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*चीन की घुसपैठ जारी, अब शक्सगाम घाटी में किया सड़क निर्माण,सैटेलाइट तस्वीरों से बड़ा खुलासा*

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भारत की जमीन परचीन ने शक्सगाम घाटी में सड़क नेटवर्क का विस्तार कर लिया है। सैटेलाइट तस्वीरों से इसका खुलासा हुआ है। यह भारतीय क्षेत्र 1947 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में था और 1963 में एक सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने इसे अवैध रूप से चीन को सौंप दिया गया था। भारत इस क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है और कभी भी इसपर चीन के क्षेत्र होने को मान्यता नहीं दी। शक्सगाम घाटी लद्दाख के सबसे उत्तरी भाग में, सियाचिन ग्लेशियर के ठीक आगे स्थित है।

चीन ने शक्सगाम घाटी में सड़क नेटवर्क का विस्तार कर लिया है। सैटेलाइट तस्वीरों से इसका खुलासा हुआ है। यह भारतीय क्षेत्र 1947 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में था और 1963 में एक सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने इसे अवैध रूप से चीन को सौंप दिया गया था। भारत इस क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है और कभी भी इसपर चीन के क्षेत्र होने को मान्यता नहीं दी। शक्सगाम घाटी लद्दाख के सबसे उत्तरी भाग में, सियाचिन ग्लेशियर के ठीक आगे स्थित है, जिसे भारत ने 1984 में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान अपने नियंत्रण में ले लिया था।

चीन के इस नये सड़के के बारे में खुलासा ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषक नेचर देसाई ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए की है। देसाई ने ही सबसे पहले 2024 में सड़क के मूल निर्माण की सूचना दी थी। आपको बता दें कि यह रोड चीन के G219 हाईवे (अक्साई चिन रोड) से अलग होकर अघिल पास के जरिए शक्सगाम घाटी में प्रवेश करता है। यह लद्दाख और शिनजियांग के बीच ऐतिहासिक सीमा थी।

चीन ने शक्सगाम घाटी में किया सड़क का निर्माण
आपको बता दें कि पाकिस्तान ने 1962 के युद्ध में भारत की हार के कुछ ही महीनों बाद, मार्च 1963 में यह क्षेत्र चीन को सौंप दिया था। हालांकि भारत की विदेश नीति में साफ शब्दों में कहा गया है कि शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न अंग है। और पाकिस्कान ने अवैध तरीके से ये क्षेत्र चीन को सौंपा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान ने पीओके को बांटने और पीओके में चीन के प्रभाव को बढ़ाने की नीयत से, भारत का मुकाबला करने के लिए चीन को एक बड़ा हिस्सा सौंप दिया था। जुलाई 2024 में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत के मजबूत रुख को फिर से दोहराया था। उन्होंने कहा था कि “शक्सगाम घाटी भारत के भूभाग का हिस्सा है। हमने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी स्वीकार नहीं किया, जिसके जरिए पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को चीन को सौंपने का गैरकानूनी प्रयास किया था।”

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में पाकिस्तानी पत्रकार टॉम हुसैन की 2024 की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान, दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को गहरा करने के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान (पाकिस्तान के एक और अवैध कब्जे वाले हिस्से) के रास्ते चीन में नए जमीनी रास्ते बनाने की कोशिश कर रहा है। अखबार ने यह भी बताया था कि इन गतिविधियों का मकसद लद्दाख और कश्मीर में भारतीय सेना के खिलाफ संयुक्त अभियानों की तैयारी को बढ़ावा देना है। अक्साई चीन और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीनी इन्फ्रास्ट्रक्चर का डेवलपमेंट और शक्सगाम घाटी में सड़क विस्तार, भारतीय क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की चीन की कोशिशों को दिखाता है।

Ramswaroop Mantri

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