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  ये युवजन अपने लिए जेल क्यों माँगता था ?

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चंचल भू

लेख पढ़कर 56 साल पहले हुई गिरफ्तारी याद आ गई

चंचल भाई नमस्कार

तुम्हारा लेख पढ़कर 56 साल पहले हुई गिरफ्तारी जिसमें डॉ राम मनोहर लोहिया के साथ दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था से लेकर अनेकों बार की गिरफ्तारी ओं के मंजर आंखों के सामने घूमने लगे फिलहाल एक रोचक गिरफ्तारी का जिक्र करना जरूर चाहूंगा
एक बार दिल्ली के समाजवादियों ने तय किया कि दिल्ली के मशहूर मॉडर्न स्कूल बाराखंबा रोड जो कि उस जमाने का बड़े लोगों के साहबजादो का स्कूल था उस पर प्रदर्शन किया जाए उन दिनों नारा लगता था डॉक्टर लोहिया का अरमान सबको शिक्षा एक समान राष्ट्रपति का बेटा हो या चपरासी की संतान सबको शिक्षा एक समान उस जमाने में प्रदर्शन होने से पहले ही दिल्ली पुलिस अपने साजो समान लोहे की बंद लारी अश्रु गैस लाठी वगैरह से लैस होकर मुस्तैदी के साथ प्रदर्शन स्थल पर तैनात मिलती थी और क्योंकि यह हिंदुस्तान के बड़े मालदा रो सियासतदानो अफसरों के बच्चों के पढ़ने का स्कूल था इसलिए पूरी मुस्तैदी के साथ दिल्ली पुलिस वहां पर तैनात थी
प्रदर्शन का समय दिन के 11:00 बजे निश्चित हुआ था समय से पहले ही कुछ सोशलिस्ट मॉडल स्कूल के गेट पर पहुंच गए थे एक थी हमारी अम्मी जान डॉक्टर सलीमन हालांकि वे पेशे से दाई का काम करती थी पर हम लोग उन्हें अदब से डॉक्टर साहिबा कह कर पुकारते थे उस जमाने के प्रदर्शनों में एक डॉक्टर सलीमन तथा दूसरी हमारे साथी मदनलाल हिंद की माताजी अक्सर हर प्रदर्शन में शामिल रहती थी प्रोफेसर विनय कुमार हमारे नेता थे नारा लगा इंकलाब जिंदाबाद डॉ लोहिया जिंदाबाद कमाने वाला खाएगा लूटने वाला जाएगा नया जमाना आएगा अंग्रेजी स्कूल बंद करो गरीबों के बच्चों की तालीम का इंतजाम करो वगैरा-वगैरा
थोड़ी देर की रस्साकशी के बाद प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर पुलिस की बख्तरबंद गाड़ी में बैठा कर तिहाड़ जेल में ले जाकर बंद कर दिया गया
2 दिन बाद दिल्ली की जज जनक जुनेजा की अदालत में हमको पेश किया गया अदालत की कार्यवाही अभी चली रही थी कि किसी ने अम्मी जान को बताया की इस जज की अभी तक शादी नहीं हुई है यह कुंवारी है ना जाने अम्मी जान को क्या उन्होंने कड़क आवाज में जज को मुखातिब करते हुए कहा बेटी तूघबरा मत तू फैसला हमारे हक में कर दे मैं तेरा निकाह अपने खूबसूरत बेटे विनय कुमार के साथ करवा दूंगी अदालत में सन्नाटा छा गया वैसे भी जज साहिबा बड़े सख्त मिजाज की थी उन्होंने आव देखा न ताव फटाक से 1 महीने की सजा का ऐलान कर दिया
भयंकर गर्मी उन दिनों पड रही थी रात को मोटे मोटे मच्छर खून के प्यासे थे हमारे वरिष्ठ समाजवादी साथी मदनलाल हिंद जी मच्छर काटने पर कहते थे कि विनय कुमार जी की तस्वूर
ंँ मैं शादी हो गई हम बाराती मुफ्त में ही मारे गए रात के अंधेरे में जोर का ठहाका लगता था 28 दिन के बाद जेल से रिहाई हुई रिहाई के hai फिर नारा लगा डॉक्टर लोहिया का अरमान सबको शिक्षा एक समान
राजकुमार जैन

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