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*मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय,बच्चों का स्कूल जाना बंद*

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5600 भवन जर्जर, 67 हजार में फर्नीचर और 15 हजार विद्यालयों में बिजली तक नहीं

 मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय है। इन स्कूलों में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। राजगढ़ जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय धनिया खेड़ी की छत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। लोगों का कहना है कि सरकार यहां भी राजस्थान के झालावाड़ जैसा कांड होने का इंतजार कर रही है। इस स्कूल में करीब 43 बच्चे पढ़ते हैं।

 मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। राज्य शिक्षा विभाग के हालिया आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के हजारों स्कूल बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कहीं भवन जर्जर हैं तो कहीं बिजली, फर्नीचर और शौचालय की सुविधा नहीं है। इस बदहाल स्थिति ने न केवल छात्रों की शिक्षा पर असर डाला है बल्कि उनकी सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया है।

स्कूल की बिल्डिंग की छत बारिश के कारण झूल गई है। इतना ही नहीं छत से लगातार गिट्टी और मैटेरियल गिर रहा है। शनिवार को भी सुबह 6 से बड़ी मात्रा में मलबा गिरा। गनीमत रही कि वहां पर कोई बच्चा मौजूद नहीं था। बताया जा रहा है कि पिछले साल भी छत से मालवा गिरा था, लेकिन प्रशासन ने छत की मरम्मत करवा कर पल्ला झाड़ लिया था। अब हालत यह है कि लगातार छत से पानी का रिसाव होने के कारण छत कमजोर हो गई जो कभी भी गिर सकती है। पानी टपकने से बचने के लिए शिक्षा विभाग ने छत को प्लास्टिक से ढक दिया है।

राजस्थान जैसा कांड होने का डर

छत से मलबा गिरने के कारण अब ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है। उन्हें डर है कि राजस्थान के झालावाड़ जैसा कांड यहां भी न हो जाए। बताया जा रहा है कि ब्यावरा के शासकीय प्राथमिक विद्यालय धनियाखेड़ी की छत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे छत को प्लास्टिक से ढक दिया गया है। जबकि नीचे से लगातार छत का मालवा गिर रहा है। जिससे बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।

10 स्कूलों की सूची हुई प्राप्त

ब्यावरा एसडीएम गीतांजलि शर्मा ने बताया कि जर्जर स्कूलों में क्लास नहीं लगाने को लेकर पूर्व में ही अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। वहीं जहां पर स्थिति ज्यादा गंभीर है। वहां दूसरी जगह पर स्कूल लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

हाल ही में भोपाल के बरखेड़ा स्थित एक पीएमश्री स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से एक छात्रा घायल हो गई थी। यह घटना कोई अपवाद नहीं है, बल्कि प्रदेश भर में स्कूलों की जर्जर इमारतें छात्रों और स्टाफ के लिए खतरे का संकेत हैं।

स्कूलों में न केवल संरचनात्मक कमी है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का भी गंभीर अभाव है। 15,651 स्कूलों में अब तक बिजली की सुविधा नहीं है, जबकि 67,034 स्कूलों में फर्नीचर की कमी है। इतना ही नहीं, 61,068 स्कूलों में प्रधानाध्यापक कक्ष भी मौजूद नहीं है।

शौचालय की स्थिति भी बेहद खराब है। 2,787 स्कूलों में बालिका शौचालय ही नहीं है, और 9,833 स्कूलों में बालिका शौचालय कार्यरत नहीं हैं। बालकों के लिए भी 3,116 स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, जबकि 11,390 स्कूलों में ये निष्क्रिय हैं।

39,722 स्कूलों में बाउंड्री वॉल नहीं है, जिससे सुरक्षा की स्थिति भी कमजोर हो जाती है। 4,978 स्कूलों में खेल मैदान तक उपलब्ध नहीं है, जो बच्चों की समग्र विकास प्रक्रिया को बाधित करता है।

647 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है और 14,423 स्कूलों में हैंडवॉश यूनिट नहीं है, जिससे साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।

भोपाल की ही बात करें तो यहां 858 सरकारी स्कूलों में से 120 में बिजली नहीं है, 44 में बालिका शौचालय नहीं है, और 464 स्कूलों में फर्नीचर की भारी कमी है।

राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह के अनुसार, प्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का आकलन किया जा रहा है। जर्जर भवनों के नवीनीकरण के लिए बजट जल्द जारी किया जाएगा।

Ramswaroop Mantri

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