रूस ने एक बार फिर भारत को Su-57 लड़ाकू विमानों का ऑफर दिया है। इसमें कहा गया है कि वह भारत में इस लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए भी तैयार है। Su-57 का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पुराने प्लांट में किया जा सकता है, जिससे लागत घटेगी।

मॉस्को: रूस ने भारत को अपनी पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति और स्थानीय उत्पादन के लिए एक प्रस्ताव सौंपा है। इसकी जानकारी रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने दी है। उसने सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा है कि इस प्रस्ताव में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के तहत भारत में ही उत्पादन के लिए प्लांट लगाना भी शामिल है। इसके अलावा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से भारत को S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी को लेकर भी नई जानकारी दी गई है। भारत ने रूस से S-400 की पांच रेजिमेंट खरीदने की डील की थी, जिसमें से तीन की डिलीवरी की गई है, जबकि दो अटके हुए हैं।
S-400 डिलीवरी पर बड़ी खबर
रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अतिरिक्त S-400 प्रणालियों के लिए बातचीत पहले से ही चल रही है। TASS ने रूस की संघीय सैन्य-तकनीकी सहयोग सेवा के प्रमुख दिमित्री शुगायेव के हवाले से कहा, “भारत के पास पहले से ही हमारा S-400 सिस्टम है। इस क्षेत्र में भी हमारे सहयोग का विस्तार करने की संभावना है। इसका मतलब है कि नई आपूर्तियाँ। फिलहाल, हम बातचीत के चरण में हैं।” भारत ने 2018 में रूस के साथ पांच S-400 रेजिमेंट के लिए 5.5 अरब डॉलर का समझौता किया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस सौदे में बार-बार देरी हुई है। अब रूस ने बताया कि बाकी बचे S-400 को 2026 और 2027 में डिलीवर कर दिया जाएगा।
रूस ने सुखोई Su-57 के भारत में निवेश के स्तर का निर्धारण करने के लिए अध्ययन भी शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि रूस नासिक में पहले से ही ऑपरेशनल हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के Su-30 MKI निर्माण प्लांट का इस्तेमाल कर सकता है। भारत में कई अन्य मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट भी हैं, जहां रूसी मूल के कई अन्य सैन्य उपकरणों का निर्माण किया जाता है। ऐसे में रूस की कोशिश इन पुराने प्लांट से काम चलाकर Su-57 के निर्माण लागत को कम करना भी है, ताकि बजट पर अतिरिक्त बोझ कम किया जा सके।
रूस सबसे बड़ा सुरक्षा साझेदार
रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बना हुआ है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 और 2024 के बीच भारत के हथियारों के आयात में रूस का हिस्सा 36% था। इसके बाद फ्रांस का 33% और इजरायल का 13% हिस्सा था। भारत और रूस का बहुत पुराना सैन्य सहयोग है। इसमें टी-90 टैंकों और सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से लेकर ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम और Ak-203 के संयुक्त उत्पादन भी शामिल है।





