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बाकी से बेहतर क्यों हैं दुश्चरित्र महिलाएं⁉

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पुष्पा गुप्ता

     _"मुझे चरित्रहीन औरतें पसंद हैं. मेंटली बेहद बेहद खूबसूरत होतीं हैं वे. बेबाक, बेपर्दा, स्वतंत्र और उन्मुक्त. अपनी जिंदगी किसी को गिरवी रखे बिना, अपनी मर्ज़ी से जीने वाली. उनका कोई समाज थोपित कथित चरित्र नहीं होता, इसलिए केवल चरित्रहीन औरतें ही समग्रत: सुन्दर होती हैं। सौंदर्य  ईश्वर है - सत्यम, शिवम, "सुंदरम"."_
    यह दृष्टिकोण है चेतना विकास मिशन के निदेशक हमारे डॉ. विकास मानवश्री का. पिंजरे में कैद चिड़िया कितनी भी रंगीन हो, सुन्दर नहीं लगतीं! चाहे कोई कितनी भी कविताएं लिख लें उन पर।

क्या होता है चरित्र…?
चरित्र गुलामी है, एक बंधन… वो शर्तों से तय होता है। चरित्र गैर कुदरती है. प्रकृति विरोधी. अप्राकृतिक। चरित्र है किसी तथ्य पर थोपीं गई शर्तें।
हवा का चरित्र क्या है ? शांत, धीमे, तेज कि आंधी …!! पानी का चरित्र क्या है…? गर्म, ठंडा या बर्फ..!!
और मिट्टी का चरित्र ? मूरत या ईंट…!!
जो चरित्रहीन होते हैं, सुंदर वही होते हैं…आजाद लोग ही खूबसूरत होते हैं….!!

कौन सुंदर है…?
कोने में अपनी ही कुंठाओं में दबी खामोश, अपनी मौलिक स्वतंत्रता तक गिरवी रख गुलाम बनी औरत चरित्रवान औरत कही जाती है। दासता सबसे बड़ी कुरूपता है।
ऐसी गुलाम चरित्रवान औरत सुन्दर होगी या किसी खुले में अपने मन से ठहाके लगाकर हंसती चरित्रहीन औरत ?.
कौन है सुंदर ? वो – जो चाहे तो आगे बढ़कर चूम ले… बोल दे कि किसी से मैं प्यार करती हूँ. या वो- जो बस सोचती रहे असमंजस में और अपने मन का दमन किए रहे…?
दमित औरतें निसंदेह सुंदर नहीं होती, भीतर से तो कतई नही। पर स्वतंत्र चरित्रहीन औरतें होती हैं, खूबसूरत.
मानवश्री के शब्दों में कहूं तो :
महिला से कह रहा हूँ~ सोचना कभी- जब अपनी टांगे फैलाई तुमने अपने पुरुष के सामने…अगर वो केवल उस पुरुष के लिए था तो ही वो चरित्र है! लेकिन- वो तुम्हारे अपने लिए था तो उसकी व समाज की दृष्टि में चरित्रहीनता….!!
अपने लिए, अपने तन और मन के लिए खुल कर जीती औरते सुन्दर लगती है. पर-.हम उसे चरित्रहीन ही पुकारेगें।
बच्चे चरित्रहीन होते हैं… उनका सबकुछ बेबाक… आजाद होता है। वो हंसते हैं खुलकर, रोते हैं खुलकर, दुख सुख, खुशी गम… सब साफ सामने रख देते हैं। वो दमन नहीं करते अपना।
चरित्र दमन है… पहले अपना, फिर अपनों का, फिर अपने समाज का.

गौर करना-
जो जितना चरित्रवान होता है, वो उतना ही दमित होता है, और फिर उतना ही बड़ा दमनकारी होता है।
औरते सुंदर होती हैं : वो– जिसका जब मन हो तो पसन्द के पुरुष की हथेली अपने स्तनों तक खींच ले. वो- जिसका मन हो तो वो पसन्द के पुरुष को अपनी बांहों में जोर से भींच ले. वो – जो चाहे तो अपने प्रिय की गोद में, जिस्म में, रूह में समा सके।
औरत सेक्स में तृप्त होने के लिए और लम्बे मिक्स-अप की माग करे, खुद कमांड हाथ में लेकर पति से ढीला न पढ़ने की मांग करे या सेक्स के आनंद में आवाज़ निकाले तो वो चरित्रहीन मानी जाती है।
बच्चे को जन्म देते जब वो दर्द में चीखती है तो वो चरित्रहीनता है. आसपास की औरतें उसे चुप करातीं हैं। आवाज नहीं निकलाने की सलाह देती हैं. सारा दर्द खामोशी से सहने को कहती है. चरित्र का ये सब बंधन कबूल नहीं होना चाहिए।
पसंद के पुरुष के साथ उसके मदमस्त खेल का दमन गैर-कुरदती है। इससे मुक्त होना चाहिए। उसे इसके लिए चरित्रहीन होना चाहिए।
अपने भीतर और बाहर हर चीज से खुलकर खुश होते….प्यार में डूब हर अंग से प्यार करती आजाद औरत सुन्दर होती है, क्योकि वो तृप्त होती है। अतृप्ति में भी सुंदरता हो सकती है क्या?
अपने स्व को जीने वाली तृप्त औरत को समाज चाहे चरित्रहीन कहे लेकिन- उस चरित्रहीन औरत से खूबसूरत कुछ भी नहीं।
कुंठित, गिरहबंद, दमित, गुलाम कथित चरित्रवान औरतें तो कुरूप होती है, बेहद बदसूरत, बनावटी।
मानवश्री कहते हैं : मुझे कुदरत पसंद हैं और उससे चरित्रहीन कुछ भी नहींl चरित्र के मायने – बंधा हुआ, कैद, जो मुझे नापसंद है।
[चेतना विकास मिशन)

Ramswaroop Mantri

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