आज संसद के मानसून सत्र का सातवां दिन है। अमित शाह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर सदन को संबोधित किया और विपक्ष को आड़े हाथों लिया। अमित शाह ने बताया कि पहलगाम हमले के आरोपी तीनों आतंकी ऑपरेशन महादेव में मारे गए हैं। इस मुद्दे पर पहले दिन की चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। इसके अलावा विपक्षी दलों ने सुरक्षा में चूक और जवाबदेही को लेकर सत्ताधारी दल को कटघरे में खड़ा किया।
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने सटीकता से जवाब दिया तो सीजफायर की घोषणा किसने की? भारत को यह सूचना क्यों अमेरिका के राष्ट्रपति से मिली? भारत की विदेश नीति पूरी तरह से फेल है। विश्व गुरु का जो माहौल देश-विदेश में बन रहा है, यह पूरी तरह से फेल है। आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी ने पाकिस्तान को ऋण दिया है। यूएनएससी में आतंकवाद विरोधी समिति का उपाध्यक्ष बना दिया गया। इससे साफ है कि भारत की विदेश नीति फेल है। अगर चीफ डिफेंस स्टाफ ने यह बात कही कि हमारे लड़ाकू विमान गिरें हैं तो कल को इनकी संख्या पता लग ही जाएगी। विमान क्यों गिरे, यह सरकार बताए। सरकार यह बात जानती ही नहीं थी कि चीन पाकिस्तान का समर्थन कर रहा था। यह इंटेलीजेंस फेलियर था। भारत का रक्षा बजट बढ़ाकर तीन फीसदी किया जाए। अग्निवीर योजना को समाप्त किया जाए।
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि सेना ने हमेशा मातृभूमि की रक्षा की है। सेना हमारा अभिमान और सम्मान है। पहलगाम आतंकी हमला भारत की सुरक्षा पर आघात था। सरकार बताए कि आखिरकार पहलगाम में घटना क्यों घटी? क्या भारतीय की जान की कोई कीमत नहीं है। पहलगाम घटना के लिए सरकार जिम्मेदार है। जब पहलगाम हमला हुआ तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति भारत में थे। पहलगाम के अलावा 60 अन्य जगह आतंकियों के निशाने पर थे।
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर ने कहा कि बॉर्डर पर रहने वाले लोगों के बारे में कोई नहीं सोचता। जंग में लोगों का नुकसान होता है। बॉर्डर पर रहने वाले लोगों को कोई मुआवजा या मदद नहीं मिलती। सरकार बॉर्डर बंद कर देती है तो छोटे दुकानदारों का नुकसान होता है। जबकि बड़े कारोबारियों का काम चलता है। सीमापार से ड्रोन और हथियार आ रहे हैं। कानून-व्यवस्था बदहाल हो गई है। स्वर्ण मंदिर को उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। पहलगाम में सुरक्षा में चूक हुई है। भारत-पाकिस्तान मैच हो सकता है तो दलजीत दोसांझ की मूवी क्यों नहीं चल सकती?
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि गृह मंत्री ने कई सारे मुद्दों पर बात की। लेकिन उन्होंने सुरक्षा के मुद्दे पर कोई बात नहीं की। हमले के वक्त मैं श्रीनगर में था तो प्रमुख सचिव ने मुझे दुर्घटना की जानकारी दी। पहले हमें लगा कि कुछ छोटा मोटा होगा, लेकिन बाद में हमें पता लगा कि यह बड़ा आतंकी हमला है। हमले से पहले खुफिया के पास जानकारी थी। जब सरकार ने पर्यटकों से कहा है कि वहां घूमने जाएं तो उनको सुरक्षा मुहैया कराना आपका दायित्व नहीं है।
डीएमके सांसद ए राजा ने कहा कि विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री ने बड़ी-बड़ी बातें की, लेकिन कोई भी तथ्यात्मक बात नहीं थी। भाजपा हमेशा नेहरू, इंदिरा, राजीव और राहुल गांधी के बारे में ही बात करती है। भाजपा बस बड़े-बड़े दावे करती है। पहलगाम हमले को लेकर आतंरिक रिपोर्ट के बावजूद वहां कोई सुरक्षा बल नहीं था। सरकार कहती है कि इंदिरा गांधी गलत थी, नेहरू गलत थे। जब मसूद अजहर को छोड़ा गया तो पीएम अटल बिहारी थे। यह भारत की कूटनीतिक असफलता थी।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि 1972 से लेकर 2007 तक कांग्रेस ने मानेक शॉ को पेंशन तक नहीं दी। कांग्रेस आर्मी चीफ की इज्जत नहीं करती है। 1962 में कांग्रेस ने नेहरू के चचेरे भाई कौल को असम नेपा का हेड बनाया। उस युद्ध में हमारे खिलाफ अमेरिका और चीन थे। जब हम हार गए तो कौल भाग आया। नेहरू ने उस युद्ध में वायुसेना का उपयोग नहीं करने दिया। कांग्रेस ने 1962,1965 और 1971 में कितने एयरक्राफ्ट गिरे यह कभी नहीं बताया। 1948 से पाकिस्तान को आईएमएफ लोन देता रहा, कांग्रेस ने कभी विरोध नहीं दिया। अग पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऋण का विरोध किया। भाजपा के लिए एक-एक नागरिक महत्वपूर्ण है। हर आतंकी को मिट्टी में मिलाएंगे। पीओके को भारत में मिलाएंगे।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि पाकिस्तान को जिन्ना और लियाकत अली ने बनाया। जब लियाकत अली जब देश का कट्टर नागरिक होना चाहता था तो नेहरू ने अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित को मॉस्को राजदूत बनाया तो लियाकत अली दुखी हुआ और उसने भारत को बांट दिया। यही परिवारवाद कांग्रेस को यहां तक ले आया। कांग्रेस के 40 सांसद रूस के लिए मुखबिरी करते थे।
खरगे ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए कहा कि हम पाकिस्तान की निंदा करते रहे हैं, लेकिन हम इधर निंदा करते हैं और आप जाकर उनकी दावत में जाकर उन्हें गले लगा लेते हैं। आप खुद ही गलती करते हैं और दूसरों को पाठ पढ़ाते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। हमारी पार्टी का देश के विकास में बड़ा योगदान है, लेकिन आपके पास एक भी ऐसी उपलब्धि नहीं है। आप पंडित नेहरू को बहुत कोसते हैं। सच बताइए। गृह मंत्री पहलगाम हमले से पहले जम्मू कश्मीर में सुरक्षा हालात की समीक्षा करने गए थे और उन्होंने कहा था कि कश्मीर में सुरक्षा ट्रिपल कर दी गई है, अगर ऐसा है तो पहलगाम में आतंकी कहां से आए? हमले से सिर्फ तीन दिन पहले प्रधानमंत्री ने अपना कश्मीर दौरा रद्द कर दिया था। मैंने पहले भी पूछा था, लेकिन जवाब नहीं मिला कि क्या आपके पास आतंकी हमले की सूचना थी? 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हमला हुआ, लेकिन सरकार कह रही है कि जो कुछ हमने किया, वो सही किया। राहुल गांधी ने पहलगाम हमले को लेकर विशेष सत्र बुलाने की मांग की, लेकिन सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सरकार को बहुत अहंकार है। जवाब देने की फुर्सत नहीं है, लेकिन लोगों को गले पड़ने की फुर्सत है। 1962 में भारत-चीन युद्ध चल रहा था, तब चंद सांसदों की मांग पर विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बुलाया और कहा कि देश की जनता को ये पता चलना चाहिए, लेकिन आप मना कर देते हैं। हमले के बाद प्रधानमंत्री बिहार में चुनाव प्रचार कर रहे थे। 24 अप्रैल को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, उसमें भी पीएम मोदी नहीं आए और सऊदी अरब से आकर बिहार चुनाव प्रचार करने चले गए। क्या प्रधानमंत्री की यही गंभीरता है?
प्रियंका गांधी ने कहा कि ‘मुंबई हमले में शामिल सभी आतंकियों को उसी वक्त मारा गया था। गृह मंत्री ने इस्तीफा दिया था। हमारी जवाबदेही थी देश की जनता के प्रति। देश जवाब चाहता है कि 22 अप्रैल के दिन क्या हुआ और क्यों हुआ। सरकार अपनी पीठ थपथपाती रहती है। संसद में झूठ बोलती है। हम हमले के वक्त एकजुट हुए। देश पर हमला होगा तो हम सभी आपका समर्थन करेंगे। सेना पर हमें गर्व है कि उन्होंने वीरता से लड़ाई लड़ी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर का श्रेय को हमारे प्रधानमंत्री चाहते हैं। ओलंपिक के मेडल का भी श्रेय लेते हैं, लेकिन सिर्फ श्रेय लेने से नहीं होता, जिम्मेदारी भी लेनी होती है। देश के इतिहास में पहली बार हुआ कि जंग होते-होते ही रुक गई और रुकावट का एलान हमारी सरकार और सेना नहीं करती बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति करते हैं! ये सरकार की गैरजिम्मदेारी है।’
‘आज गृह मंत्री ने बताया कि पाकिस्तान के पास शरण में आने के अलावा चारा ही नहीं थी लेकिन आपने शरण दी ही क्यूं? नेहरू गांधी, इंदिरा गांधी ने क्या किया। यहां तक कि मेरी मां के आँसू तक चले गए, लेकिन ये जंग क्यों रुकी इसका जवाब नहीं दिया। मेरी मां के आंसू तब गिरे, जब उनके पति को आतंकवादियों ने शहीद किया। मैं आज पहलगाम हमले के पीड़ितों की बात इसलिए कर रही हूं क्योंकि मैं उनका दर्द समझती हूं। हमारी कूटनीति विफल रही है। तभी पाकिस्तान के जनरल राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बैठकर लंच कर रहे थे। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा क्या प्रधानमंत्री लेंगे? अगर ऑपरेशन सिंदूर में जहाजों का नुकसान नहीं हुआ तो सदन में बताने में क्या हर्ज है? ये सरकार सवालों से बचती है, इसकी राजनीतिक कायरता बेमिसाल है। इनके दिल में जनता के लिए कोई जगह नहीं हैं, सब राजनीति, पीआर और प्रचार है। बहुत समय हो गया बस प्रचार में ही लिप्त हैं। जो पहलगाम में हुआ, उससे हर देशवासी के दिल पर चोट पहुंची है। इसलिए मैं आज यहां खड़े होकर एक आखिरी बात करना चाहती हूं। इस सदन में लगभग सभी के पास सुरक्षा है। हम जहां भी जाते हैं हमें सुरक्षा मिलती है। उस दिन पहलगाम में 26 परिवार उजड़ गए। 26 बेटे, पति, पिता गुजर गए। उनमें से 25 भारतीय थे। जितने भी लोग बायसरन घाटी में थे उनके लिए कोई सुरक्षा नहीं थी। आप कितने भी ऑपरेशन कर डालें आप इस सच्चाई से नहीं छिप सकते।’
इसके बाद प्रियंका गांधी ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए 25 भारतीयों के नाम लिए और अपना वक्तव्य समाप्त किया।
प्रियंका गांधी ने पहलगाम आतंकी हमले के जिम्मेदार टीआरएफ को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘टीआरएफ ने कई आतंकी हमले किए, लेकिन 2023 में उसे आतंकी संगठन घोषित किया गया। एक संगठन इतना बड़ा हमला करता है और सरकार को पता नहीं चला? हमारी एजेंसियां हैं, इनकी जिम्मेदारी कौन लेगा, क्या किसी ने इस्तीफा दिया? खुफिया विभाग गृह मंत्रालय के तहत आता है, क्या गृह मंत्री ने इसकी जिम्मेदारी ली। इतिहास की बात आप करते हैं, मैं वर्तमान की बात करूंगी। 11 साल से तो आपकी सरकार है, आपकी कोई जिम्मेदारी है कि नहीं।’





