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दो कविताएँ

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1.
जिसे हम
सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं
मिलने पर
उसीसे बात करना असंभव लगने लगता है
भीतर समंदर होता है
बाहर रेत।

2.
कभी-कभी सँभाल जाया करो
मेरा घर
चोर-उचक्कों की बस्ती में
घर अकेला है
और घर में जगह-जगह
यादें बेतरतीब बिखरी पड़ी हैं।

  - हरभगवान चावला,सिरसा,हरियाणा
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