कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की उस किताब को संसद में कोट करने की कोशिश की, जो पब्लिश ही नहीं हुई. इस पर जमकर हंगामा हुआ और संसद नहीं चल पाई. लेकिन आज से तकरीबन 60 साल पहले एक जनरल ने ऐसी ही किताब लिखी थी, जिसने नेहरू सरकार की नींव हिला दी थी. हालात यहां तक पहुंच गए थे कि कांग्रेस सांसद जनरल को अरेस्ट करने पर अड़ गए थे.यह कहानी लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल की है, जिनकी किताब ‘The Untold Story’ ने नेहरू सरकार की नींव हिला दी थी. इसमें 1962 चीन-भारत युद्ध के दौरान की वो कहानियां हैं, जो 4 कोर कमांडर रहते हुए जनरल कौल ने महसूस की थीं.

किताब का नाम था ‘द अनटोल्ड स्टोरी’ (The Untold Story), जिसे लेफ्टिनेंट जनरल बीएम कौल ( रिटायर्ड) ने लिखी थी. 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जनरल बीएम कौल 4 कोर के जनरल कमांडिंग ऑफिसर थे. उस वक्त उनकी कोर को हार मिली थी और बाद में इसी की वजह से उन्होंने सेना से इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद जनरल कौल ने अपनी किताब में पूरी जानकारी लिखी. मार्च 1967 में जब यह किताब पब्लिश हुई तो हंगामा मच गया. राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद इतने भड़के हुए थे कि उन्होंने एक्शन लेने की मांग तक कर डाली.
क्या लिखने से पहले अनुमति मांगी थी?
राज्यसभा आकाईव बताती है कि कांग्रेस नेता एमपी भार्गव ने कुछ अन्य सांसदों के साथ रक्षा मंत्री से सवाल किया कि क्या सरकार का ध्यान लेफ्टिनेंट जनरल कौल की पुस्तक की ओर नहीं है. क्या उन्होंने इसे पब्लिश करने के लिए सरकार से पूर्व अनुमति मांगी थी? सांसद यह भी जानना चाहते थे कि क्या लेफ्टिनेंट जनरल कौल ने प्रकाशन से पहले किताब स्क्रिप्ट सरकार को सौंपी थी?
रक्षामंत्री ने क्या दिया था जवाब?
तत्कालीन रक्षा मंत्री स्वर्ण सिंह ने राज्यसभा सदस्यों को बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल कौल ने न तो पुस्तक प्रकाशित करने की अनुमति मांगी थी और न ही कोई स्क्रिप्ट सौंपी थी. इससे कांग्रेस सांसद इतने नाराज हुए कि उन्होंने जनरल कौल की गिरफ्तारी की मांग की. सांसदों ने यह भी पूछा कि क्या रक्षा कर्मी उस सामग्री का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं जो सेवा में रहने के दौरान उनके संज्ञान में आई थी, या क्या ऐसे कोई निर्धारित नियम हैं जिनके तहत उन्हें उस सामग्री का उपयोग करने से पहले सरकार की अनुमति लेनी पड़ती है. इस पर सिंह ने उत्तर दिया कि जब तक रक्षा कर्मी सेवा में हैं, उन्हें अनुमति लेने की आवश्यकता है. रक्षा मंत्री ने कहा, लेकिन उनके रिटायरमेंट के बाद ऐसी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती. लेकिन देश का कानून अभी भी लागू है, यानी ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के भीतर आने वाली कोई भी चीज एक अपराध होगी और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कार्रवाई योग्य होगी.
कांग्रेस सांसदों ने पूछा-इन्हें रोका क्यों नहीं जा रहा?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य कांग्रेस सांसद, राजेंद्र प्रताप सिन्हा ने रक्षा मंत्री से पूछा कि ‘सेवानिवृत्त सैन्य जनरलों’ को उस ज्ञान या उस गुप्त जानकारी का उपयोग करने से रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है, जो उनकी सेवा के परिणामस्वरूप उनके पास है, ताकि वे अपना विवरण प्रकाशित न कर सकें. स्वर्ण सिंह ने कहा कि सरकार पुस्तक के विभिन्न अंशों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या किसी ऐसी सामग्री का उपयोग किया गया है जो गुप्त या अति-गुप्त (secret or top secret) प्रकृति की है और क्या वह आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के अंतर्गत आती है.
कांग्रेस सांसद लोकनाथ मिश्रा ने यह जानना चाहा कि लेफ्टिनेंट जनरल कौल को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, क्योंकि प्रथम दृष्टया उन्होंने रक्षा मंत्रालय के कामकाज, उसकी खामियों और दोषों को उजागर कर दिया था. मिश्रा ने कहा, मैं उन्हें दुश्मन का मुखबिर मानता हूं और वह अभी भी स्वतंत्र है और उसे हिरासत में नहीं लिया गया है. उत्तर प्रदेश से कांग्रेस सांसद जी. मुराहरी ने लेफ्टिनेंट जनरल कौल को डबल एजेंट घोषित कर दिया. रक्षा मंत्री ने कहा कि पुस्तक की सावधानीपूर्वक जांच के बाद जो भी कार्रवाई की जानी है, वह की जाएगी.
नेहरू, मेनन और हेंडरसन ब्रुक्स रिपोर्ट
जैसे आज राहुल गांधी नरवणे की किताब के जरिए मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं, 1967 में सांसदों ने कौल की किताब के जरिए पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू और रक्षा मंत्री वी.के. कृष्ण मेनन की भूमिका पर सवाल उठाए थे. सांसदों ने पूछा था कि जब कौल ने इतने गंभीर आरोप लगाए हैं, तो सरकार ‘हेंडरसन ब्रुक्स कमेटी रिपोर्ट’ को सार्वजनिक क्यों नहीं करती? हैरानी की बात है कि वह रिपोर्ट आज भी गुप्त है.





