मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की “घंटा” टिप्पणी ने एक अफ़सर की बलि ली है और उसे निलंबित किया गया है।
दरअसल, उज्जैन के एसडीएम आनंद मालवीय ने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मुद्दे पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर कानून एवं व्यवस्था की स्थिति के संदर्भ में एक निर्देश जारी किया था। इस आदेश में मंत्री की टिप्पणी को “तानाशाही व्यवहार का प्रतीक”, “अमानवीय” करार दिया गया था। इसके अलावा इस आदेश में यह भी लिखा हुआ था कि भाजपा-शासित इंदौर महापालिका के आपूर्ति किए दूषित व गंदा पानी पीने से 14 मौतें हुईं हैं और 2800 लोगों का इलाज चल रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है और भाजपा विधायक व सांसदों का घेराव किया जाएगा।
इस आदेश को लेकर उज्जैन के विभागीय आयुक्त ने मालवीय को निलंबित किया। मालवीय पर एक बेहद संवेदनशील मामले में कोताही बरतने का आरोप है।
इस बीच, मालवीय ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उनके आदेश के कुछ वाक्य कांग्रेस के एक ह्वाट्सऐप ग्रुप में विरोध प्रदर्शन की घोषणा करते संदेश से लिए गए लगते हैं, जो रीडर ने लिए थे। यह पता चलते ही उन्होंने आदेश रद्द किया था और नया आदेश जारी किया था। पर किसीने पुराना आदेश वायरल कर दिया।
उल्लेखनीय है कि विजयवर्गीय ने एनडीटीवी के रिपोर्टर अनुराग द्वारी के प्रदूषित पानी से हुई मौतों के संबंध में सवालों को “फोकट के सवाल” करार दिया था और फिर “घंटा” शब्द का इस्तेमाल किया था। द्वारी ने उन्हें कैमरे पर ही फटकार भी लगायी थी। वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने और विपक्ष के हंगामे के बाद विजयवर्गीय ने खेद भी प्रकट किया था।





