नयना जोशी (पुणे)
_स्त्री के व्यक्तित्व का निखार काफ़ी हद तक उसके उन्नत-उरोजों (कुचों) पर आधारित है। कुच का उभार उसके यौवन अवस्था का परिचायक है। पुरुष स्त्री के इस उभार के कारण उससे आकृष्ट होता है और मैथुन काल में स्त्री उत्तेजित एवं द्रवित तब होती है जब उसका प्रियतम उसके दोनों कुचों का परिमर्दन करता है।_
जब तक कुच कठोर नहीं होंगे तब तक वे मसले नहीं जा सकते। स्तनमर्दन करने पर ही स्त्री की भगनासा प्रहर्षित हो जाती है और स्त्री को मैथुन जन्य आनन्द मिलता है।
_आर्तव प्रवृत्ति होते ही स्तनों में उभार आना प्रारम्भ हो जाता है और 40 वर्ष के पश्चात् आर्त्तव निवृत्ति होने पर कुचों में शिथिलता आ जाती है।_
कभी-कभी कतिपय कारणों से कुच शिथिल हो जाते हैं ऐसी स्थिति में पुरुष उनसे आकृष्ट नहीं होता.
_वजह कोई भी हो, स्तन अगर मोटे-थुलथुले-लटकते हुए हो जाएँ तो खूबसूरती बदसूरती बन जाती है. ब्रा तक नहीं पहनी जा सकती ठीक से. पुरुष के सेक्ससुख पर तो बट्टा लगता ही है, स्त्री भी हीनताग्रस्त होकर मनो-दैहिक विकार की शिकार बनने लगती है._
छोटा और कसा हुआ स्तन भी आधुनिक फीमेल्स क़ो नहीं भाता. वे बूब्स और हिप्स क़ो मोटा बनाने के लिए बेताब रहती है.
_कमर और बॉडी ज़ीरो साइज चाहिए लेकिन चूची-चूतड़ हाथी की तरह. इस चक़्कर मे भी कई बार स्तन ढीले होकर लटक जाते है._
एलोपैथ में सर्जरी से सतनो क़ो मनचाहा आकर दिया जाता है. प्लास्टिक सर्जरी अच्छे पैसे वालो के ही बस की बात है.
चेतना विकास मिशन से संबद्ध चिकित्सक यह काम अल्टरनेटिव थेरेपी से करते है– वो भी निःशुल्क. प्राणिक हीलिंग, टच थेरेपी एवं मेडिटेटिव मसाज थेरेपी से समाधान के लिए व्हाट्सप्प 9997741245 पर संपर्क किया जा सकता है. यहां मै कुछ होमरेमेडी से संबंधित उपाय बता रही हूँ.
(१) असगन्ध, वच, कूठ, पीपल, कनेर और लवंग को मक्खन के पानी में मिलाकर लगाने से स्तन स्थूल हो जाते हैं।
(२) वेर की गुठली का गूदा, कनेर एवं नागकेसर का गूदा इनको समान भाग लेकर स्तनों पर रगड़ने से स्तन बड़े तथा कठोर हो जाते हैं।
(३) गम्भारी की छाल का रस और उससे चौथाई तिलों का तेल लेकर उष्ण करके (तेल शेष रहने पर) उसके लेप करने से स्त्री के गिरे हुए भी स्तन मोटे और खड़े हो जाते हैं।
(४) अनारदानों को पीसकर कडुये तेल में पकाकर छाती पर मलने से मृगनयनी के स्तन अधिक सुन्दर तथा स्थूल हो जाते हैं।
(५) तिलों का तेल, गाय का घी, मदार (अर्क) का दूध समान भाग लेकर खरेंटी, अनन्तमूल, त्रिकुटा, लाजवन्ती, हल्दी और दारुहल्दी इनके मिश्रण को उसमें डालकर कोमल आंच पर पका लेना चाहिए. उसके नस्य से अतिशीघ्र विशाल हो जाते हैं।
यदि कोई लड़की उक्त तेल को चावल के धोवन के साथ पिये तो उसके मोटे और उठे हुए स्तन कभी नहीं गिरते।
(लेखिका चेतना विकास मिशन की प्रसारिका हैं.)

