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विजय शाह ने भारतीय सेना और जनता से बिना शर्त मांगी माफी, बोले- सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा आवश्यक

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भोपाल.  मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने अपने एक पुराने विवादित बयान को लेकर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगी है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था. मंत्री ने स्वीकार किया कि उनके शब्द उनकी भावना के अनुरूप नहीं थे और देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में कहे गए थे. उन्होंने कहा कि गलती के पीछे की भावना को सही संदर्भ में देखा जाना चाहिए. हालांकि शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री विजय शाह भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे जहां उन्‍होंने मीडिया से दूरी बनाकर रखी हुई थी. उन्‍होंंने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया था. विजय शाह के इस्‍तीफे को लेकर कांग्रेस लगातार मांग करती आई है.

विवाद के बाद सामने आए इस विस्तृत बयान में विजय शाह ने न केवल अपनी त्रुटि स्वीकारी, बल्कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक रहा है. मंत्री ने यह भरोसा जताया कि उन्होंने आत्ममंथन किया है, जिम्मेदारी स्वीकार की है और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी. उनका कहना है कि वे अपनी वाणी पर नियंत्रण रखेंगे और भारतीय सेना के प्रति सम्मान पहले की तरह अडिग रहेगा.

माफी में क्या कहा मंत्री विजय शाह ने
विजय शाह ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार स्पष्ट किया है और आज फिर दोहरा रहे हैं कि उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी. उन्होंने कहा कि उनके शब्द भावना के अनुरूप नहीं थे, लेकिन उनका उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था. मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने अंतःकरण से क्षमा याचना की है और आज फिर कर रहे हैं. विजय शाह ने अपने वाट्स ऐप स्‍टेट्स पर भी इसी तरह की पोस्‍ट लगाई है.

सेना के प्रति सम्मान दोहराया
मंत्री विजय शाह ने कहा कि भारतीय सेना के प्रति उनके मन में हमेशा अत्यंत सम्मान रहा है और रहेगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना और उसके अधिकारियों के प्रति सम्मान उनके सार्वजनिक और निजी जीवन का हिस्सा रहा है. उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से आहत सभी नागरिकों से, विशेषकर भारतीय सेना से वे बिना किसी शर्त के क्षमा याचना करते हैं.

सार्वजनिक जीवन और शब्दों की जिम्मेदारी
विजय शाह ने स्वीकार किया कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक होती है. उन्होंने कहा कि इस घटना से उन्होंने सबक लिया है. मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने आत्ममंथन किया है और अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार करते हैं. भविष्य में वे अधिक सतर्क रहेंगे और ऐसी कोई चूक नहीं करेंगे.

Ramswaroop Mantri

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