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*प्रदीप मिश्रा के कुबेरेश्वर धाम मेंभीड़ पर टूट पड़ा अव्यवस्थाओं का कहर, दो की मौत*

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कुबरेश्वर धाम में चार DSP, सात TI समेत 400 पुलिसकर्मी थे तैनात, फिर भी मच गई भगदड़

मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई, जिसमें दो श्रद्धालुओं की दबने से मौत हो गई और कई घायल हो गए। कांवड़ यात्रा में भाग लेने के लिए राजस्थान समेत देशभर से हजारों लोग पहुंचे थे, जिससे व्यवस्था चरमरा गई।सुरक्षा में तैनात चार DSP, सात TI समेत 400 पुलिसकर्मी क्या करते रहे?

सावन मास की पवित्र बेला में सीहोर के कुबेरेश्वर धाम पर उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब मंगलवार को हृदयविदारक हादसे में तब्दील हो गया। भारी सुरक्षा बंदोबस्त और प्रशासनिक दावों के बावजूद रुद्राक्ष वितरण के दौरान अफरातफरी मच गई, जिसमें दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई और कई श्रद्धालु घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब अचानक रुद्राक्ष वितरण को बीच में ही रोक दिया गया, जिससे बेकाबू भीड़ में धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

सीहोर/जयपुर: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले स्थित पंडित प्रदीप मिश्रा के प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में मंगलवार को भारी भीड़ के दौरान अफरा-तफरी मच गई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण धक्का-मुक्की में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 8 से 10 लोग बेहोश होकर अस्पताल पहुंचे। इनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कुबेरेश्वर धाम पहुंचे हुए हैं। कुछ राजस्थानियों के भी घायल होने की सूचना है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

कांवड़ यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, राजस्थान से भी पहुंचे श्रद्धालु

कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की अगुवाई में सावन माह के अंतिम बुधवार को कुबेरेश्वर धाम से चितावलिया हेमा गांव तक कांवड़ यात्रा प्रस्तावित थी। इसमें भाग लेने के लिए एक दिन पहले ही देशभर से हजारों श्रद्धालु पहुंच गए, जिनमें बड़ी संख्या राजस्थान से थी। जयपुर से पहुंचे एक शिव भक्त राजेंद्र पारीक और उनके परिवार के अन्य सदस्य ने बताया कि दर्शन, ठहराव और प्रसादी वितरण की व्यवस्था भारी भीड़ के आगे नाकाफी साबित हुई है। इससे कई जगह भगदड़ जैसे हालात बन गए।

गिरने से हुई मौत, कई घायल

भारी भीड़ के दबाव में तीन लोग नीचे गिर गए, जिनमें से दो की मौत दबने से हो गई। कई लोगों को चक्कर और घबराहट की शिकायत के बाद स्थानीय अस्पताल भेजा गया है। प्रशासन ने मृतकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है और राजस्थान के कुछ श्रद्धालुओं के घायल होने की सूचना है, लेकिन अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विधायक ने जताया दुख, सीएम को दी जानकारी

सीहोर विधायक सुदेश राय ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि मैंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को जानकारी दे दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन की ओर से व्यवस्थाएं थीं, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से अधिक रही। मैं मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लूंगा।

4000 लोगाें की ठहरने की व्यवस्था के दावे, तैयारी धरी रह गई

प्रशासन और आयोजकों ने चार हजार से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था के दावे किए थे, लेकिन एक दिन पहले ही भारी भीड़ से हालात बेकाबू हो गए। पार्किंग और डायवर्जन प्लान तय तो था, पर घटना के वक्त तक लागू नहीं हुआ था।

पहले भी हो चुकी हैं मौतें

करीब दो साल पहले कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान भी इसी तरह की अफरा-तफरी में एक बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है। तब भी प्रशासन की तैयारियां सवालों के घेरे में थीं। इस बार की घटना ने फिर वही चिंता खड़ी कर दी है।

Sehore Kubreshwar Dham Stampede: Despite 400 Cops Deployed, Chaos Erupted During Rudraksha Distribution

कुबेरेश्वरधाम भगदड़ के बाद यातयात हुआ बाधित

बड़ी संख्या में तैनात थे पुलिसकर्मी, फिर भी फेल हुई व्यवस्था
कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 400 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जिनमें 4 डीएसपी, 7 थाना प्रभारी (टीआई) और 30 सब-इंस्पेक्टर शामिल थे। इसके बावजूद जब रुद्राक्ष वितरण अचानक रोका गया तो प्रशासन भीड़ को संभालने में नाकाम रहा। चंद मिनटों में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भीड़ में दबने से दो महिलाओं की जान चली गई। यह घटना न सिर्फ प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि धार्मिक आयोजनों की योजना और प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

Sehore Kubreshwar Dham Stampede: Despite 400 Cops Deployed, Chaos Erupted During Rudraksha Distribution

अस्पताल में शवों की पहचान करने पहुंचे लोग

धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, लेकिन धराशायी हो गईं व्यवस्थाएं
छह अगस्त को निकली जाने वाली कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कांवड़ यात्रा में शामिल होने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु सीहोर पहुंचे हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत और बेंगलुरु जैसे महानगरों से आए भक्तों से पूरा इलाका भर गया है। नतीजन, धार्मिक स्थलों, धर्मशालाओं, होटलों और लॉजों में तिल भर जगह नहीं बची। भोजन, पानी, रुकने और दर्शन की व्यवस्थाएं भीड़ के सामने पूरी तरह टूट गईं।

Sehore Kubreshwar Dham Stampede: Despite 400 Cops Deployed, Chaos Erupted During Rudraksha Distribution

इलाज के लिए अस्पताल पहुंचीं घायल महिलाएं

अस्पताल में हुई मौत की पुष्टि, मृतकों की पहचान जारी
हादसे में घायल श्रद्धालुओं को तत्काल जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो महिलाओं को मृत घोषित कर दिया। दोनों की उम्र लगभग 50 वर्ष बताई गई है। फिलहाल मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई है, जबकि दो अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने हादसे के बाद मेडिकल सुविधाओं को सक्रिय किया, लेकिन घटनास्थल पर प्राथमिक चिकित्सा टीमों की अनुपस्थिति ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया।

Sehore Kubreshwar Dham Stampede: Despite 400 Cops Deployed, Chaos Erupted During Rudraksha Distribution

अस्पताल में अपनों को खोजते परिजन

अधिकारियों ने लिया था जायजा, फिर भी नहीं रोक पाए हादसा
घटना से ठीक एक दिन पहले अपर कलेक्टर वृंदावन सिंह और एसडीएम तन्नय वर्मा ने कुबेरेश्वर धाम में पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया था। पर वास्तविकता यह रही कि जब भीड़ ने विकराल रूप लिया तो समन्वय और नियंत्रण की पूरी प्रणाली चरमरा गई। न तो पर्याप्त पुलिस बल वहां मौजूद था और न ही त्वरित राहत पहुंचाने वाली टीमें।

पुलिस ने भगदड़ से किया इनकार, लेकिन मौतों की पुष्टि
एएसपी सुनीता रावत ने घटना को भगदड़ मानने से इनकार किया है, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि रुद्राक्ष वितरण के रुकने से उपजे तनाव में धक्का-मुक्की हुई, जिसमें दो महिलाओं की मौत और तीन-चार अन्य के घायल होने की पुष्टि हुई है। हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि भीड़ पूरी तरह बेकाबू हो गई थी और वहां से निकलना भी मुश्किल हो गया था।

Ramswaroop Mantri

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