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 *नर्मदा में जलप्रवाह नियमन का न हो उल्लंघन! केंद्रीय जल आयोग की नियमावली का हो पालन!* 

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 *’बिना पुनर्वास डूब’ से ग्रस्त परिवारों को फिर से करना होगा जलसत्त्याग्रह?* 

नर्मदा  घाटी में सरदार सरोवर का जलस्तर गतिमानता से बढ़ते हुए अब पहुंचा है, 128 मी. पर! इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर के 18 और 9 गेट्स खोले जाने से, सरदार सरोवर के जलग्रहण क्षेत्र की वृष्टी के अलावा जलप्रवाह की बढ़ोतरी हुई है| इस उपरी क्षेत्र से पधारते जल की निकास करनी होगी, सरदार सरोवर के गेट्स पर्याप्त मात्रा में खुले रखकर!

नर्मदा घाटी में बर्गी से सरदार सरोवर तक नर्मदा और उपनदियों पर निर्मित 10 बांधों से छोड़े जाने वाले जलप्रवाह का सबसे अधिक असर होगा, सरदार सरोवर के किनारे के गावों में बसे परिवारों के घर और खेती पर! 2023 में आयी विनाशकारी डूब जिससे प्रभावित हुए 10,000 से अधिक परिवार, आज भी पूर्णतः पुनर्वसित नही हुए हैं| केवल राहत मिली है तो सैंकड़ों परिवार उससे भी वंचित है, जैसे गाव कटनेरा, उरदना और धरमपुरी में! जिनके मकान, दुकान शासन से भूअर्जित हो चुके हैं, उन्हें पुनर्वसित न करते हुए फिर से डूबग्रस्त करना, नर्मदा ट्रिब्यूनल फैसला – जो कानून है-, पुनर्वास नीति तथा सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है| आजतक मध्यप्रदेश शासन तथा केंद्रीय जल आयोग ने, 1984 में निश्चित किये और 2023 में साबित हुए सही बैकवॉटर लेवल्स को मंजूर करते हुए, 2008 में अवैज्ञानिक और अवैध तरीके से पुनरीक्षित लेव्हल्स को निरस्त करने का निर्णय नही लिया है| इस पुनरीक्षण के गलत आधार पर अधूरा पुनर्वसन के बाद, ‘डूब से बाहर’ घोषित किये 15946 परिवारों में से अधिकांश डूबग्रस्त हो चुके हैं, जिन्हे उर्वरित पुनर्वास के लाभ देना जरूरी है| आज भी पुनर्वास की प्रक्रिया में, सूचीयाँ बनाने में हुए गैरव्यवहार एवं भ्रष्टाचार से गरीब, श्रमिक, दलित, आदिवासी, किसान- मजदूर भी वंचित रहे हैं| सैंकड़ों परिवार टीनशेड में या शासकीय भवनों में निवास करने मजबूर है और कुछ गावों में डूब चुके घरों में ही रहते हैं| किरायेदार बने हैं कई, जो मकान मालिक थे… जो सब अन्याय और अत्याचार है!

इस परिप्रेक्ष्य में आज इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर से छोड़ा गया जलप्रवाह भी, केंद्रीय जल आयोग की 2018 की नियमावली के उल्लंघन के साथ ही हो रहा है| 31 जुलाई तक 50% जलाशय रिक्त रखने के नियम का उल्लंघन करते हुए इंदिरा सागर में 77%, बर्गी में 78% और तवा में 80 % जलाशय 28 जुलाई को ही भरने देना, जलप्रवाह का नियमन, निकास द्वारा नही करने से हुआ जो नियमावली का उल्लंघन होते हुए अब बडा जलप्रवाह सरदार सरोवर में पहुँच रहा है| सरदार सरोवर के गेट्स पर्याप्त मात्रा में जलनिकास करते रहने से ही डूबग्रस्त फिर से होने से बचेंगे बडवानी, धार, खरगोन जिलों के गाव और धरमपुरी, महेश्वर नगर! नहीं तो एक साथ जलनिकास सरदार सरोवर से होने पर 2023 जैसे ही बांध के नीचेंवास के गुजरात के भरुच, अंकलेश्वर शहरों के मकान, दुकान, तीन जिलों के (भरुच, नर्मदा, बडोदा) के नदी किनारे के गावों की खेती, मकान, तीर्थ-मंदिर और मछुआरों के नाव- जाल भी फिर से ध्वस्त हो जायेंगे!

केंद्रीय जल आयोग की नियमावली के अनुसार 31 अगस्त तक 77% ही भरते हुए सितंबर 15 तक कोई जलाशय पूर्ण क्षमता तक भरने नही देना है लेकिन जलवायु परिवर्तन और एक ही नदीघाटी में कई सारे बड़े, मझौले बांधों का सिलसिला होते हुए अब, सितंबर अंततक तो जलाशय पूर्ण रूप से भरने नही देना जरूरी है|

यह जिम्मेदारी कानूनन सौंपी गयी है, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण पर! नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता की अध्यक्षता में बनी हुई Reservoir Regulation Committee (जलाशय नियमन समिति) की बैठकें तो होती रहती है; कई सारे बाढ नियंत्रण केंद्र बने हुए बतायें गये हैं लेकिन कोई मुनादी भी न देते हुए 2023 में, तथा उसके पहले 2013, 2020 में भी डूबग्रस्त होकर कई परिवारों ने नुकसान भुगता है| 2024 में हमारे धरना- उपवास दौरान, जलसत्याग्रह दौरान भी आश्वासन देकर जलनियमन किया गया लेकिन पूर्व में ही डूब भुगते कई पहाड और निमाड़ के परिवारों को संपूर्ण पुनर्वास के तहत् भूखंड, मकान निर्माण का 5.80 लाख रु. का अनुदान तथा 5 एकड़ खेती के लिए 60 लाख रु. का अनुदान न देने से वे आजतक वंचित है| पात्रता सुनिश्चित करने के लिए सही और परिपूर्ण जाँच नहीं होने से, भ्रष्टाचारी दलालों से तथा सूची बनाने में हुई गलतीयों से अधिकतर गरीब वंचित रहे हैं| केवट, कुम्हार, मछुआरों भी पूरा हक नही मिला है|

मध्यप्रदेश शासन गुजरात शासन से, कानूनी प्रावधान होते हुए, पुनर्वास के लिए भी संपूर्ण खर्चा नहीं ले पा रही है| यह सब उजागर करता है, कानून और नीति का ही नही, सर्वोच्च अदालत के आदेशों का भी उल्लंघन| तो अन्यायग्रस्तों को उतरना पड़ता है संघर्ष पर, अहिंसक सत्याग्रही बनकर! क्या होगा इस साल, 2025 में, यही सवाल है, और अपेक्षा भी कि शासन- प्रशासन नहीं होने दे अन्याय, घाटी के पीढियों पुराने निवासी, नर्मदा के रक्षकों पर!

 *जितेंद्र मछुआरा  राहुल यादव  भगवान सेप्टा  कुंवरजी यादव  मेधा पाटकर* 

संपर्क:- हेमेन्द्र मंडलोई – 8839295127

Ramswaroop Mantri

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