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 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में चीन की सफलता से हिली दुनिया

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टेलीग्राम के संस्थापक पावेल ड्यूरोव ने दावा किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में चीन की सफलता उसकी सोवियत-शैली की शिक्षा प्रणाली का परिणाम है, जो मजबूत प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है. उन्होंने पश्चिमी स्कूलों की तुलना में, जो “भावनाओं को बचाने के लिए ग्रेड छुपाते हैं,” चीन की शिक्षा प्रणाली की प्रशंसा की.

एक्स पर एक पोस्ट में ड्यूरोव ने लिखा, “अगर अमेरिका अपनी शिक्षा प्रणाली में सुधार नहीं करता है, तो वह चीन को तकनीकी नेतृत्व सौंपने का जोखिम उठाता है.” उन्होंने चीनी एआई स्टार्टअप डीपसीक पर अपने विचार साझा करते हुए एक लंबा नोट भी जोड़ा.

चीनी शिक्षा प्रणाली की श्रेष्ठता

ड्यूरोव ने कहा कि चीनी स्टार्टअप ने कई लोगों को आश्चर्यचकित किया कि वह कितनी जल्दी एआई के मामले में अमेरिका, विशेषकर ओपनएआई के बराबर पहुंच गया. उन्होंने कहा, “एल्गोरिथम दक्षता में चीन की प्रगति बिना किसी कारण के नहीं हुई है. चीनी छात्र लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में गणित और प्रोग्रामिंग में दूसरों से बेहतर प्रदर्शन करते रहे हैं. जब गणित और विज्ञान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को तैयार करने की बात आती है, तो चीन की माध्यमिक शिक्षा प्रणाली पश्चिम की तुलना में बेहतर है. यह छात्रों के बीच भयंकर प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है, एक सिद्धांत जो अत्यधिक कुशल सोवियत प्रणाली से लिया गया है.”

पश्चिमी और चीनी स्कूलों की तुलना

ड्यूरोव ने दावा किया कि अधिकांश पश्चिमी स्कूल प्रतिस्पर्धा को हतोत्साहित करते हैं और छात्रों को दबाव से बचाने के लिए छात्रों के ग्रेड को सार्वजनिक रूप से साझा करने से भी बचते हैं. उन्होंने तर्क दिया कि हालांकि इस तरह के कदम समझ में आते हैं, लेकिन वे सर्वश्रेष्ठ छात्रों को भी हतोत्साहित करते हैं. उन्होंने कहा, “जीत और हार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. हारने वालों को खत्म करें – और आप विजेताओं को खत्म कर देते हैं. सभी छात्रों को यह कहना कि वे प्रदर्शन की परवाह किए बिना चैंपियन हैं, भले ही दयालु लगे – जब तक आप यह नहीं सोचते कि स्नातक होने के बाद वास्तविकता कितनी जल्दी इस भ्रम को चकनाचूर कर देगी.”

वास्तविकता का सामना करने की वकालत

उन्होंने वास्तविकता में जीने की वकालत की, जहां, अच्छी नीयत वाली स्कूल नीतियों के विपरीत, सार्वजनिक ग्रेड और रैंकिंग होती है. उन्होंने कहा, “डीपसीक की श्रेष्ठता को प्रदर्शित करने वाले एआई बेंचमार्क ऐसी ही एक सार्वजनिक रैंकिंग है. और भी आ रहे हैं. जब तक अमेरिकी माध्यमिक शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल सुधार नहीं होता, तकनीक में चीन का बढ़ता प्रभुत्व लगता है.”

डीप​सीक से दुनिया में तहलका मचाने वाले लियांग वेनफेंग कौन हैं?

एक इंस्पिरेशनल लाइन है- मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे. चार साल पहले की बात है. AI की दुनिया में अमेरिका काफी तेजी से काम कर रहा था, वहीं दूसरी ओर चीन का एक जुनूनी युवा भी क्रांति की तैयारी कर रहा था. उसने खामोशी से मेहनत जारी रखी और आज उसकी सफलता ने पूरी दुनिया में शोर मचा दिया है.

इस युवा का नाम है- लियांग वेनफेंग (Liang Wenfeng). साल 2021 में अमेरिकी सरकार, चीन को अमेरिकी चिप एक्‍सपोर्ट पर नकेल कसने की तैयारी में थी और लियांग ताबड़तोड़ टेक कंपनी Nvidia के प्रोससर्स खरीद रहा था. तब चीन को भी अंदाजा नहीं था, ये सनकी युवा आने वाले समय में तहलका मचाने वाला है.

आज लियांग का लेटेस्‍ट AI मॉडल डीपसेक (DeepSeek-R1) ने पूरे ग्लोबल मार्केट को हिलाकर रख दिया है और सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है, उसी कंपनी Nvidia को. अमेरिकी कंपनियां AI मॉडल्स डेवलप करने में कई बिलियन डॉलर खर्च कर डाले, वहीं डीपसेक का दावा है कि इसे महज 6 मिलियन डॉलर में तैयार किया गया है.

27 जनवरी 2025 को डीपसेक की कॉस्टिंग को लेकर आई इस खबर के चलते ग्लोबल मार्केट में तमाम बड़े टेक कंपनियों के शेयर्स धड़ाम हो गए. एनवीडिया के शेयरों में 17% की भारी गिरावट देखी गई और इसके मार्केट कैप से करीब 590 बिलियन डॉलर साफ हो गए. 6 मिलियन डॉलर की कंपनी ने नेस्डेक में उसके 600 अरब डॉलर मिनटों में स्वाहा कर दिए.

आइए इस जुनूनी युवा लियांग वेनफेंग के बारे में थोड़ा और विस्तार से जानते हैं.

शिक्षक के बेटे हैं लियांग

चीन युवा लियांग वेनफेंग, इंफॉर्मेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं. AI डेवलपर डीपसीक को 40 साल के लियांग वेनफेंग ने ही बनाया है. वे डीपसीक के फाउंडर और CEO हैं. चीन के झानजियांग शहर में एक प्राइमरी स्कूल के शिक्षक के घर उनका जन्म हुआ. स्कूल टीचर के बेटे लियांग बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे थे और सीखने के मामले में बहुत ही जुनूनी भी थे.

टार्गेट ट्रैकिंग एल्गोरिदम की खोज

साल 2007 में चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी से IT इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरा किया, जबकि साल 2010 में इंफॉर्मेशन और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. स्कूल के शुरुआती दिनों से ही उनको नई-नई चीजें सीखने और समस्याओं का हल निकालने का शौक था.

रिसर्च मैनेजमेंट के दौरान उन्होंने टार्गेट ट्रैकिंग एल्गोरिदम की खोज की. इसमें उन्होंने कम खर्च वाले PTZ कैमरों का इस्तेमाल किया था और आज उनके इस इनोवेशन ने OpenAI के चैटजीपीटी को पछाड़ कर रख दिया है

.लियांग ने बनाई कई कंपनियां

लियांग ने पढ़ाई पूरी करने के बाद AI बिजनेस से जुड़ी कई कंपनियां बनाईं. उन्होंने साल 2013 में हांग्जो याकेबी इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनी की स्थापना की. वहीं, साल 2015 में झेजियांग जियुझांग एसेट मैनेजमेंट कंपनी बनाई.

फिर साल 2019 में उन्होंने हाई-फ्लायर AI को लॉन्च किया और साल 2023 में डीपसीक कंपनी बनाई. ये कंपनी AI डेवलप करती है. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है, जिसका ताजा उदाहरण पूरी दुनिया देख रही है.

हालांकि लियांग वेनफेंग का कहना है कि डीपसीक का इरादा कभी भी विनाशकारी नहीं था, ये सब सिर्फ एक्सीडेंटली हो गया.

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