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खुद को इंडियन सुपरस्‍टार का टैग देने के लिए क्‍यों बेताब हैं सितारे?

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एक समय था जब फिल्म इंडस्ट्री बॉलिवुड, टॉलिवुड, कॉलिवुड, जैसी अलग-अलग भागों में बंटी हुई थी, लेकिन ‘बाहुबली-1’ और ‘बाहुबली 2’ की रेकॉर्ड तोड़ कमाई के बाद साउथ ऐक्टर प्रभास पैन इंडिया स्टार के रूप में उभरे। इसके बाद यश की ‘केजीएफ चैप्टर-1’, अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा’ और अब राम चरण तेजा, जूनियर एनटीआर की ‘आरआरआर’ ने साउथ और नॉर्थ इंडस्ट्री की खाई खा लिया है। अब कमोबेश हर बड़े स्‍टार और फिल्‍ममेकर नॉर्थ और साउथ की इस दूरी को कम करने की पैरवी करते नजर आ रहे हैं। जाहिर है कि ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले इन सितारों को ये बात हजम नहीं हो रही है कि इतनी कमाई के बावजूद वो बॉलिवुड से कमतर कैसे हैं? यही वजह है कि अब वो सीना ठोककर खुद को इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का स्टार बता रहे हैं।

pan india superstar

बॉलिवुड, टॉलिवुड, कॉलिवुड… ये दीवार टूटती क्‍यों नहीं?
हाल ही में ‘केजीएफ चैप्टर 2’ के ट्रेलर लॉन्च पर कन्नड़ सुपर स्टार यश बेबाक अंदाज में नॉर्थ यानी बॉलिवुड और साउथ इंडस्ट्री की दीवार को पाटते नजर आए, जब उन्होंने जज्बाती अंदाज कहा, ‘नॉर्थ, साउथ, ईस्ट सभी एक ही दिशा में चल रहे हैं, तो मुझे लगता है कि ये कॉन्सेप्ट अब बहुत पुराना हो चुका है कि हम इंडस्ट्री को अलग-अलग रीजन में बांटें। हम सभी भारतीय हैं और हमें इस बात को स्वीकारना चाहिए कि अंत में हम सब का टोटल एक ही है। मुझे लगता है कि हम सभी को इंडियन फिल्म इंडस्ट्री, एक इंडस्ट्री पर फोकस करना होगा। हमें इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में यकीन करके सिनेमा को सेलिब्रेट करना होगा।’

पैन इंडिया स्‍टार बनने की चाहत
कन्नड़ सुपरस्टार यश ‘केजीएफ वन’ की सुपर सक्सेस के बाद उस वक्त चर्चा में आ गए थे, जब 2018 में उनकी फिल्म ने 250 करोड़ का आंकड़ा क्रॉस करके हाइएस्ट ग्रॉसिंग कन्नड़ फिल्म का रेकॉर्ड बनाया और ‘केजीएफ चैप्टर वन’ को कल्ट फिल्म का दर्जा दिलाया। यह फिल्म कन्नड़ में ही नहीं, बल्कि हिंदी दर्शकों में भी खूब सराही गई थी। इसी के बाद यश ने रीजनल स्टार से पैन इंडिया एक्टर के रूप में पहचान हासिल की। अब ‘केजीएफ चैप्टर 2’ को लेकर भी दर्शकों में बहुत उत्साह है।इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के स्टार होने की दावेदारी
यश ही नहीं बल्कि ‘बाहुबली’ फेम प्रभास हों या ‘पुष्पा’ के स्टार अल्लू अर्जुन या आरआरआर से बॉक्स ऑफिस पर हंगामा मचाने वाले जूनियर एनटीआर और राम चरण, हर कोई खुद को साउथ स्टार न कहकर पैन इंडिया स्टार कहलाना पसंद कर रहा है। असल में ये तमाम स्टार कहीं न कहीं इस बात से आहत भी हैं कि जब इनकी फिल्में सिर्फ दक्षिण नहीं, बल्कि पूरे देशभर की ऑडियंस के बीच हिट रही हैं, तो उन्हें साउथ स्टार के रूप में सीमित क्यों किया जाता है। यही वजह है कि प्रभास अपने हर इंटरव्यू में यही कहते दिखे कि साउथ और नॉर्थ के बीच भेद नहीं होना चाहिए। अपने हालिया साक्षात्कार में भी उन्होंने अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा’ के देशभर में पसंद किए जाने का हवाला देकर कहा, ‘अल्लू अर्जुन ने पुष्पा में बहुत ही शानदार काम किया है। फिल्म भी बहुत बेहतरीन है। जहां तक पैन इंडिया सफलता की बात है तो ये तो अभी शुरुआत है। मुझे तो लगता है कि ये शुरुआत भी काफी देर से हुई है। फिल्म इंडस्ट्री को 100 साल से ऊपर हो चुके हैं और पैन इंडिया फिल्में अब बन रही हैं। हम सबको मिलकर दुनिया की बाकी बड़ी इंडस्ट्रीज से प्रतिस्पर्धा करनी है। हम इंडियन फिल्म इंडस्ट्री हैं, हम एक ही हैं।’

‘चिढ़ होती है, जब इंडस्ट्री को साउथ और नॉर्थ में बांटा जाता है’
रिलीज के 7वें दिन वर्ल्डवाइड 700 करोड़ की कमाई करने वाली फिल्म आरआरआर के स्टार जूनियर एनटीआर का कहना है, ‘मुझे बहुत चिढ़ होती है, जब इंडस्ट्री को साउथ और नॉर्थ में बांटा जाता है। सच कहूं तो मुझे बॉलिवुड, टॉलिवुड, कॉलिवुड, मॉलिवुड कह कर इंडस्ट्री को विभाजित करना बिलकुल भी पसंद नहीं है। बाहुबली की सफलता ने रीजनल बैरियर को तोड़ दिया और फाइनली हम सभी इंडियन फिल्म इंडस्ट्री कहलाने लगे हैं। नॉर्थ फिल्म इंडस्ट्री ने जिस तरह से नई फिल्मों और नए चेहरों को रास्ता दिया और हमने उनसे बहुत कुछ सीखा, उसी तरह से टॉलिवुड ने बॉलिवुड के लिए नए दरवाजे खोले हैं। इसके बाद मुझे लगता है कि हमें पूरी इंडस्ट्री को इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के रूप में देखना चाहिए।’ इसी तरह ‘आरआरआर’ में जूनियर एनटीआर के साथी स्टार राम चरण भी जूनियर के सुर में सुर मिलाते नजर आते हैं। उनका कहना है, ‘यह बहुत खूबसूरत समय है, जब हर डायरेक्टर के पास ऑप्शन है कि वो साउथ से ऐक्टर ले या बांगला से।’‘साउथ वालों का दर्द जायज है’
जाने-माने ट्रेड विश्लेषज्ञ तरण आदर्श का कहना है, ‘प्रभास हों या अल्लू अर्जुन अथवा जूनियर एनटीआर या रामचरण इन स्टार्स की फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर जो कमाई कि और देश भर के दर्शकों का जो प्यार पाया, उससे उन्हें अपनी ताकत का अंदाजा हुआ। आप ही देखिए बाहुबली, द बिगिनिंग ने जहां 650 करोड़ की कमाई की, वहीं बाहुबली द कन्क्लूजन ने 1,810 की रिकॉर्ड तोड़ बॉक्सऑफिस कलेक्शन दिया। केजीएफ चैप्टर 1 ने वर्ल्ड वाइड 250 करोड़ की अर्निंग की, तो पुष्पा तकरीबन 200 करोड़ तक के कलेक्शन पर पहुंची, अब आरआरआर की 700 करोड़ की कमाई करने के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर अभी तक फीकी नहीं पड़ी है। अब जब वो अपना दमखम दिखा चुके हैं, तो रीजनल स्टार कहलाने में उन्हें दर्द होता है, जो जायज भी है। आरआरआर से पहले रिलीज हुई बच्चन पांडे की बॉक्स ऑफिस नाकामी के बाद बॉलिवुड वालों को नींद से जाग जाना चाहिए। पहले हमारे स्टार्स का कंपटीशन आपस में और हॉलिवुड के साथ था, मगर अब उनका सीधा मुकाबला तमिल, तेलुगू और कन्नड़ स्टार्स से हैं।’

‘कलाकार को एक भाषा में नहीं बांध सकते’
मशहूर ट्रेड पंडित कोमल नाहटा के शब्दों में, ‘साउथ वालों को ये बहुत अच्छे से पता है कि उनकी फिल्में बॉलिवुड में हमेशा से पसंद की जाती हैं। उनकी अनेकों फिल्में बॉलिवुड में डब होती रही हैं। सलमान खान ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘वांटेड’ के बाद बॉलिवुड में दक्षिण भारतीय फिल्मों के रीमेक की बाढ़ आ गई थी। सिंघम’, ‘बॉडीगार्ड’, ‘रेडी’, ‘राऊडी राठौर’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स-ऑफिस पर नोटों की बारिश कर दी और अब तो उनकी ओरिजिनल फिल्में भी यहां धड़ल्ले से चल रही हैं, तो उन्हें अहसास हो गया है कि उन्हें पैन इंडिया एक्सेप्टेंस मिल रही है, तो वो खुद को एक भाषा तक सीमित क्यों रखेंगे? फिर पैन इंडियन फिल्म हो या पैन इंडिया स्टार, ये एक रेडिकल थॉट है, जो सुनने में अच्छा लगता है और उससे यह मेसेज भी जाता है कि आप फलां कलाकार को किसी एक भाषा में नहीं बांध सकते

।’सलमान की टीस- साउथ में क्‍यों नहीं चलती हमारी फिल्‍में
सुपरस्‍टार सलमान खान उन सितारों में से हैं, जिन्‍हें हमेशा से ‘बॉलिवुड’ शब्‍द से ही आपत्त‍ि रही है। वह कहते हैं, ‘ये बहुत अच्छा लगता है कि साउथ वाले इतना अच्छा कर रहे हैं, लेकिन मुझे हैरानी है कि हमारी मूवी साउथ में इतना अच्छा परफॉर्म क्यों नहीं कर पा रही हैं, जबकि उनकी फिल्में यहां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। मुझे लगता है, वे हमेशा हीरोइज्म पर यकीन रखते हैं, हालांकि हमने भी किया है। मगर अब हमें लार्जर देन लाइफ वाली हीरोइज्म फिल्मों पर फिर से शुरुआत करनी चाहिए।’

राजामौली बोले- मैं नॉर्थ-साउथ देखकर फिल्‍म नहीं बनाता
मौजूदा वक्‍त में देशभर में अपनी फिल्‍मों से अमिट छाप छोड़ने वाले एसएस राजामौली कहते हैं, ‘मैं अपनी फिल्मों के लिए ऐसे विषय चुनता हूं, जिसे पैन इंडिया के दर्शक कनेक्ट करे। मैं विषयों को साउथ या नॉर्थ के हिसाब से नहीं चुनता। जरूरी नहीं कि आप दर्शकों को आकर्षित करने के लिए आरआरआर जैसी भव्य फिल्म बनाएं। मेरे हिसाब से खास फिल्म वो होती है, जिससे इंडियन दर्शक खुद को जुड़ा हुआ महसूस करे।’ओम राउत बोले- सिनेमा को सरहद में बांधना पसंद नहीं
डायरेक्‍र ओम राउत कहते हैं, ‘लोग भले आज पैन इंडिया या एक इंडस्ट्री की बात कर रहे हैं, मगर मैंने हमेशा इंडियन सिनेमा पर बिलीव किया है। मेरी शुरुआत मराठी फिल्म लोकमान्य तिलक से हुई, फिर मैंने तान्‍हाजी बनाई और अब मेरी आदि पुरुष आने वाली है। मुझे सिनेमा को सरहद या भाषा में बांधना पसंद नहीं।’

Ramswaroop Mantri

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