उर्दू_व्यंग्य मूल रचना – इब्ने इंशा अनुवाद – अखतर अली
साहित्य के अखाड़े में लेखक और संपादक की कुश्ती कोई नई बात नहीं है | दांव तो लेखक के पास एक से एक होते है लेकिन वह जीतने संपादक को देता है | संपादक से हार जाने में ही लेखक को अपनी जीत नज़र आती है |एक लेखक अपनी कहानी लेकर एक पत्रिका के दफ़्तर पंहुचा और संपादक से निवेदन किया कि मै अपनी नई कहानी जिसका शीर्षक है “नई सुबह“ आपकी पत्रिका में छपवाने की गरज से आया हूँ |
संपादक ने बिना नज़रे उठाये जवाब दिया – टिकट लगा लिफ़ाफ़ा अपनी कहानी के साथ छोड़ जाइये आप को आपकी कहानी से संबंधित जवाब छै माह के अंदर भिजवा दिया जायेगा |
लेखक ने निवेदन किया किया कि कहानी छोटी सी है यदि आप चंद मिनट मेरे को दे दे तो मै खड़े खड़े कहानी सुना देता हूं |
न जाने आज संपादक क्या खा कर आया था जो उसने अपने स्वभाव के विपरीत लेखक से कहानी सुनना स्वीकार कर लिया |
लेखक ने कहानी सुनाना आरंभ किया – एक शहर की एक उंची इमारत की चौथी मंज़िल पर रात के तीन बजे जब सब घोड़े बेच कर सो रहे थे और ख्वाबो में अपनी अधूरी ख्वाहिशे पूरी कर रहे थे तब अचानक आग लग गई | आग कैसे लगी इस संबंध में शायद ऐसा हुआ होगा कि किसी ने अपने कमरे में जलती हुई चिमनी बुझाये बिना सो गया होगा जिससे आग लग गई | भड़कते हुए शोले देख कर एक नौजवान चिल्लाने लगा आग आग भागो भागो |
उसके शोर से किसी ने दमकल विभाग को फोन किया और चंद मिनटों में पानी की मोटर आ गई | दमकल विभाग के कर्मचारी ने अपनी जान पर खेल कर आग बुझाई | जब आग बुझ गई तो लोगो ने उस कर्मचारी की प्रशंसा की और उसे नगद ईनाम दिया , तभी किसी ने कर्मचारी को बताया कि इस आग से उसकी दाहिनी तरफ़ की मूछ जल रही है तो उसने पानी का फव्वारा अपनी मूछ पर मारा और मूछ में लगी आग बुझ गई | उसने नज़र उठा कर आसमान की तरफ़ देखा तो सुबह हो रही थी |
कहानी सुन कर संपादक ने कहा – कहानी तो बुरी नहीं है , ऐसा करो इसे एक बार फिर से सुनाओ |लेखक ने कहानी फिर से शुरू की – एक शहर की एक उंची इमारत की चौथी मंज़िल पर —-संपादक ने रोका और कहा – चौथी मंज़िल पर ही क्यों जबकि आग लगाने का ज्यादातर काम ग्राउंड फ्लोर वाले करते है , चौथी मंज़िल पर नही आग ग्राउंड फ्लोर के एक मकान में लगाना ज़्यादा खूबसूरत होगा |लेखक ने कहा – ठीक है यह बिलकुल सही कहा आपने अब मेरी कहानी में आग ग्राउंड फ़्लोर पर ही लगेगी | लेखक ने यह बात इस अंदाज़ में कहा जैसे ग्राउंड फ़्लोर में आग नहीं लगा सका तो कहानी को ही आग लगा देगा |लेखक ने कहानी सुनाते हुए कहा – ग्राउंड फ़्लोर पर रात के तीन बजे जब सब घोड़े बेच कर सो रहे थे …….संपादक ने कहा – सब सो रहे थे का क्या मतलब ? आप ये कहना चाह रहे है कि पुलिस भी सो रही थी ? यह तो बहुत गलत बात आप अपनी कहानी में कह रहे है | आप ऐसा करिये सब सो रहे है को यू लिखिये कि ज़्यादातर लोग सो रहे थे |लेखक ने कहानी आगे बढ़ाते हुए कहा – ज़्यादातर सो रहे थे और ख्वाबो में अपनी अधूरी ख्वाहिशे पूरी कर रहे थे ……
.संपादक ने कहा – अधूरी ख्वाहिशे ….. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इस सरकार के राज में आम आदमी पूरी तरह असंतुष्ट है | इस लाईन को आप फ़ौरन कहानी में से निकालिये आप की कहानी के चक्कर में हमको अपनी पत्रिका बंद नहीं करवानी है |लेखक ने बिना देर किये पेन से उस लाईन को काट दिया और कहानी आगे बढ़ाते हुए कहा – एक शहर की उंची इमारत के ग्राउंड फ़्लोर में रात के तीन बजे अचानक आग लग गई | | आग कैसे लगी इस संबंध में शायद ऐसा हुआ होगा कि किसी ने अपने कमरे में जलती हुई चिमनी बुझाये बिना सो गया होगा जिससे आग लग गई | संपादक ने टोकते हुए कहा – यह क्या कर रहे हो , तुम तो आग लगाने के तरीके बता रहे हो इससे तो अपराध बढ़ेगे , इस लाईन को काटों यह बिलकुल नहीं चलेगी , हां अब आगे कहो |लेखक ने कहा – भड़कते हुए शोले देख कर एक नौजवान चिल्लाया आग , आग , भागो भागो |भड़कते हुए शोले सुन कर संपादक भड़क गया और कहा – इससे तो डर और भगदड़ का खतरा है , इस लाईन को रखना यानि हिंसा को बढ़ावा देना हो जायेगा |
लेखक संपादक से सहमत होते हुए कहा – बिलकुल सही कहा आपने न जाने इतनी महत्वपूर्ण बात मेरे दिमाग़ में क्यों नहीं आई ?संपादक ने कहा – उस नौजवान से कहलवाओ कि सब ठीक ठाक है | मेरे को तो कहानी में आग लगवाने की घटना ही बेमानी लग रही है |लेखक ने कहा – बिलकुल ठीक मशविरा दिया आपने इस कहानी में से आग लगने की घटना पूरी तरह हटा देते है |
संपादक ने कहा – यह बहुत ज़रूरी है , अब आप पूरी कहानी शुरू से सुनाइये |लेखक ने कहानी सुनाना शुरू किया – एक शहर की एक ऊँची ईमारत के ग्राउंड फ़्लोर पर रात के तीन बजे जब ज़्यादातर लोग सो रहे थे एक नौजवान घूम घूम कर आवाज़ लगा रहा था सब ठीक ठाक है , सब ठीक ठाक है | कई बार आवाज़ लगाने के बाद उसने आसमान की तरफ़ देखा तो सुबह हो रही थी |
संपादक ने कहा – वाह कितनी कम्पेक्ट लघु कथा तैयार हुई है इसे हम जल्द ही अपनी पत्रिका में छापेगे , आप अपनी एक फ़ोटो भी दे दीजियेगा |
लेखक जब पत्रिका के दफ़्तर से निकल रहा था तब उसकी आंख में खुशी के आंसू थे |
अखतर अली
निकट मेडी हेल्थ हास्पिटल आमानाका , रायपुर ( छत्तीसगढ़ )मो. न. 9826126781





