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गौरैयों को बचाना क्यों जरूरी है ?

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निर्मल कुमार शर्मा,

आप सभी को पता है कि हमारे परिवार की सबसे छोटी,प्यारी, नन्हीं-मुन्नी सदस्या हम मनुष्यों द्वारा प्रकृति के अत्यधिक दोहन,जल-वायु के अत्यधिक प्रदूषण,कृषि में रासायनिक कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग,गगनचुंबी इमारतों का निर्माण व सबसे बड़ा कारण मोबाईल टॉवरों से निकलनेवाले रेडियो मैग्नेटिक रेडिएशन के सर्वत्र उपस्थित रहने से गौरैया का जीवन आज बेहद खतरे में है,अगर आज हम इस नन्हीं सी जान को अत्यधिक संरक्षण और देख-भाल नहीं करेंगे और हम इस पुनीत कार्य में आज चूक गये तो यह बहुत संभव है कि यह हमेशा के लिए,हमारे घर-आँगन,हमारे देश और इस धरती से ही विलुप्त हो जाय !


अभी तक हम लोगों ने 1600 से भी ज्यादे विडिओ यूट्यूब पर डाल चुके हैं,जिनमें गौरैयों के हर कार्यकलापों यथा घोसले बनाने,बच्चों को खिलाने, पालने,स्नान करने,आपस में बातचीत करने आदि-आदि सभी कुछ है,उससे आप प्रेरणा लेकर सीखकर अपने घर पर भी छज्जे के नीचे ऊँचाई वाले स्थान पर एक घोसला टाँग कर गर्मी के ऋतु में एक मुट्ठी चावल के टुकड़े,रोटी के टुकड़े और शीतकाल में केवल बाजरा खुली छत या बारामदा या कहीं भी खुले में बिखेर दीजिए,एक मिट्टी के खुले मुँह वाले बर्तन में प्रतिदिन साफ पानी अपने आँगन बारामदे या छत पर रख दीजिए । बस इतना ही करना है ! इस अदने से नन्हें पक्षी को जो इस धरती से विलुप्ति के कगा़र पर खड़ी है इस नन्हीं-मुन्नीं ,प्यारी अपने घर की सदस्या को बचाने के लिए उक्तवर्णित प्रयत्न जरूर करिए,यकीन मानिए इस गौरैया के अनुपस्थिति में हमारा जीवन बहुत ही सूना पड़ जायेगा !
आपके इस छोटे से कार्य से समाज के और लोग भी इस नन्हीं सी जान गौरैया को संरक्षित करने को उत्प्रेरित होंगे। इसके लिए आप अपने परिजनों,मित्रों,रिश्तेदारों,प्रबुद्ध जनों ,प्रकृति से और पर्यावरण से प्यार करने वाले जागरूक और चैतन्य लोगों को समझाइये, वे जरूर आपके इन बातों से सहमत होंगे । हो सकता है,आपके इस छोटे से कार्य से इस धरती पर यह अपनी प्यारी चिड़िया बच जाय ! अगर हम इस पुनीत कार्य को आज युद्ध स्तर पर नहीं करेंगे तो हो सकता है पुर्तगालियों द्वारा नृशंसता पूर्वक मारीशस के पक्षी डोडो का हाल हमारी इस नन्हीं, पारिवारिक,घर-आँगन की सबसे छोटी,भोली,दुलारी सदस्या गौरैया रानी का भी हो जाय और डोडो पक्षी की तरह इसका भी एक मॉडल लंदन के म्यूजियम में न सही दिल्ली,कलकत्ता,मुम्बई और चेन्नई की म्यूजियमों में संरक्षित कर रखना पड़ जाय और हमारी भावी पीढ़ियों को उन्हें देख कर कल्पना करना पड़े कि यह नन्हीं चिड़िया कभी हमारे बाप-दादाओं के संग हमारे घरों में ही एक छोटी पारिवारिक सदस्या के रूप में रहा करती थी,सदा प्रातःकाल में अपने बहुत ही मधुर चीं-चीं करके सभी को जगाना,साथ में रहना,स्नान करना खाना,पीना, घोसले बनाना,अपने नन्हें बच्चों को पालना सभी कुछ इनका हमारे साथ ही होता था।
तो ये सोचकर हमारी भावी पीढ़ियाँ बहुत आह्लादित होंगीं,परन्तु वे हमारे ही वजह से उनके समय में नहीं रहीं,यह सोचकर हमारी भावी पीढ़ियाँ हमें कभी माफ नहीं करेंगी,इसलिए अभी भी प्रयास करिये,ये काम मिलजुलकर,सभी के प्रयास से ही होगा,कोई भी एक व्यक्ति इस वृहद कार्य को नहीं कर सकता ! अब तक मैं इन नन्हीं चिड़िया गौरैया के लिए अपने घर पर लगभग 600 घोसले बना चुका हूँ,मेरा विनम्र,करबद्ध प्रार्थना है कि आप कम से कम इनके लिए अपने घर पर एक गत्ते या लकड़ी का एक घोसला बनाकर या बाजार से खरीदकर इनके दुश्मनों बिल्ली आदि की पहुँच से दूर ऊँचाई वाले स्थान पर अवश्य टांगें,आप देखेंगे कि आपके घर में गौरैयों के आने से इनके सकारात्मक प्रातःकालीन मधुर चीं-चीं-चीं की आवाजें आपको दिन भर के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा से भर देगी !

       हमारा पूरा परिवार इन्हें बचाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है, आप से मेरा विनम्र निवेदन है कि कृपा करके अपने मोबाईल में you tube खोलिए उसमें अँग्रजी में मेरा नाम ' Nirmal Kumar Sharma,Sparrow Conservation ' लिखकर उसे सेलेक्ट करिए,मेरे द्वारा संरक्षित गौरैयों के बहुत से विडिओ आपके सामने आ जायेंगी । आप उन्हें पर like करिये और अपना comments जरूर लिख दीजिए और इस छोटी सी पारिवारिक सदस्या गौरैया के जीवन को बचाने के लिए इतना जरूर करिए कि अपने बारादेवी, छज्जे या ऊं छाई वाले स्थान पर उनके लिए एक गत्ते,टिन के डिब्बे,लकड़ी के बाक्स या नारियल के बड़े खोपड़े को घोंसले का रूप देकर टांगिए,घर,आंगन,बारादेवी कहीं भी एक कटोरी साफ पानी जरूरी रख दीजिए तथा एक मुट्ठी चावल के टुकड़े वहीं कहीं आसपास खुले में  जरूर विखेर दीजिए। 

-आपका शुभेक्षुक- निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण ‘ ,प्रताप विहार ,गाजियाबाद,

Ramswaroop Mantri

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