देश की राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट के पास वायु प्रदूषण के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन ने उस समय बड़ा मोड़ ले लिया, जब भीड़ में मौजूद दो बहनों के वीडियो सामने आए. इन वीडियो में वे कथित तौर पर नक्सल कमांडर माड़वी हिडमा के समर्थन में नारे लगाती दिखीं. पुलिस की नजर में आते ही सवाल उठने लगे कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में यह नारों का एजेंडा कौन चला रहा था और क्यों?
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, दिल्ली पुलिस को ऐसे कई वीडियो मिले जो पूरी कहानी को और उलझा देते हैं. पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन में शामिल दो बहनें गुरकीरत और रवजोत न सिर्फ कर्तव्य पथ पर हिडमा के समर्थन में नारे लगा रही थीं, बल्कि इससे पहले भी देश-विरोधी माने जाने वाले मंचों से जुड़े इवेंट्स में शामिल रही हैं. यही वजह है कि यह पूरा मामला अब सिर्फ एक पर्यावरण प्रदर्शन नहीं, बल्कि उससे बड़ी साजिश की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच में मिले वीडियो बेहद अहम माने जा रहे हैं. इनमें कुछ फुटेज हैदराबाद के उस कॉन्फ्रेंस रूम के हैं. जहां फरवरी में BSCEM (भगत सिंह छात्र एकता मंच) के छात्र इकट्ठा हुए थे. वीडियो में वे (Radical Student Union) के समर्थन में नारे और गाने गाते दिखते हैं. यह एक ऐसी संस्था है जिसे भारत सरकार 2005 में बैन कर चुकी है.
कौन हैं गुरकीरत और रवजोत?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि वीडियो में दिख रही गुरकीरत और रवजोत दोनों असल में बहनें हैं, और कर्तव्य पथ पर हुए प्रदर्शन में भी सबसे आगे देखी गईं. पुलिस का आरोप है कि:
- दोनों बहनों ने माड़वी हिडमा के समर्थन में नारे लगाए.
- दिल्ली पुलिस से बहस और धक्का-मुक्की की.
- पहले भी कई मंचों पर ऐसे ही नारों और गतिविधियों में शामिल रहीं.
- इनके सोशल मीडिया अकाउंट्स में पुराने पोस्ट इस पैटर्न की पुष्टि करते हैं.
- पुलिस ने दोनों को उनके अन्य साथियों के साथ पकड़कर हिरासत में भेज दिया है.
इंडिया गेट प्रोटेस्ट: क्या था उस दिन का माहौल?
यह प्रदर्शन मूल रूप से दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर था. लेकिन पुलिस के मुताबिक कुछ समूह अचानक नारेबाजी की दिशा बदलने लगे. इससे भीड़ में तनाव फैल गया. हालात तब बिगड़े जब संसद मार्ग थाने के बाहर भी हंगामा शुरू हो गया.

यह प्रदर्शन मूल रूप से दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर था. (फोटो PTI)
पुलिस की नजर में कौन सा एंगल सबसे अहम?
जांच में पुलिस तीन मुख्य मुद्दों पर फोकस कर रही है:
- क्या कुछ प्रदर्शनकारी पहले से बैन संगठनों के समर्थन में शामिल थे?
- क्या पर्यावरण प्रदर्शन को किसी खास दिशा में मोड़ने की कोशिश हुई?
- क्या सोशल मीडिया अकाउंट्स और पुराने इवेंट्स किसी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं?
पुलिस का कहना है कि अभी सभी डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे हैं और पूरे नेटवर्क को समझने में समय लगेगा.
हिडमा एंगल ने क्यों बढ़ाई जांच की रफ्तार?
मालूम हो कि माड़वी हिडमा वही नक्सल कमांडर था, जिसे सुरक्षाबलों के साथ हाल की मुठभेड़ में मार गिराया गया था. वह 76 CRPF जवानों की हत्या के लिए जिम्मेदार माना जाता था. ऐसे में उसके समर्थन में लगे नारों ने पूरे केस की नींव बदल दी. पुलिस अब यह भी जांच रही है कि क्या इन नारों के पीछे कोई संगठित प्रयास था या कुछ प्रदर्शनकारी खुद ही इस विचारधारा से जुड़कर आए थे.





