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 *सरकार बताए : वक्फ संशोधन अधिनियम पर जो आपत्तियां दर्ज की गई है, उसपर उनका क्या कहना है*

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सीजेआई ने कहा-कानून हमारे सामने, हम ही सुनाएंगे फैसला

वक्फ संशोधन अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट ने आज दो बातें कही हैं-पहली यह कि सरकार ‘वक्फ बाय यूजर’ के प्रावधान को अभी हटा नहीं सकती है और दूसरी यह कि वक्फ कौंसिल में अभी कोई नियुक्ति नहीं हो सकती है. विधायिका और न्यायपालिका के शीर्ष पर इस तरह का टकराव कई बार देखने को मिलता है. कोर्ट के इन दो बातों का अर्थ क्या है? क्या यह मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका और अधिनियम के खिलाफ अपील दायर करने वालों की बड़ी जीत है, आइए समझते हैं

‘वक्फ बाय यूजर’ की व्यवस्था को फिलहाल सरकार हटा नहीं सकती है और ना ही वक्फ कौंसिल में अभी किसी भी तरह की नियुक्ति हो सकती है. यह विचार आज सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम 2025 में किए गए संशोधनों के खिलाफ दर्ज आपत्तियों पर सुनवाई करते हुए दिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को सात दिनों का समय देते हुए यह कहा है कि वह यह बताए कि वक्फ संशोधन अधिनियम पर जो आपत्तियां दर्ज की गई है, उसपर उनका क्या कहना है.

सुप्रीम कोर्ट ने आज जो कुछ कहा है उसका अर्थ समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि भारतीय संविधान में विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच कार्यों का बंटवारा किस तरह किया गया है. विधायिका को संविधान ने कानून बनाने का अधिकार दिया है, तो न्यायपालिका के पास यह अधिकार है कि वह उस कानून को रिव्यू करे, ताकि कोई भी ऐसा कानून देश में लागू ना हो, जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ हो. यही वजह है कि जब चार अप्रैल को राज्यसभा से वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पास हुआ और उसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई, तो कुछ सांसद और संगठन अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के पास यह अधिकार है कि वह विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों की समीक्षा करे. अपने इसी अधिकार का उपयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट को जो कुछ प्रथम दृष्टया प्रतीत हुआ है उसके आधार पर कोर्ट ने अपना मंतव्य या राय प्रकट किया है, यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय नहीं है. सुप्रीम कोर्ट अपना निर्णय तब सुनाएगा, जब उसके पास केंद्र सरकार का जवाब होगा. यानी वफ्फ संशोधन अधिनियम के दोनों पक्षों की बात सुनकर ही कोर्ट कोई फैसला सुनाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने अभी अपना फैसला नहीं सुनाया है

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को वक्फ अधिनियम 2025 पर आई आपत्तियों पर अपना जवाब 7 दिनों के अंदर दाखिल करने को कहा है, इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि कोर्ट ने अभी अपना फैसला नहीं सुनाया है. कोर्ट ने अपनी राय दी है और कहा है कि वक्फ बाय यूजर की व्यवस्था को अधिनियम से नहीं हटाया जाना चाहिए क्योंकि 14वीं-15वीं शताब्दी में बने मस्जिदों की डीड उपलब्ध कराना संभव नहीं है. साथ ही कोर्ट ने कौंसिल में नई नियुक्तियों को भी अभी रोकने की बात कही है. कोर्ट के इस आदेश के बारे में विस्तार से समझाते हुए झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा ने बताया कि आज सुप्रीम कोर्ट ने जो कुछ कहा है वह उनका आदेश नहीं है, बल्कि उनका विचार है. शीर्ष कोर्ट को प्रथम दृष्टया यह लगा है कि अगर वक्फ बाय यूजर को हटा दिया जाए तो यह सही नहीं होगा, तो उन्होंने अपनी राय दी है, यह आदेश नहीं है. कोर्ट अब केंद्र सरकार के जवाब को देखेगा, उसके बाद भी अगर कोर्ट को लगेगा कि वक्फ बाय यूजर के प्रावधान को हटाया जाना चाहिए तो वह आदेश जारी करेगा.

कोर्ट के आदेश के बाद क्या होगी स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार के अपने फैसले में वक्फ बाय यूजर को बरकरार रखने की बात कही है. इसपर अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा बताते हैं कि कोर्ट अगर इस व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आदेश जारी कर देता है, तो यह मोदी सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, क्योंकि कोर्ट के आदेश को मानने केलिए केंद्र सरकार बाध्य है, तबतक,जबतक कि विधायिका विधायी प्रकिया से कोई नया कानून ना पारित कर दे, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ऊपर हो जाए. जैसा कि शाहबानो प्रकरण में हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि शाहबानो को गुजारा भत्ता दिया जाना चाहिए, लेकिन इस आदेश को विधायिका ने नया नून बनाकर निरस्त कर दिया था.

क्या है वक्फ बाय यूजर

वक्फ अधिनियम 2025 में वक्फ बाय यूजर के प्रावधान को हटा दिया गया है. पुराने कानून में यह व्यवस्था थी कि अगर किसी संपत्ति को यूजर लंबे समय से इस्तेमाल कर रहा है, तो वह उसे बिना दस्तावेज के भी वक्फ कर सकता है. चूंकि 2025 के संशोधन में इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है और कहा जा रहा है कि पुराने मस्जिदों और कब्रिस्तानों की सेल डीड कहां से लाई जाएगी.

वक्फ संशोधित कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सुनवाई की. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनुसिंघवी और राजीव धवन ने मुस्लिम याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलीलें पेश की. वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार का पक्ष रखा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वक्‍फ कानून पर रोक लगाने से इनकार कर द‍िया. मामले की सुनवाई गुरुवार को भी होगी.

नए वक्फ (संशोधित) अधिनियम 2025 के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच इस मामले में दायर 70 याचिकाओं पर सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट में असदुद्दीन ओवैसी, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनुसिंघवी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सहित अन्य याचिकाकर्ता के वकीलों ने बहस की. वक्‍फ कानून पर लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट अंतर‍िम आदेश देने जा रहा था. सीजेआई ने पहले कहा, हम अंतर‍िम आदेश जारी करने जा रहे हैं. हमारा अंतरिम आदेश इक्विटी को संतुलित करेगा. हम कहेंगे कि जो भी संपत्तियां कोर्ट ने वक्फ घोषित की हैं, उन्हें गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा या उन्हें गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा.. चाहे वह उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ हो या नहीं. कलेक्टर कार्यवाही जारी रख सकते हैं.. लेकिन प्रावधान प्रभावी नहीं होगा. बोर्ड और परिषद के संबंध में.. पदेन सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं लेकिन अन्य सदस्य मुस्लिम होने चाहिए. हालांक‍ि बाद में कोर्ट ने इस पर कोई आदेश नहीं द‍िया. मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को भी होगी.

इन याचिकाओं में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की कई धाराओं को संविधान विरोधी बताते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की गई है. वहीं वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के समर्थन में कई राज्यों ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

छत्तीसगढ़, असम, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान ने अर्जी दाखिल कर मामले में पक्षकार बनने की अनुमति मांगी है. इन राज्यों ने वक्फ कानून को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की इस दलील का विरोध किया कि वक्फ संशोधन अधिनियम संविधान का उल्लंघन करता है. उधर केंद्र सरकार को भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट संसद से पारित इस कानून को गिराएगा नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा मामला कोर्ट में है, और फैसला यहीं होगा.

बहस के बाद अरशद मदनी ने क्‍या कहा?

जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय में वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर बहस की. मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मौजूदा वक्फ कानून संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और धार्मिक मामलों में दखलंदाजी करता है. यह देश की एकता और अखंडता के लिए बेहद खतरनाक है. मुसलमान अपने धार्मिक मामलों में किसी भी तरह की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं कर सकते. इस बिल का फायदा उठाकर सांप्रदायिक ताकतें देश की शांति और एकता को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं. यह कानून ऐसे समय लाया गया है जब पूरे देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत की आंधी चल रही है.

सरकार ने अंतर‍िम आदेश जारी करने का क‍िया विरोध

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा क‍ि वे अंतर‍िम आदेश जारी करने जा रहे हैं. सीजेआई ने कहा, हमारा अंतरिम आदेश इक्विटी को संतुलित करेगा. हम कहेंगे कि जो भी संपत्तियां कोर्ट ने वक्फ घोषित की हैं, उन्हें गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा या उन्हें गैर-वक्फ नहीं माना जाएगा.. चाहे वह उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ हो या नहीं. कलेक्टर कार्यवाही जारी रख सकते हैं.. लेकिन प्रावधान प्रभावी नहीं होगा. बोर्ड और परिषद के संबंध में.. पदेन सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं। लेकिन अन्य सदस्य मुस्लिम होने चाहिए.

:वक्‍फ कानून पर अंत‍र‍िम आदेश जारी नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में वक्‍फ कानून पर सुनवाई के बाद अंतर‍िम आदेश जारी नहीं क‍िया जाएगा. इस मामले की सुनवाई कल भी जारी रहेगी. उसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे का फैसला लेगी. शुक्रवार को 2 बजे इस मामले की सुनवाई होगी.

:सरकार की दलील, पहले वक्‍फ बोर्ड में सिर्फ शिया और सुन्‍नी थे, अब सबको जगह मिलेगी

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार ने कहा कि पहले वक्‍फ बोर्ड में सिर्फ शिया और सुन्‍नी थे. अब सभी संप्रदाय के लोगों को इसमें जगह मिलेगी. सरकार के वकील तुषार मेहता ने साफ कहा, वक्फ अभी भी निलंबित है, लेकिन कोई भी यह नहीं कहता कि उपयोग बंद हो जाएगा. ये राजस्व कार्यवाही है, और अगर कोई प्रतिकूल कब्जा करना चाहता है, तो वे उपाय की मांग कर सकते हैं.

क्‍या आप गैर ह‍िन्‍दुओं को भी ह‍िन्‍दुओं के बोर्ड में ह‍िस्‍सा देंगे-सीजेआई का केंद्र से सवाल

सीजेआई ने केद्र सरकार के वकील तुषार मेहता से पूछा, यदि आप उस रास्ते पर जा रहे हैं, तो क्या आप गैर हिंदुओं को भी हिंदू बंदोबस्ती बोर्ड का हिस्सा बनने की अनुमति देंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा, वक्‍फ बाई यूजर क्‍यों हटाया?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी तीखे सवाल पूछे. सीजेआई ने एसजी तुषार मेहता से कहा, वक्‍फ बाई यूजर क्‍यों हटाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 14,15वीं सदी की अधिकांश मस्जिदों में बिक्री विलेख नहीं होगा. अधिकांश मस्जिदें वक्‍फ बाई यूजर होंगी.इस पर एसजी ने कहा कि उन्हें इसे पंजीकृत करवाने से किसने रोका? सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि अगर सरकार कहने लगी कि ये जमीनें सरकारी हैं तो क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट में एसजी की दलीलों पर जजों के सवाल

एसजी मेहता ने कहा कि मैं कानून पर बात कर रहा हूं धार्मिक व्यवस्था पर नहीं. सीजेआई ने कहा कि हम केवल उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ पर हैं. जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा कि ट्रस्ट का उदाहरण न दें, सबसे अधिक संभावना हिंदू बंदोबस्ती की होगी, हिंदू समुदाय ही इसका प्रशासन करता है. मेहता ने कहा कि वे किसी भी तरीके से शासित होते हैं, लेकिन अंततः यह वैधानिक द्वारा शासित होता है. सीजेआई ने कहा कि हमें एक उदाहरण दें. मेहता ने कहा ठीक है इस पर नहीं जाते हैं.

एसजी तुषार मेहता: आप कानून से निपट रहे हैं. एक संयुक्त संसदीय समिति थी. 38 बैठकें हुईं. इसने कई क्षेत्रों का दौरा किया.. इसने 98.2 लाख ज्ञापनों की जांच की. फिर यह दोनों सदनों में जाता है और फिर कानून पारित किया गया. एसजी: उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ के संबंध में सीजेआई: क्या आप एससी फैसले द्वारा स्थापित उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ कह रहे हैं और कोई विवाद नहीं है… यह अब शून्य है?

एसजी: नहीं… सही वैधानिक योजना नहीं. मैं एक हिंदू हूं और मान लीजिए कि मैं एक ट्रस्ट बनाता हूं… यहां वक्फ सर्वशक्तिमान अल्लाह को समर्पित है.

सीजेआई: हम केवल वक्फ पर उपयोगकर्ता एसजी द्वारा हैं: कृपया वक्फ काउंसिल, बोर्ड और वक्फ को सहन करें.

न्यायमूर्ति विश्वनाथन: निकटतम उदाहरण हिंदू धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम है.. वे कह रहे हैं कि हिंदू समुदाय इसे प्रशासित कर रहा है

एसजी: नहीं, नहीं, मैं उदाहरण नहीं देना चाहता.. गैर-हिंदुओं के साथ तिरुपति बोर्ड ..

सीजेआई: हिंदुओं के धार्मिक बंदोबस्त के अनुसार कोई और हिस्सा नहीं है.

सीजेआई: वक्फ संपत्ति क्यों या क्यों नहीं… अदालत को यह तय करने की अनुमति दें.

एसजी: वक्फ का पंजीकरण हमेशा अनिवार्य रूप से आवश्यक था. यहां तक कि यूजर द्वारा वक्फ को भी रजिस्ट्रेशन कर वक्फ से गुजरना पड़ा. 1995 के अधिनियम में भी यह अनिवार्य है. मिस्टर सिब्बल का कहना है कि मुत्तवली जेल जाएगी… वह 1995 से जेल जा रहे हैं यदि पंजीकरण नहीं कराया जाता है.

केंद्र सरकार की वक्फ पर दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें शुरू कीं. उन्होंने कहा- यह सिर्फ एक कानून नहीं है, यह जेपीसी द्वारा विचार-विमर्श के बाद आया है. उन्होंने 98 लाख से ज़्यादा ज्ञापनों पर विस्तृत चर्चा की. एसजी मेहता ने नए कानून पर रोक की मांग को लेकर दलील नहीं सुनूंगा: सीजेआई

अभिषेक मनु सिंघवी के बाद कुछ और याचिकाकर्ताओं ने कानून पर रोक की मांग की जिसपर CJI ने कहा कि अब वह कानून पर रोक की मांगी को लेकर किसी याचिकाकर्ता को नहीं सुनेंगे. सीजेआई ने कहा कि बस हो गया, अब हमें मौका दीजिए.

मैं आवश्यक धार्मिक तर्क से भटक रहा हूं… वक्फ कानून पर SC से क्यों बोले अभिषेक मनुसिंघवी

अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि वक्फ संसोधित अधिनियम के रूल 3( 3)(डीए) में कलेक्टर को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है. लोगों को अधिकारी के पास जाने के लिए बनाया गया है.

सिंघवी ने कहा कि अनुच्छेद 25 और 26 को पढ़ने से ज्यादा अनुच्छेद 32 क्या है, यह ऐसा मामला नहीं है जहां मीलॉर्ड्स को हमें HC भेजना चाहिए.

वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 26 देखें, मैं आवश्यक धार्मिक तर्क से भटक रहा हूं, यह यहां महत्वपूर्ण नहीं है. कृपया धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के बीच अंतर देखें, इसमें धार्मिक आवश्यक अभ्यास के प्रश्न का उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है.

ramswaroop mantri

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