनताना दें’ का हवाला देते हुए मदुरै नगर निगम को अपने पूर्व वकील की लंबित पेशेवर फीस का भुगतान करने का निर्देश दिया है।  मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वामीनाथन ने अदालतों में एक बार पेश होने के लिए भारी फीस लेने वाले वकीलों की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक वरिष्ठ वकील को केवल एक बार अदालत में पेश होने के लिए 4 लाख रुपये दिए गए थे। न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा, “जो यह दलील दे रहे हैं कि उसकी वित्तीय स्थिति ऐसी है कि वह अपने रिटायर्ड कर्मचारियों का बकाया नहीं दे पा रही है, उसे अपने वकीलों को भारी फीस देने में कोई दिक्कत नहीं होती।”

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) छोटे-मोटे मामलों में भी पेश होते थे, जहां उनकी मौजूदगी की सच में जरूरत नहीं थी और जहां “सरकारी वकील का कोई नया वकील भी काम संभाल सकता था।” उन्होंने आगे कहा, “यह सब कुछ पैसों के लिए है। पेशी दर्ज कराना पैसे का मामला है। अब समय आ गया है कि कानून अधिकारियों को फीस के भुगतान के संबंध में ऑडिट किया जाए।”

जानिए क्या है पूरा मामला?
अदालत ने मदुरै नगर निगम के पूर्व स्थायी अधिवक्ता पी. थिरुमलाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने 1992 से 2006 तक करीब 14 वर्षों तक निगम की ओर से पैरवी की थी, लेकिन उनकी फीस लंबे समय से लंबित थी। अधिवक्ता के अनुसार निगम पर 14.07 लाख रुपये बकाया थे, जिनमें से केवल 1.02 लाख रुपये ही अदा किए गए और 13.05 लाख रुपये अब भी बाकी हैं। उन्होंने कुल 818 मामलों में निगम का प्रतिनिधित्व किया था। पूर्व स्थायी वकील ने 2006 में भुगतान की मांग करते हुए एक रिट याचिका दायर की थी। 

जस्टिस स्वामीनाथन ने 19 दिसंबर को अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसे उसकी मजदूरी दे दो”- यह पवित्र पैगंबर (PBUH) का निर्देश है। यह सिद्धांत निष्पक्षता का एक पहलू है और श्रम न्यायशास्त्र में पूरी तरह लागू होता है। इसे वर्तमान मामले में भी लागू किया जा सकता है। अदालत को बताया गया कि वकील वर्तमान में बेहद गरीबी की स्थिति में हैं और अदालती दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां लेने तक का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। 

हाई कोर्ट ने दिए ये निर्देश
कोर्ट ने मदुरै जिला अदालत से जुड़े विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह मामलों की सूची की जांच कर प्रमाणित प्रतियां हासिल करे और दो महीने के भीतर याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराए। इसके बाद मदुरै नगर निगम को निर्देश दिया गया कि वह दो महीने के भीतर बिना ब्याज बकाया फीस का भुगतान करे।

बांग्लादेश में भारतीय हाईकमीशन दफ्तर-वीजा केंद्र पर सुरक्षा कड़ी; ब्रिटेन में भारतीय मूल के तीन को जेल

बांग्लादेश में प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बढ़े तनाव के मद्देनजर भारतीय सहायक उच्चायोग कार्यालय और वीजा आवेदन केंद्र पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। ढाका ट्रिब्यून अखबार के अनुसार, सिलहट मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त (मीडिया) सैफुल इस्लाम ने कहा कि सुरक्षा के कड़े उपाय इसलिए लागू किए गए हैं ताकि “कोई तीसरा पक्ष स्थिति का फायदा न उठा सके”।

पुलिस के अनुसार शुक्रवार सुबह से उपाशहर क्षेत्र में स्थित सहायक उच्चायोग कार्यालय, उसी इलाके में सहायक उच्चायुक्त के आवास और शोभनीघाट क्षेत्र में स्थित वीजा आवेदन केंद्र पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। सुरक्षा बलों के जवान भी पूरी रात तैनात रहे। इंकलाब मंच के प्रवक्ता हादी की गुरुवार को हुई मौत के बाद, गणो अधिकार परिषद ने सहायक उच्चायोग कार्यालय की घेराबंदी करने का कार्यक्रम घोषित किया था।

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कबड्डी टूर्नामेंट में हिंसा, भारतीय मूल के 3 को जेल
ब्रिटेन के ईस्ट मिडलैंड्स में कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान हुई हिंसा के मामले में भारतीय मूल के तीन लोगों को कुल मिलाकर 11 साल से अधिक की जेल की सजा सुनाई गई है। घटना, अगस्त 2023 में अल्वास्टन इलाके में हुई थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे।

डर्बीशायर पुलिस के अनुसार, दमनजीत सिंह (35), बूटा सिंह (35) और राजविंदर ताखर सिंह (42) बड़े पैमाने पर हुई हिंसक झड़प में शामिल थे। बूटा सिंह को चार साल, दमनजीत सिंह को तीन साल चार महीने और राजविंदर ताखर सिंह को तीन साल 10 महीने की कैद सुनाई गई।

बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी के उप कमांडर खांडकर नहीं रहे
बांग्लादेश की स्थापना के लिए 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मुक्ति वाहिनी के प्रमुख नेता, एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) एके खांडकर का शनिवार को निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। पांच दशक पहले 16 दिसंबर को जब पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत-बांग्लादेश साझा बलों के आगे घुटने टेके, तब खांडकर मौजूद थे। रक्षा मंत्रालय ने कहा, खांडकर को उम्र संबंधी जटिलताएं थीं।

खांडकर ने 16 दिसंबर, 1971 को ढाका में आयोजित समारोह में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व किया, जब लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी के नेतृत्व में पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोरा के नेतृत्व वाली भारत-बांग्लादेश संयुक्त सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। वह भारत में रहे बांग्लादेशी उच्चायुक्त भी रहे।

ढाका विश्वविद्यालय के बंगबंधु हॉल का नाम बदलकर किया शहीद उस्मान हादी हॉल

ढाका विश्वविद्यालय ने बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान हॉल का नाम बदलकर शहीद शरीफ उस्मान हादी हॉल कर दिया है। यह नामकरण इंकलाब मंच के संयोजक,  प्रमुख छात्र कार्यकर्ता और आगामी फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनावों में संसदीय उम्मीदवार हादी की मौत के कुछ दिनों बाद किया गया है।  शुक्रवार को ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों और हॉल यूनियन के नेताओं ने शेख मुजीबुर रहमान हॉल की पुरानी नेमप्लेट को हटाकर उस पर नया नाम ‘शहीद उस्मान हादी हॉल’ लिख दिया। बीडी न्यूज के अनुसार, उन्होंने हॉल के गेट पर बैनर भी लगाए।

मस्क को कोर्ट ने लौटाया 55 अरब डॉलर का पैकेज
दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क ने सात साल की कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी जीत दर्ज की है। डेलावेयर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 2018 का 55 अरब डॉलर का वेतन पैकेज वापस कर दिया। यह वही पैकेज था, जो टेस्ला ने उनके सीईओ रहते कंपनी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए बनाया था।

इस फैसले से मस्क की संपत्ति और बढ़कर अब लगभग 679 अरब डॉलर हो गई है। 2018 के समय टेस्ला इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रोडक्शन बढ़ाने और नकदी खर्च करने में संघर्ष कर रही थी। बाद में प्रोडक्शन में सुधार और बिक्री बढ़ने से मस्क को बड़ा बोनस पाने का मौका मिला था। पर, निचली कोर्ट ने यह पैकेज रद्द कर दिया था। इससे नाराज मस्क ने टेस्ला कंपनी को डेलावेयर से टेक्सास शिफ्ट कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुराना फैसला गलत था। पैकेज रद्द करना बहुत सख्त सजा थी।

यमन : सप्ताह में 6 शांतिरक्षकों, 1 दुभाषिए की मौत
विश्व निकाय के लिए वर्ष का अंत काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। इस सप्ताह सूडान में जहां ड्रोन हमले में छह शांति रक्षकों की मौत हो गई, वहीं दक्षिण सूडान में सुरक्षा बलों की हिरासत में एक दुभाषिये बोल रोच मायोल ने जान गंवाई। यमन में 10 अन्य कर्मियों को बंदी बनाया गया। प्रवक्ता ने कहा, यह एक बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति है।

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने उदाहरण देते हुए बताया, इस्राइल-हमास युद्ध के दौरान मारे गए 300 से अधिक संयुक्त राष्ट्र कर्मियों में से लगभग सभी फलस्तीनी थे। वह बोले, ऐसे हमले वैश्विक कानून का उल्लंघन हैं।

ट्रंप ने शांतिदूत की भूमिका को दी प्राथमिकता: रुबियो
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांतिदूत के तौर पर अपनी भूमिका को प्राथमिकता दी है। ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष सुलझाने में अपनी भूमिका को लेकर करीब 70 बार दावा कर चुके हैं।

रुबियो ने कहा, राष्ट्रपति ने शांतिदूत की भूमिका को प्राथमिकता दी है और इसलिए आपने हमें वर्तमान की चुनौतियों जैसे कि रूस, यूक्रेन, भारत और पाकिस्तान या थाईलैंड और कंबोडिया के संघर्षों को समाप्त करने की कोशिश में अहम भूमिका निभाते देखा है। वह बोले, अमेरिका को चीन के साथ भी संबंध रखने होंगे।

डॉक्टर बोले-खालिदा जिया अब पहले से अधिक स्थिर
बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया की हालत अब अधिक स्थिर है और उनकी स्थिति में पहले से काफी सुधार है। उनके निजी चिकित्सक जाहिद हुसैन ने इसकी पुष्टि की। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की 80 वर्षीय अध्यक्ष जिया का शुक्रवार को एक छोटा सफल ऑपरेशन भी हुआ। उन्हें पिछले सप्ताह मेडिकल बोर्ड की सहमति से लंदन ले जाया जाना था लेकिन कतर की एयर एंबुलेंस देर से पहुंची।

नासा का मंगल मिशन मेवेन से संपर्क टूटा, वैज्ञानिक परेशान
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अपने मंगल प्रोब मिशन मेवेन से संपर्क टूट गया है। नासा के अनुसार, पिछले दो हफ्तों से प्रोब से कोई नियमित डेटा प्राप्त नहीं हुआ है। एक छोटे संकेत से पता चला है कि प्रोब शायद अप्रत्याशित तरीके से घूम गया है। मेवेन को 2013 के अंत में लॉन्च किया गया था। यह मुख्य रूप से मंगल के वायुमंडल से जुड़ा महत्वपूर्ण डाटा प्रदान करता है। 

Ramswaroop Mantri

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